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राजस्थान: इस्तीफे देकर वापस लेना कांग्रेस विधायकों का राजनीतिक चरित्र, बोले सतीश पूनिया

सतीश पूनिया ने कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से कांग्रेस के शासनकाल में जनप्रतिनिधियों के इस्तीफे निजी स्वार्थ हेतु हुए, भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रतिकूल हैं. उन्होंने आगे कहा कि इस्तीफे देकर इस्तीफे वापस लेना कांग्रेस के विधायकों के राजनीतिक चरित्र को उजागर करता है.

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BJP के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया (फाइल फोटो)
BJP के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया (फाइल फोटो)

पिछले दिनों राजस्थान के जयपुर में हुए सियासी घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस के विधायकों और मंत्रियों ने इस्तीफे दिए थे. इसको लेकर अब प्रदेश के भाजपा प्रमुख सतीश पूनिया ने कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से कांग्रेस के शासनकाल में जनप्रतिनिधियों के इस्तीफे निजी स्वार्थ हेतु हुए, भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रतिकूल हैं. उन्होंने आगे कहा कि इस्तीफे देकर इस्तीफे वापस लेना कांग्रेस के विधायकों के राजनीतिक चरित्र को उजागर करता है. बीजेपी के शिष्टमंडल द्वारा विधानसभा अध्यक्ष से इस्तीफ़ों को लम्बित ना रख निर्णय करने का आग्रह किया गया था. 
 
दरअसल, ये पूरा मामला 25 सितंबर का है. कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर राजस्थान के प्रदेश प्रभारी अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को पर्यवेक्षक के तौर पर जयपुर भेजा गया था. कहा जाता है कि वहां सीएम हाउस में नए मुख्यमंत्री के चयन के लिए विधायक दल की बैठक होनी थी. क्योंकि तब राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की चर्चाएं चल रही थीं.

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विधायकों ने इसलिए दिया था सामूहिक इस्तीफा

बताते हैं कि गहलोत खेमे के विधायकों और मंत्रियों को आशंका हुई कि पार्टी हाईकमान सचिन पायलट को विधायक दल का नेता चुनने जा रहा है. इस पर विवाद बढ़ गया और गहलोत खेमे के विधायक बागी हो गए. वहां मंत्री शांतिलाल के आवास पर एकत्रित हुए और सामूहिक इस्तीफा देने का निर्णय लिया. बाद में बसों में बैठकर विधानसभा अध्यक्ष के आवास पर पहुंच गए. यहां सभी ने स्पीकर को इस्तीफा सौंप दिया. जिसके बाद विधायक दल की बैठक नहीं हो सकी थी. इस पूरे घटनाक्रम से आलाकमान भी नाराज हो गया. प्रदेश प्रभारी अजय माकन की नाराजगी भी साफ तौर पर देखने को मिली.

उन्होंने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट सौंपी. बाद में तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. बाद में अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से माफी भी मांगी थी. सचिन पायलट भी सोनिया गांधी से मिलने के लिए दिल्ली गए थे.

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