कर्नाटक में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं. सभी पार्टियों ने चुनाव के लिए कमर कस ली है. पिछले एक महीने से बीजेपी, कांग्रेस और जेडीएस के विभिन्न नेता अपनी पार्टियों और उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटा रहे हैं.
इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कोलार में अपना चुनावी प्रचार शुरू कर दिया. उन्होंने उत्तरी कर्नाटक में कुछेक जगहों पर चुनाव प्रचार किया. ऐसा लगता है कि उन्हें स्थानीय मुद्दों और राज्य सरकार पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है. राज्य में कांग्रेस पार्टी लगातार अपनी चुनावी रणनीति में यही रुख अपनाती नजर आ रही है.
कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस पार्टी लगातार स्थानीय मुद्दों को तरजीह दे रही है. राहुल गांधी लगातार इसी मास्टरप्लान पर टिके हुए हैं. इस पहलू के कई तर्क हैं. इसमें पहला तर्क यही है कि बीजेपी का पूरा ध्यान केंद्रीय नेतृत्व और केंद्र सरकार पर है. लेकिन कांग्रेस पार्टी स्थानीय मुद्दों को तरजीह दे रही है.
दूसरा, चूंकि कांग्रेस विपक्ष में है तो राज्य की बीजेपी सरकार पर उनका हमला सटीक बैठता है. बीते एक महीने में राजनीतिक घटनाक्रमों और विवादों को देखते हुए राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी स्पष्ट रूप से बैकफुट पर है और वह समय के साथ अधिक रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रही है. कर्नाटक में सत्ता में आने के बाद से ही बीजेपी अपना एजेंडा तैयार करने में लगी थी और कांग्रेस उसके खिलाफ खड़ी थी. लेकिन बीते एक साल में दोनों पार्टियों की भूमिकाएं बदल गई हैं. अब कांग्रेस एजेंडा सेट कर रही है जबकि बीजेपी उस एजेंडे के खिलाफ खड़ी है.
कर्नाटक के मौजूदा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी राज्य सरकार पर सीधे हमले कर रहे हैं. हाल ही में एक रैली के दौरान राहुल गांधई ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था और कहा था कि बीजेपी सबसे भ्रष्ट सरकार है, इसमें हर काम के लिए 40 फीसीद कमीशन लिया जाता है.उन्होंने कहा कि बीजेपी हर काम का 40 फीसदी लेती है तो वह 40 सीटों पर ही सिमट जाएगी.
उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने राज्य में नफरत और हिंसा में वृद्धि देखी है. इससे पहले कर्नाटक में अमूल बनाम नंदिनी विवाद के बीच राहुल गांधी पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ बेंगलुरु में नंदिनी के एक आइसक्रीम पार्लर पर पहुंचे थे. बाद में उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कर्नाटक की शान- नंदिनी सर्वश्रेष्ठ है. इसके साथ वह स्थानीय मुद्दों को तरजीह देने का संदेश दे रहे थे. लेकिन इसके साथ ही वह विवाद में भी घिर गए और उनके विपक्षियों ने उन पर निशाना साधा.
लोगों ने सोचा होगा कि राहुल गांधी अपने चुनाव प्रचार भाषणों में लोकसभा से रद्द की गई उनकी सांसदी और अडानी विवाद जैसे मामलों पर फोकस करेंगे. लेकिन कर्नाटक से बाहर और देशभर में उनकी बातों का आधार रहा है.
बता दें कि कर्नाटक में 10 मई को चुनाव होंगे जबकि 13 मई को नतीजे आएंगे.
(रिपोर्ट: संदीप शास्त्री)