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कहां इंडिया, कहां अमेरिका... दो देशों के ट्रक ड्राइवर्स से राहुल की बातचीत के 7 मजेदार पॉइंट्स

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिका में ट्रक की सवारी की है. उन्होंने एक ट्रक में वॉशिंगटन से न्यूयॉर्क तक 190 किलोमीटर तक सफर किया. राहुल ने ट्रक ड्राइवर तेजिंदर गिल से बातचीत भी की. यात्रा के दौरान राहुल ने ट्रक ड्राइवर की महीने की कमाई के बारे में भी पूछा. इससे पहले राहुल ने भारत में भी दिल्ली से चंडीगढ़ तक यात्रा की थी और उनके जिंदगी से जुड़े सवाल पूछे थे.

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राहुल गांधी ने अब अमेरिका में ट्रक यात्रा की.
राहुल गांधी ने अब अमेरिका में ट्रक यात्रा की.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस समय अमेरिका की यात्रा पर हैं. यहां उन्होंने एक ट्रक की सवारी की और ड्राइवर से उनकी जिंदगी से जुड़े सवाल पूछे. इससे पहले राहुल ने 23 मई को भारत में ट्रक यात्रा की थी. यहां उन्होंने दिल्ली से चंडीगढ़ तक यात्रा की थी और उनकी समस्याएं जानी थीं. जानिए, राहुल की अमेरिका के ट्रक ड्राइवर से क्या बातचीत हुई? भारत के ट्रक ड्राइवर से उनकी जिंदगी कितनी अलग है...

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कांग्रेस ने मंगलवार को बताया कि राहुल गांधी ने भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवरों के साथ वाशिंगटन डीसी से न्यूयॉर्क तक 190 किलोमीटर की 'अमेरिकन ट्रक यात्रा' की. कांग्रेस ने अमेरिका में भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवरों के रोजमर्रा के जीवन पर केंद्रित बातचीत की और दिल से दिल की बात जानी.

कांग्रेस ने कहा, ट्रक ड्राइवर भारत में मामूली पैसे कमा पाते हैं. जबकि महंगाई और रिकॉर्ड मूल्य वृद्धि का सामना कर रहे हैं. वहीं, अमेरिका में ट्रक ड्राइवर्स को उनके श्रम का उचित वेतन के साथ सम्मान मिलता है. पार्टी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर अमेरिकी ट्रक ड्राइवर के साथ राहुल की बातचीत का 9 मिनट का वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में राहुल ग्रे टी-शर्ट पहने हैं. वे पहले ट्रक में सवार होते हैं और फिर उनका ड्राइवर के साथ सवाल-जवाबों का सिलसिला शुरू हो जाता है. 

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सबसे पहले जानिए राहुल की अमेरिका में ट्रक ड्राइवर से बातचीत के 7 मजेदार पॉइंट्स

अमेरिकन ट्रक ड्राइवर तेजिंदर सिंह गिल ने बताया कि वो अमेरिका में ट्रक चलाते हैं. आज राहुलजी के साथ ड्राइव करेंगे. ट्रक में सवार होने के बाद सबसे पहले राहुल उसके फीचर्स जानते हैं. वॉशिंगटन डीसी से न्यूयॉर्क के बीच 190 किमी का सफर तय करना शुरू करते हैं. पढ़िए पूरी बातचीत...

1. भारत से बिल्कुल अलग हैं ट्रक के फीचर्स

राहुल गांधी-  ये तो भारतीय ट्रक से बिल्कुल अलग है. ये बहुत कम्फर्टेबल है. यहां पर मैंने एक चीज देखी. ये जो ट्रक है, वो ड्राइवर्स के लिए डिजायन है. यानी उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. हिंदुस्तान में जो ट्रक हैं, उसका ड्राइवर्स की सुविधाओं से कोई लेना-देना नहीं है. वो ड्राइवर्स के लिए नहीं बनाया गया है. 
ड्राइवर तेजिंदर सिंह गिल- सुविधाओं को ध्यान में रखना चाहिए. जो ट्रक चलाता है, व्यवसाय करवाता है, उसकी सुविधाएं सबसे पहले देखना चाहिए. 

2. पुलिस से परेशानी नहीं... चोरी का भी डर नहीं

राहुल- भारतीय ट्रक की तुलना में इसकी सेफ्टी भी बेहतर है.
गिल- बहुत फर्क है. रास्ते में कोई तंग नहीं करता. पुलिस की परेशानी नहीं है. रोड पर चोरी का भी डर कम है.
राहुल- यहां पर पुलिस पिकैट काफी मिलते हैं?  स्पीड, चेकिंग के लिए.
गिल- स्पीड पर जाते हैं तो एक्शन होता है. वैसे परेशान नहीं करते. जैसे- आरटीओ ने रोक लिया, यह सब नहीं होता.
राहुल-  स्पीड लिमिट क्या है यहां पर?
गिल- जिस स्टेट में हम जा रहे हैं, यहां 65 किमी प्रति घंटे के हिसाब से चल सकते हैं. स्पीड की लिमिट एरिया को ध्यान में रखकर तय की गई है.
राहुल- इस ट्रक के सबसे अच्छे फीचर्स कौन से लगते हैं आपको ?
गिल- ये ऑटोमैटिक ट्रक है. ड्राइव और बैक में करने का ही काम है. स्क्सलेटर और ब्रेक है. इसमें क्लच नहीं है. ये भी अच्छी बात है इसकी.

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राहुल गांधी

3. ट्रक में कैसे सफर करते हैं ड्राइवर?

राहुल- आप जनरली रेस्टोरेंट में खाते हैं या अपना खाना लाते हैं?
गिल- नहीं, सभी लोग अपना खाना लेकर आते हैं. बाहर तो एक टाइम खा लिया तो दूसरे टाइम मन नहीं करता है. हमारी कम्युनिटी तो रोटियां खाना पसंद करती है. एक दिन या दो दिन ही बाहर खा सकते हैं. खाना खुद लेकर आते हैं और फ्रिज में रख लेते हैं. छोटा चूल्हा होता है. माइक्रोवेब होता है. उसमें गरम कर लेते हैं. अब तो रोटी बनाने वाली मशीन आ गई है. कुछ लोग जो लंबा सफर करते हैं, उन लोगों ने ट्रक में ही रख ली है. उनका 8-10 दिन का सफर होता है. मशीन रोटी पकाकर देती है. उसमें आटा और पानी डालना होता है. 

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4. फ्यूल के लिए पैसे लेकर चलने का झंझट नहीं

राहुल- एक बार फुल टैंक कराने के लिए कितने पैसे लगते हैं?
गिल- अगर हमने 100 गैलन फ्यूल डाला तो 400-450 डॉलर का खर्च आता है. लेकिन, अभी आप जो बात कर रहे हैं, यहां कंपनियों ने फ्यूल के लिए हमें क्रेडिट कार्ड दिया है. हम कैश बिल्कुल नहीं रखते हैं. हम इस कार्ड का उपयोग फ्यूल भरने और 15 दिन के बाद भुगतान करने के लिए करते हैं. यह हमारे लिए बहुत आसान हो जाता है. हमें कमाने के लिए 15 दिन मिलते हैं, हम बचत कर लेते हैं, अगर ये सुविधाएं वहां दी जाएं तो अच्छा रहेगा.
राहुल- आपका मतलब क्रेडिट सुविधा दी जाती है?
गिल का साथी- अगर भारत में ड्राइवरों के पास यह सुविधा मिल जाती है तो आसान होगा. क्योंकि फ्यूल एक प्रमुख खर्चा है. उनके लिए (भारतीय ट्रक ड्राइवर्स) जीवन आसान हो जाएगा.

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5. अच्छी तनख्वाह, बेहतर जीवन...

राहुल- आप लोग महीने में कितना कमा लेते हो?
गिल- इंडिया के हिसाब से तो बहुत बन जाता है. एक ट्रक ड्राइवर आराम से 8 हजार से 10 हजार डॉलर तक कमा लेता है. भारतीय के हिसाब से देखें तो 8 लाख रुपए महीने की कमाई हो जाती है. 
राहुल- (चौंकते हुए) 8 लाख रुपए महीने के?
गिल- पैसा अच्छा है इस इंडस्ट्री में. पैसे की कोई बात नहीं है. काम भी बहुत है. जिन लोगों के पास अपॉर्च्युनिटी नहीं है या बिजनेस करने के लिए पैसा नहीं है, उनके लिए सबसे अच्छी अपॉर्च्युनिटी यहां पर है.
राहुल- हिंदुस्तान के जो ट्रक ड्राइवर्स हैं, उनको आप ये मैसेज देना चाहते हैं?
गिल- जी हां, मैं मैसेज देना चाहता हूं कि आप बहुत हार्ड वर्क कर रहे हो. बड़ी मेहनत करना पड़ता है. 8-10 दिन तक बाहर रहकर काम करना पड़ता है. रोटी पानी की समस्या. परिवार से दूर रहना. भारत की तुलना में देखें तो यहां ट्रक चलाकर परिवार का अच्छे से भरण-पोषण कर सकते हैं. वहां पर ट्रक ड्राइवर्स को परिवार चलाना मुश्किल है. घर का कोई सदस्य बीमार पड़ जाता है तो 8-10 हजार रुपए तो उसमें खर्च हो जाता होगा. उनके लिए एक परमानेंट रेट फिक्स जरूर होना चाहिए.
राहुल- मिनिमम रेट?
गिल- हां, मिनिमम रेट होना चाहिए.

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राहुल गांधी

6.  स्टार्टअप्स, अपॉर्च्युनिटी... मुश्किलें भी नहीं

राहुल- इंडिया में दूसरी बात है. जैसे ये आपका ट्रक है, लेकिन, इंडिया में ट्रक ड्राइवर का ट्रक नहीं होता है. ट्रक ड्राइवर सिर्फ ट्रक चलाता है. ट्रक किसी और का होता है?
गिल- वो मैं बात कर रहा हूं. एक तो रेट अच्छा हो. यहां एक बड़ी अपॉर्च्युनिटी मिलती है. पैसे किसी के पास नहीं है. बस डाउन पेमेंट दिया और उसके क्रेडिट के हिसाब से बैंक लोन लेकर ट्रक ले लिया. काम शुरू कर देते हैं. इंडिया में प्रॉब्लम क्या है, वहां जमीन के पेपर या प्रॉपर्टी चाहिए होती है, लोन के लिए. वहां जो गरीब तबका ड्राइवर है, उनके पास खुद की प्रॉपर्टी नहीं होती है कोई. और जब लोन लेना होता है तो पेपर मांगे जाते हैं. वो उन ड्राइवर्स के पास नहीं होते हैं. इसलिए वो जिंदगी भर इसी तरह ट्रक ही चलाते रहते हैं. जबकि यह देश लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है. इसलिए हमारे यहां काफी संभावनाएं हैं.

राहुल- बहुत गहरी बात बोली है आपने?
गिल- वहां पर बीजेपी फॉलोअर्स कोई इम्पलॉइमेंट की बात थोड़ी कर रहे हैं. स्टडी की बात नहीं कर रहे हैं. कोई अच्छा इंसान बनने की बात नहीं कर रहा है. लोगों ने जिता दिया इन लोगों (बीजेपी) को. भारत में महंगाई इतनी बढ़ गई. रोटियों को लेकर तरसने लगे. ये बात लोगों के समझ में आ गई है. असली धर्म तो वो है, जो लोगों की सेवा करता है. जितनी श्रद्धा है, अपने धर्म को मानना चाहिए. लेकिन धर्म रोटी नहीं देता है. अगर रोटी कमानी है तो उसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी. कोई स्किल लेनी पड़ेगी.

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7. मूसेवाला को न्याय दिलवा दो...

राहुल- किसी धर्म ने नफरत फैलाने के लिए नहीं कहा है?
गिल- किसी ने भी नहीं कहा है. 
गिल- गाना सुनेंगे राहुलजी?
राहुल- बिल्कुल.
गिल- हमारा भी आपसे एक निवेदन है, कांग्रेस के एक वर्कर सिद्धू मूसेवाला को इंसाफ नहीं मिला है. 
राहुल- हां, बिल्कुल. 
राहुल- 295 (मूसेवाला का गाना) लगाओ? मैं उसे पसंद करता हूं.
- फिर राहुल गाना सुनते हैं. उसके बाद ये यात्रा समाप्त हो जाती है.

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अब जानिए राहुल की दिल्ली से चंडीगढ़ में ट्रक ड्राइवर से बातचीत के 7 मजेदार पॉइंट्स

23 मई की रात राहुल गांधी ने दिल्ली बॉर्डर पर सबसे पहले ट्रक ड्राइवर्स से मुलाकात की. उनका हाल-चाल जाना. उसके बाद उनकी जिंदगी और काम से जुड़े सवाल पूछे. जानिए, ट्रक ड्राइवर प्रेम राजपूत ने क्या जवाब दिया थे...

1. बेरोजगार थे इसलिए ट्रक ड्राइवर बने...

राहुल गांधी- कैसे आए इस काम में? शुरुआत कैसे की?
ट्रक ड्राइवर- कोई काम नहीं था. खाली बैठे थे.
राहुल- एक महीने में कितने दिन चला लेते हैं और कितने दिन ऑफ मिलता है?
ड्राइवर-  कोई ऑफ नहीं मिलता है. रोज गाड़ी चलानी पड़ती है. दिन और रात चलाते हैं. 12 घंटे तक चलाते हैं. कभी 24 घंटे भी चलाना पड़ता है. 

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राहुल गांधी

2. सिर्फ 10 हजार रुपए कमाई, बीमा भी नहीं होता...

राहुल- पैसा कितना मिलता है?
ड्राइवर- 10 हजार रुपए है. बताइए, 10 हजार रुपए में बच्चे पल जाएंगे? इस दुनिया में 10 हजार रुपए में बच्चे भी पढ़ाना है.
राहुल- 10 हजार में कितने घंटे तक ट्रक चलाना पड़ता है.
ड्राइवर- वही 24 घंटे तक गाड़ी चलाना है. रोड पर चलते वक्त समय का कोई भरोसा नहीं होता है.
राहुल- एक्सीडेंट होता है तो बीमा होता या नहीं?
ड्राइवर- नहीं, कोई बीमा नहीं होता है. 
राहुल- एक आम ड्राइवर्स कितने साल तक ट्रक चला सकता है?
ड्राइवर- लाइसेंस की डेट होती है. 20 साल की अवधि होती है. 60 साल की उम्र वाले चला रहे हैं. कुछ 70 साल की उम्र तक चलाते देखे जा रहे हैं.

3. नौकरी सुरक्षित नहीं, इज्जत भी नहीं मिलती..

राहुल- कभी भी ड्राइविंग के काम से निकाला जा सकता है?
ड्राइवर- हां, कभी भी निकाला जा सकता है. चाहे हमारी खुद की अपनी स्टेट क्यों ना हो. हम लोगों की कोई कदर नहीं है. हम टैक्स भरते. रोड टैक्स, टोल टैक्स, ऑल इंडिया टैक्स. सारी प्रक्रिया फॉलो करते, फिर भी हमारी कोई वैल्यू नहीं होती है. डबल टैक्स हो गए हैं. 
राहुल- अगर सरकार आपके लिए कुछ करना चाहे तो क्या करना चाहिए?
ड्राइवर- ड्यूटी का समय तय होना चाहिए. 12 घंटे तक काम लेना चाहिए. अभी 24 घंटे तक बिना रुके और थके काम करते हैं. कुछ आराम करने का समय मिलना चाहिए. ओवर टाइम जैसा कुछ नहीं मिलता है.
राहुल- अगर आपका माल चोरी हो जाता है या खराब हो जाता है तब क्या होता है?
ड्राइवर- पूरा दोष ड्राइवर्स पर आता है. चोरी करने वाला तो भाग जाता है. हमें ले जाएंगे, अंदर करेंगे. चार डंडे मारेंगे. चोरी का इल्जाम लगा देंगे. मतलब गाड़ी वाले की कोई सुरक्षा नहीं रहती है. 

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4. सिर्फ गुजारा होता है, बचत नहीं... 

राहुल- पैसा बचा पाते हो थोड़ा-बहुत?
ड्राइवर- हां, गुजारा हो जाता है. बस, यही काम करते हैं.
राहुल- कितना पैसा लगता है बच्चों की पढ़ाई में?
ड्राइवर- बच्चे गांव में प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं. अंग्रेजी में पढ़ाई कर रहे हैं.
राहुल- बच्चे बढ़े होकर क्या करना चाहते हैं?
ड्राइवर- बच्चे कोई सरकारी नौकरी देखेंगे. अभी तो पढ़ रहे हैं.
राहुल- आप नहीं चाहते कि बच्चे ट्रक चलाएं?
ड्राइवर- नहीं, हम नहीं चाहते हैं. जो अमीर लोग हैं, उनको गरीबों की मदद करना चाहिए. उनको साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए. ताकि उनके बच्चे भी अच्छे तरीके से पढ़ लिख सकें.
राहुल- जो थोड़ा सा पैसा बचाते हो, उससे क्या करते हो? बैंक में भी रखते हो?
ड्राइवर- बच्चों की पढ़ाई में खर्च करते हैं. बैंक में तो थोड़ा-बहुत ही रख पाते हैं. 

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5. अकेले झेलते मुसीबतें, घरवालों को रखते बेफ्रिक...

राहुल- पापा आए कभी आपके साथ ट्रक में?
ड्राइवर- नहीं. उन्होंने तो मना किया था. लेकिन कोई काम नहीं था, इसलिए चलाना पड़ रहा है. खतरे का काम है. 
राहुल- अगर आप ये नहीं करते तो क्या करते?
ड्राइवर- तब गांव में ही खेतीबाड़ी करते. अगर पढ़-लिख जाते तो कुछ और अच्छा सोचते. प्राइवेट जॉब करते. 
राहुल- जो बड़ी ट्रक चलाते हैं, उनको ज्यादा पैसा मिलता है?
ड्राइवर- थोड़ा बहुत अंतर रहता है. ज्यादा नहीं रहता.

6. मुसीबत आई तो ट्रक चलाना सीखा... 

राहुल- कितने साल से काम करते हैं?
कंडक्टर राकेश कुमार- मैं बहुत छोटा था, लगभग 18 साल का. तब चलाना शुरू किया था. मेरे पिता मुश्किल वक्त से गुजर रहे थे. उन्हें पेट का कैंसर हो गया था. उनका 15 दिन पहले ही निधन हो गया है. अब इनकी महंगाई हो गई है, कैसे क्या करें
राहुल- ज्यादा महंगाई हो गई है?
कंडक्टर- हां, हर चीज महंगी हो गई है. डीजल में सबसे ज्यादा खर्च होता है. हम सामान लेकर जाते हैं. जब डीजल महंगा मिलेगा तो सामान भी महंगा पड़ेगा.

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7. त्योहारों पर भी कमाई नहीं, पैसे भी नहीं बढ़ते

राहुल- मतलब डीजल का असर सब चीज में पड़ता है?
कंडक्टर- यदि हम तेल लेते हैं तो अन्य खाद्य पदार्थ नहीं खरीद पाते हैं. यदि हम गेहूं खरीदते हैं तो उसे पकाने के साधन नहीं ला पाते हैं. ये मुश्किल फंसी है. इंसान क्या करे.
राहुल- महंगाई तो बढ़ रही है, मगर आपका पैसा बनता है, वो बढ़ रहा है?
कंडक्टर- नहीं, पैसा नहीं बढ़ रहा है. जब से काम शुरू किया, तब से वही पैसा मिल रहा.
राहुल- दिवाली और त्योहार के महीने में आपके पैसे ज्यादा बनते हैं या कम होते हैं या कोई फंड नहीं बांटा जाता?
कंडक्टर- नहीं...
राहुल- आप बीमा का पैसा देते हो या नहीं?
कंडक्टर- एक बार बीमा करवाया था. लेकिन उतना तो कमा नहीं पाते थे तो किस्त नहीं दे पाए.


 

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