ओडिशा के रेल हादसे ने पूरे देश को चौंका दिया है. इस हादसे में 288 लोगों की जान चली गई और करीब 1100 यात्री घायल हुए. ऐसे में सभी लोग बस इस भीषण रेल एक्सीडेंट की वजह जानना चाहते हैं. हादसे को लेकर कई थ्योरी सामने आई हैं. ऐसे में एक चश्मदीद ने भी चौंकाने वाला खुलासा किया है.
दरअसल, बालासोर में जिस जगह ये हादसा हुआ है, उस दुर्घटनास्थल से 20 मीटर की दूरी पर रहने वाले एक मेडिकल के मालिक सौभाग्य रंजन सारंगी (25) ने कहा कि दुर्घटना के समय रेलवे क्रॉसिंग पर मरम्मत का काम चल रहा था. ट्रैक पर कम से कम 10-15 गेटमैन थे.
पिछले दो महीने से हो रहा था कंस्ट्रक्शन
25 वर्षीय युवक ने यह भी कहा कि पिछले दो महीने से काम चल रहा था. उसने बताया कि गेटमैन के कमरे में निर्माण चल रहा था. चश्मदीद के मुताबिक रेलवे क्रॉसिंग पर हादसे के दिन भी काम जारी था.
पटरी के चौड़ीकरण का काम
आजतक से बातचीत के दौरान चश्मदीद दुकानदार ने बताया मैं रोज दुकान बंद करके जाता हूं तो देखता हूं कि वहां कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है. वहां रेलवे का ही काम हो रहा है. चश्मदीद के मुताबिक पटरी के चौड़ीकरण का भी काम पिछले दो महीने से चल रहा है.
गौरतलब है कि ओडिशा के बालासोर जिले में 2 जून को तीन ट्रेनों की टक्कर हो गई थी. बहनागा बाजार स्टेशन के पास SMVB-हावड़ा एक्सप्रेस (12864), कोरोमंडल एक्सप्रेस और मालगाड़ी की टक्कर हुई थी. हादसे में 288 लोगों की मौत हुई थी. 1000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
कैसे हुआ इतना बड़ा रेल हादसा?
बताते चलें कि कोरोमंडल एक्सप्रेस पश्चिम बंगाल में कोलकाता के हावड़ा स्टेशन और तमिलनाडु के चेन्नई के बीच चलती है. हादसे में 15 बोगियां पटरी से उतरी थीं. 7 बोगियां पूरी तरह पलट गई थीं. तीनों गाड़ियों के आपस में टकराने को लेकर रेलवे बोर्ड ने एक और बड़ी जानकारी दी थी.
बोर्ड ने ड्राइवरों के हवाले से बताया था कि सिग्नल में गड़बड़ी के कारण यह हादसा हुआ. कोरोमंडल एक्सप्रेस के ड्राइवर ने बताया था कि उसने ग्रीन सिग्नल देखकर ही आगे का रास्ता तय किया था. वहीं, यशवंतपुर एक्सप्रेस के ड्राइवर ने हादसे से पहले अजीब-सी आवाज सुनने का दावा किया था. बता दें कि इस भयानक हादसे में कोरोमंडल ट्रेन को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था.