राजस्थान का आदिवासी इलाका डूंगरपुर शुक्रवार को दूसरे दिन भी हिंसा में सुलग रहा है. नौकरियों के लिए आदिवासी समाज के छात्र पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे मगर गुरुवार से आंदोलन लगातार हिंसक होता जा रहा है और आज आंदोलनकारी खेरवाड़ा शहर में घुस गया और वहां पर जमकर लूटपाट की.
सामान्य वर्ग के 1,167 सीट पर आदिवासी समाज के बच्चों को नौकरी देने की मांग कर रहे आदिवासी समाज के छात्रों ने पूरे इलाके में 10 किलोमीटर के एरिया में कब्जा कर लिया है और नेशनल हाईवे 8 को बंद कर दिया है.
इस हिंसा में अब तक दर्जनों गाड़ियां जलाई जा चुकी हैं और कई सामान्य वर्ग के लोगों के शोरूम आग के हवाले कर दिए गए हैं. एक दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों को चोट आई है.
12 दिनों से धरने पर बैठे छात्र
पिछले 12 दिनों से आदिवासी छात्र धरने पर बैठे थे जहां पर गुरुवार को अचानक से आंदोलन हिंसक हो उठा. दरअसल, रीट 2018 की भर्ती हुई थी जिसमें आदिवासी समाज के छात्रों को 36 फीसदी नंबर के साथ पास होना था और सामान्य वर्ग के छात्रों को 60 फीसदी अंक के साथ पास होना था मगर 1,167 सामान्य वर्ग के पदों पर सामान्य वर्ग के छात्र 60 फीसदी नंबर नहीं ला पाए और यह पद खाली रह गया जिस पर आदिवासी समाज के छात्र आदिवासियों की भर्ती की मांग कर रहे हैं.
हालात बेकाबू होते देख आसपास के इलाकों से पुलिस बल भेजा गया है. मगर समस्या यह है कि पहाड़ी पर बैठकर आदिवासी छात्र पत्थर चला रहे हैं जिससे पुलिस वाले भागने को मजबूर हैं.
दूसरी ओर, हालात काबू में करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पिछले 2 दिनों से लगातार मीटिंग कर रहे हैं. कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा और भारतीय ट्राइबल पार्टी के दोनों विधायकों के साथ लगातार बैठकें कर मामले का हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बैठक कर रहे भारतीय ट्राइबल पार्टी के विधायक राजकुमार रौत का वीडियो भी वायरल हो रहा है. जहां पर वह धरना दे रहे आदिवासी छात्रों को संबोधित करते हुए हिंसा की धमकी दे रहे हैं.
गौरतलब है कि भारतीय ट्राइबल पार्टी के दो विधायकों ने सरकार बचाने में अशोक गहलोत सरकार का समर्थन किया था, मगर वे डूंगरपुर में आंदोलनकारियों के साथ हैं. इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आदिवासी समाज से शांति की अपील करते हुए कहा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखें और कानून को अपने हाथ में नहीं लें.