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किसान आंदोलन को कोरोना केंद्र ना बताएं, ऑक्सीजन दिलवाने के लिए हमने लाठियां खाईं: राकेश टिकैत

राकेश टिकैत की तरफ से दो टूक कह दिया गया है कि किसान आंदोलन को कोरोना का केंद्र ना बताया जाए. उनकी नजरों में किसान आंदोलन की वजह से कोरोना नहीं फैला है.

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राकेश टिकैत ( फोटो पीटीआई)
राकेश टिकैत ( फोटो पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राकेश टिकैत बोले- आंदोलन से नहीं फैला कोरोना
  • केंद्र की विफल रणनीतियों को बताया जिम्मेदार

किसान आंदोलन के 6 महीने पूरे हो गए हैं. 6 महीने में ये आंदोलन कभी मजबूत होता दिखा है, तो कभी ये बिखराव का भी शिकार हुआ है. अब कई तरह की परिस्थितियां देखी गईं, लेकिन ये आंदोलन जारी रहा और अभी भी केंद्र के खिलाफ बिगुल फूंका जा रहा है. ऐसे में अब भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत से आजतक ने खास बातचीत की. समझने का प्रयास रहा कि कब तक इस आंदोलन को जारी रखा जाएगा और क्या सरकार की तरफ से उन्हें कोई आश्वासन मिल रहा है या नहीं.

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कोरोना काल में आंदोलन, राकेश टिकैत ने दिया जवाब

राकेश टिकैत की तरफ से दो टूक कह दिया गया है कि किसान आंदोलन को कोरोना का केंद्र ना बताया जाए. उनकी नजरों में किसान आंदोलन की वजह से कोरोना नहीं फैला है, बल्कि केंद्र की मोदी सरकार की विफल रणनीतियों की वजह से ऐसा हुआ है. टिकैत की तरफ से जोर दिया गया है कि कोरोना काल में बंगाल में चुनाव हुए हैं, यूपी में चुनाव हुए हैं, सारे सरकारी कार्यक्रम हो रहे हैं, लेकिन उससे क्या कोरोना नहीं फैलता, सिर्फ किसान आंदोलन पर उंगली उठाना ठीक नहीं है. वहीं टिकैत ने यहां तक कह दिया है कि केंद्र की तरफ से उनके आंदोलन को कुचलने का प्रयास हो रहा है.

विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि आंदालन लंबा चलेगा. कोरोना काल में कानून बन सकते हैं तो रद्द क्यों नहीं हो सकते. सरकार आंदोलन को कुचलने का प्रयास करती रही है और आगे भी करेगी. लेकिन किसान दिल्ली की सीमाओं को छोड़ने वाला नहीं है. किसान एक ही शर्त पर लौट सकता है, तीनों नए कानून रद्द कर दो और एमएसपी के लिए कानून बना दो. 

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किसानों की वैक्सीन कैसे लगेगी?

किसान नेता ने जानकारी दी है कि अब किसान आंदोलन के दौरान कोई पब्लिक मीटिंग नहीं की जाती है. सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन रहता है और कही भी भीड़ को इकट्ठा होने नहीं दिया जाता है. वहीं किसानों के टीकाकरण को लेकर कहा गया है कि केंद्र से लगातार अपील की जा रही है यहां भी एक सेंटर खुलवा दिया जाए, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है. टिकैत की माने तो उनकी तरफ से हरियाणा सरकार से भी टीकाकरण की व्यवस्था करने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन अभी तक सकारात्मक रिस्पॉन्स नहीं मिला है.

कोरोना के समय किसानों ने मदद की?

वैसे क्योंकि ये किसान आंदोलन कोरोना के दौर में किया जा रहा है, ऐसे में समाज का एक तबका खासा नाराज भी है और किसान नेताओं की नीयत पर सवाल भी उठ रहे हैं. इस पर राकेश टिकैत ने साफ कर दिया है कि वे कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए आंदोलन कर रहे हैं. वे किसी को कोई परेशानी नहीं दे रहे हैं. वहीं दावा तो यहां तक कर दिया गया है कि किसान नेताओं ने दिल्ली के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की व्यवस्था करवाई है. टिकैत ने कहा है कि समय रहते ऑक्सीजन मिल जाए, इसलिए पुलिस की लाठियां भी खाई गई हैं. सरकार पर हमला बोलते हुए टिकैत ने कहा कि कोरोना काल में सरकार ने क्या किया, समझ नहीं आया. ऑक्सीजन मांगने वाले को लाठी मिली. समझ में नहीं आया कि सरकार देना क्या चाहती थी. आखिर क्यों 400 रुपए का इंजेक्शन 40 हजार रुपए में मिला. बीमारी के नाम पर देश को लूटने का प्रयास किया गया.

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क्लिक करें- छह महीने बाद कहां खड़ा है कृषि कानून के खिलाफ किसानों का आंदोलन? 

कब तक जारी रहेगा आंदोलन?

राकेश टिकैत की तरफ से ये भी बताया गया है कि उनका आंदोलन जरूर 6 महीने से जारी है, लेकिन केंद्र की तरफ से 22 जनवरी से ही बातचीत को बंद कर दिया गया है. कई महीनों से उन्हें केंद्र की तरफ से बातचीत का कोई न्योता नहीं आया है. टिकैत ने जोर देकर कहा है कि उनकी मांगों में कोई बदलाव नहीं हुआ है और अभी भी वे संशोधन नहीं बल्कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी पर अड़े हैं. उन्होंने सरकार से फिर अपील की है कि वे इन कानूनों को वापस लें और किसानों को भी उनके घर पर सुरक्षित रहने दें.

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