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'ट्रक ड्राइवर से निबंध क्यों नहीं लिखवाते, न्याय भी दौलत का मोहताज', पुणे पोर्श कांड पर बोले राहुल गांधी

वीडियो मैसेज में राहुल ने कहा, 'अगर कोई बस ड्राइवर, ट्रक ड्राइवर, ओला, उबर, ऑटो ड्राइवर गलती से किसी को मार देते हैं तो उन्हें 10 साल जेल की सजा हो जाती है और चाभी उठाकर फेंक दी जाती है. लेकिन अगर कोई अमीर घर का 16-17 साल का बेटा पोर्श गाड़ी को शराब पीकर चलाता है और दो लोगों की हत्या करता है तो उससे कहा जाता है कि निबंध लिख दो.'

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पुणे पोर्श कांड को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
पुणे पोर्श कांड को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

पुणे में अपनी पोर्श कार से बाइक को टक्कर मारने वाले किशोर को जमानत दिए जाने को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. 19 मई को पोर्श कार की टक्कर में बाइक सवार युवक और युवती की मौत हो गई थी. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया.

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वीडियो मैसेज में राहुल ने कहा, 'अगर कोई बस ड्राइवर, ट्रक ड्राइवर, ओला, उबर, ऑटो ड्राइवर गलती से किसी को मार देते हैं तो उन्हें 10 साल जेल की सजा हो जाती है और चाभी उठाकर फेंक दी जाती है. लेकिन अगर कोई अमीर घर का 16-17 साल का बेटा पोर्श गाड़ी को शराब पीकर चलाता है और दो लोगों की हत्या करता है तो उससे कहा जाता है कि निबंध लिख दो.'

'ऑटो ड्राइवर से क्या नहीं लिखवाते निबंध?'

उन्होंने कहा, 'निबंध ट्रक ड्राइवर, बस ड्राइवर से क्यों नहीं लिखवाते, उबर ड्राइवर, ऑटो ड्राइवर से क्यों नहीं लिखवाते.' राहुल गांधी ने कहा, 'नरेंद्र मोदी से पूछा गया कि दो हिंदुस्तान बन रहे हैं, एक अरबपतियों का, एक गरीबों का. उनका जवाब आता है कि क्या मैं सबको गरीब बना दूं. सवाल यह नहीं है, सवाल न्याय का है. अमीरों को और गरीबों को, दोनों को न्याय मिलना चाहिए. न्याय सबके लिए एक जैसा होना चाहिए. इसीलिए हम लड़ रहे हैं. अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं.' 

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क्या है पूरा मामला?

हिट एंड रन की यह घटना 19 मई की सुबह की है. पुणे के कल्याणी नगर इलाके में रियल एस्टेट डेवलपर विशाल अग्रवाल के 17 वर्षीय बेटे ने अपनी स्पोर्ट्स कार पोर्श से बाइक सवार दो इंजीनियरों को रौंद दिया था, जिससे दोनों की मौत हो गई. इस घटना के 15 घंटे बाद आरोपी नाबालिग को कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई. 

कोर्ट ने उसे 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव-समाधान पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था. हालांकि, पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शराब के नशे में था और बेहद तेज गति से कार को चला रहा था.

वयस्कों की तरह मुकदमा चलाने की मांगी अनुमति

इस मामले में पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने कहा कि नाबालिग आरोपी पर एक वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जाना चाहिए. इसके लिए पुलिस ने ऊपरी अदालत से अनुमति मांगी है. पुलिस कमिश्नर का यह बयान आरोपी नाबालिग को जमानत दिए जाने पर नाराजगी के बीच आया. उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 304ए (लापरवाही से मौत) और मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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