राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत तीन दिन के बंगाल प्रवास पर पहुंच रहे हैं. संघ प्रमुख मोहन भागवत साल 2024 तक बंगाल के कोने-कोने तक संघ की शाखाओं का विस्तार करना चाहते हैं. संघ के साथ ही बंगाल में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिहाज से भी मोहन भागवत की इस यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की बड़ी जीत के बाद मोहन भागवत की ये पहली बंगाल यात्रा है. मोहन भागवत की इस बंगाल यात्रा का लक्ष्य 2024 है. मोहन भागवत के इस तीन दिन के बंगाल प्रवास का मकसद है साल 2024 तक पश्चिम बंगाल में हर जगह संघ की शाखा स्थापित करना. आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में इस समय करीब 2200 शाखाएं हैं. पश्चिम बंगाल के हर इलाके तक संघ की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए करीब 8000 शाखाओं की जरूरत है. संघ की यूनिट के गणित को समझें तो एक बड़े शहर को मिलाकर एक यूनिट होती है और एक छोटे गांव को मिलाकर एक यूनिट होती है.
कल से ही शुरू हो जाएगा बैठकों का दौर
संघ प्रमुख मोहन भागवत की बैठकों का सिलसिला 17 नवंबर की सुबह से ही शुरू हो जाएगा. कोलकाता में संघ के मुख्यालय केशव भवन में मोहन भागवत एक के बाद एक बैठकें करेंगे. इन बैठकों में बंगाल में संघ के सभी पदाधिकारी शामिल होंगे. इन पदाधिकारियों के साथ संघ प्रमुख की दो बैठकें होनी हैं. इन बैठकों में तीन विषयों पर चर्चा होनी है. इनमें पहली बैठक साल 2024 तक बंगाल के हर क्षेत्र में किस तरह संघ का विस्तार किया जाए, इसे लेकर चर्चा होगी.
गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की बनेगी सूची
देश की आजादी के 75 साल पूरे होने पर संघ ने गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और उनके परिवार को सामने लाने का बीड़ा उठाया है. साल 1905 से आजादी तक के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की सूची तैयार करने को लेकर संघ प्रमुख की बैठक में चर्चा होनी है. संघ प्रमुख की एक बैठक पश्चिम बंगाल के सही तरीके से आर्थिक विकास पर चर्चा को लेकर भी है.
संघ प्रमुख प्रबुद्ध नागरिकों से करेंगे संवाद
संघ प्रमुख मोहन भागवत मैराथन बैठकों के बाद शाम करीब 4 बजे बंगाल के 350 प्रबुद्ध नागरिकों के साथ संवाद करेंगे. संघ प्रमुख का प्रबुद्ध नागरिकों के साथ ये संवाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगा. इसके लिए संघ के स्वयंसेवकों ने सूची तैयार कर ली है. 18 नवंबर को मोहन भागवत संघ की अनुषांगिक शाखाओं जैसे बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे. ऐसे कुल 40 अनुषांगिक संगठनों के साथ उन्हीं विषयों पर चर्चा होगी जिन विषयों पर 17 नवंबर को संघ के पदाधिकारियों के साथ चर्चा होनी है. हालांकि, इन सभी का मुख्य मकसद 2024 तक पश्चिम बंगाल के कोने-कोने तक संघ की शाखाओं को फैला देना है. तीन दिन के प्रवास के बाद 19 नवंबर को मोहन भागवत वापस लौट जाएंगे.