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लाल किला हिंसा: क्या खालिस्तानी संगठन ने हाईजैक किया किसानों का प्रदर्शन?

लाल किला हिंसा के लिए किसान संगठनों ने अब असामाजिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराते हुए दीप सिद्धू, लक्खा सिंह जैसे लोगों का नाम लिया, जिनपर किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हाईजैक करने का आरोप लगाया गया है. 

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लाल किला पर फहराया था धार्मिक झंडा (PTI फोटो)
लाल किला पर फहराया था धार्मिक झंडा (PTI फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दीप सिद्धू और लक्खा सिंह का नाम आया सामने
  • SFJ की भूमिका की जांच कर रही है NIA
  • लाल किला हिंसा के आरोप में कई लोगों पर FIR

गणतंत्र दिवस पर किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान लाल किला पर हुई हिंसा के बाद किसानों का आंदोलन सवालों के घेरे में है. हिंसा के मामले में अब तक 26 FIR दर्ज हो चुकी हैं और कई संगठनों ने अपना आंदोलन खत्म भी कर दिया है. हिंसा के लिए किसान संगठनों ने अब असामाजिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराते हुए दीप सिद्धू, लक्खा सिंह जैसे लोगों का नाम लिया, जिनपर किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हाईजैक करने का आरोप लगाया गया है.

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युवाओं को भड़काया गया: किसान नेता

भारतीय किसान यूनियन के नेता बलबीर सिंह राजेवाल का कहना है कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए हिंसा की साजिश रची गई जिसमें सरकारी एजेंसियां भी शामिल हैं. साथ ही बलबीर सिंह का कहना है कि साजिश के तहत किसानों को इस जाल में फंसाया गया. किसानों के कुछ सवाल भी हैं जैसे कि पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शनकारी लाल किला परिसर में दाखिल कैसे हो गए?

बलबीर सिंह का आरोप है कि चार घंटे तक वहां कोई पुलिसकर्मी क्यों नहीं पहुंचा और क्यों प्रदर्शनकारियों को मनमानी करने दी गई. उन्होंने वहां झंडा फहराया और यह सब आंदोलन को खालिस्तानी रंग देने के लिए किया गया. बलबीर सिंह ने कहा कि कुछ लोगों ने युवाओं को भड़काने का काम किया जैसे कि किसान दिल्ली पर हमला करने जा रहे हैं.

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दिल्ली पुलिस की FIR के बाद दीप सिद्धू और लक्खा सिंह फरार बताए जा रहे हैं. हालांकि दिल्ली पुलिस ने हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को पकड़ने का अभियान चला रखा है जिसमें करीब 400 पुलिसकर्मी घायल हुए थे.

शक के दायरे में खालिस्तानी संगठन

दिल्ली के सिंघू और टीकरी बॉर्डर पर 24-25 जनवरी के हालात का जायजा लेने से इस बात का खुलासा हुआ कि कुछ लोग पुलिस की ओर से मार्च के लिए सुझाए गए रूट से खुश नहीं थे. दीप सिद्धू, लक्खा सिंह और किसान मजदूर संघर्ष समिति के युवा किसानों को पुलिस की ओर से सुझाया गया रूट कतई मंजूर नहीं था, जिसमें उन्हें मार्च में शामिल होने के लिए रिंग रोड पर बुलाया गया था.

हिंसा के आरोपी अब लाल किला की घटना को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही दीप सिद्धू झंडा फहराने को सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बता रहा है. दीप सिद्धू ने कहा कि हम हिंसा नहीं चाहते थे और सब दायरे में रहकर करना चाहते थे. लेकिन जो भी हुआ वह सरकार के खिलाफ गुस्सा दिखाने के लिए किया गया. अब सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या ट्रैक्टर मार्च के दौरान अचानक से हिंसा भड़की या फिर पूरी योजना के साथ इसे अंजाम दिया गया. 

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हिंसा के पीछे खालिस्तान संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) की भूमिका भी संदिग्ध है. इस संगठन को 2019 में UAPA के तहत बैन कर दिया गया है. एजेंसियों को मिले इनपुट के मुताबिक पाकिस्तान की ISI भी इस प्रदर्शन का फायदा उठाने की कोशिश में थी. दिल्ली पुलिस ने बीती 8 फरवरी को SFJ के खिलाफ आंदोलन में घुसपैठ करने की कोशिश के आरोप में एक मामला भी दर्ज किया था.

सिख फॉर जस्टिस की ओर से 11 जनवरी को ऐलान किया गया था कि वह किसानों के ट्रैक्टर मार्च को मदद पहुंचाएगा. साथ ही लाल किला पर तिरंगा हटाकर केसरी झंडा फहराने वाले को इनाम भी दिया जाएगा.

दीप सिद्धू के SFJ से लिंक की जांच

पंजाबी सिंगर और एक्टर दीप सिद्धू पर खालिस्तानी एजेंडे को आगे बढ़ाने के आरोप लग रहे हैं. खालिस्तानी डिजिटल चैनल पर दीप को जगह मिलने के बाद वह जांच के दायरे में आ गया है. सोशल मीडिया पर अपने लाइव के दौरान भी वह अलग वतन की मांग का समर्थन कर चुका है. अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी दीप के खालिस्तानी लिंक को खंगाल रही है.

एनआईए ने दिसंबर में 'भारत विरोधी आंदोलन' को फंड करने के लिए SFJ के खिलाफ एक केस भी दर्ज किया था. दीप और उसके भाई मनदीप सिंह को भी NIA का नोटिस भेजा गया था, क्योंकि उनका कनेक्शन पैसे की संदिग्ध लेन-देन में सामने आया था.

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तरनतारन का रहने वाले 21 वर्षीय जुगराज पर लाल किला पर झंडा फहराने का आरोप है जिसे पोल पर चढ़कर ऐसे झंडा फहराने में महारथ हासिल है. क्या दीप सिद्धू से इसका संबंध है? क्या दीप पहले से ही जुगराज की इस काबिलियत के बारे में जानता था, ये सभी ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अब जांच एजेंसियों को खोजने होंगे.

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