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राजस्थान BJP अपने मैनिफेस्टो में किन मुद्दों को साध नहीं पाई?

राजस्थान BJP गहलोत की योजनाओं के जवाब में क्या लाई, उत्तरकाशी टनल में फंसे मजदूर ने क्या कहा, बाइडेन-जिनपिंग में क्या पक रहा है और मध्यप्रदेश के मंदसौर की जनता क्या चाहती है? सुनिए ‘दिन भर’ में.

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Din bhar
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राजस्थान में आने वाली 25 नवंबर को विधानसभा चुनाव की वोटिंग होनी है. उसके पहले आज बीजेपी ने अपना मैनिफेस्टो जारी कर दिया है. खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा इसके लिए जयपुर में थे. मैनिफेस्टो में बीजेपी ने वादा किया है कि गेहूं की फसल 2700 रुपए प्रति क्विंटल खरीदी जाएगी. इसके साथ ही जिन किसानों की जमीन कुर्क हो गई है, उन्हें मुआवजा देने के लिए एक कमेटी बनेगी. महिलाओं की सुरक्षा के लिए हर शहर में एंटी रोमियो फोर्स तैयार होगी और हर थाने में एक महिला डेस्क बनाई जाएगी. इसके साथ ही भाजपा ने पांच साल में ढाई लाख लोगों को सरकारी नौकरी देने का वादा भी किया. बीकानेर से सांसद और केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि उनके मैनिफेस्टो में सभी वर्गों के लिए कुछ न कुछ है. मेघवाल ने जिस विकास की बात की है क्या वो बीजेपी मैनिफेस्टो में भी झलक रहा है, क्या बीजेपी असल में अपने मैनिफेस्टो के जरिए सभी वर्गों के लिए कुछ - न - कुछ लेकर आई है, सुनिए 'दिन भर' में. 

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिलक्यारा टनल पर अभी भी सबकी नज़र है. करीब 109 घंटे यानि 4 दिन से ज्यादा का वक्त बीत चुका है. अब तक 40 मजदूर फंसे हैं. इन्हें निकालने की हर कोशिश अब तक नाकामयाब रही है. लेकिन इस बीच टनल से एक आवाज़ आई. ये अवाज़ किसकी थी, इतने दिनों तक ये ऑपरेशन कहां फंसा रहा.. सुनिए ये रिपोर्ट दिन भर में.

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कल देर रात कैलिफोर्निया में मुलाकात की. दोनों नेताओं की ये बैठक सैन फ्रांसिस्को में, APEC यानी एशिया-पैसेफिक इकोनॉमिक को-ऑपरेशन समिट के दौरान हुई. APEC की स्थापना 1989 में हुई थी. आज ये 21 देशों का एक ग्रुप है. जो  अपनी - अपनी अर्थव्यवस्थाओं को सुधारने और मज़बूत करने के लिए एक दूसरे के साथ हैं. इसके मेंबर्स में अमेरिका और चीन भी हैं. इन दोनों देशों के बीच कोरोना के बाद से बिज़नेस, टेक्नॉलजी, रशिया - यूक्रेन वॉर, ताइवान जैसे मुद्दों पर तनातनी बनी रही है. तो अब खबर है कि दोनों देशों के ये मतभेद मीटिंग के दौरान भी दिखाई दिए. हालांकि, जिनपिंग ने ये भी कहते हुए नजर आए कि धरती इतनी बड़ी है कि यहां दोनों सुपर पावर रह सकती हैं. हमारा देश अमेरिका से अलग है, लेकिन हम इस फर्क के साथ भी ऊपर उठ सकते हैं. इस बयां से इतर ये भी समझना ज़रूरी है कि चाइनीज प्रेसीडेंट ने इस साल सिर्फ तीन विदेश दौरे किए हैं. इनमें तीसरा दौरा था अमेरिका का. भारत के लिए अमेरिका और चीन की मुलाकात क्या लेकर आएगी, सुनिए 'दिन भर' में. 

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लोकतंत्र में नेता भले ही प्रैक्टिकली सुपीरियर हों,प्रभावशाली हों लेकिन चुनावों में अंततः उन्हें जनता के बीच लौटना ही पड़ता है. वहाँ से उनके अगले पांच साल कैसे गुजरेंगे तय होता है. मध्यप्रदेश में कल विधानसभा की सारी सीटों पर वोटिंग होनी है. चुनाव प्रचार ख़त्म हो चुका है और जनता क्या चाहती है इसका पता अब लगना है. सिर्फ कुछ दिन के कमलनाथ शासन को छोड़ दें तो लगातार बीजेपी 18 साल से सत्ता में है. सवाल उनके काम को लेकर है,सवाल जनता की उम्मीदें कितनी पूरी हुईं इसे लेकर है. सवाल उन वादों पर भी है जो हर पांच बरस पर किये जाते हैं. इन्हीं सवालों के जवाब हमारी टीम्स जनता के बीच जाकर खोज रही है. मध्य प्रदेश के मंदसौर में भी द लल्लनटॉप के हमारे सहयोगी विकास वर्मा पहुंचे. सुनिए ये बातचीत 'दिन भर' में. 

 

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