रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग की वजह से भारत की चुनौती कई गुना बढ़ चुकी है. भारत इस युद्ध में वैसे तो कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहा है, क्योंकि दोनों ही देश भारत के करीबी हैं. ऐसे में किसका समर्थन किया जाए, यही सबसे बड़ा सवाल है. अब भारत ने अभी तक इस मुद्दे पर न्यूट्रल स्टैंड ले रखा है, लेकिन मोदी सरकार ने अपने स्तर पर मीटिंग शुरू कर दी हैं.
मोदी सरकार का क्या प्लान है?
बताया गया है कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर ज्यादा बयान देने से बचने वाली है. सिर्फ वहीं नेता और मंत्रालय जवाब देंगे जिनका इस मुद्दे से सीधा ताल्लुक रहने वाला है. इसके अलावा सेना को भी कहा गया है कि वे अपनी तरफ से इस मुद्दे पर कोई भी बयान देने से बचे. वहीं अभी के लिए पीएम मोदी लगातार इस समय रूस-यूक्रेन की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. उनकी आज एक हाई लेवल मीटिंग भी जारी है. NSA अजित डोभाल से भी संपर्क साधा जा रहा है. ऐसे में भारत की रणनीति स्पष्ट है, नजर पूरी स्थिति पर है लेकिन किसी एक देश का समर्थन करने से बचा जा रहा है. भारत पूरी तरह न्यूट्रल खेल रहा है.
भारत का रवैया रूस को जरूर रास आ रहा है लेकिन यूक्रेन की तरफ से भारत से मदद मांगी गई है. यूक्रेन के भारत के लिए राजदूत ने अपील की है कि इस मामले में पीएम मोदी हस्तक्षेप करें. उनकी तरफ से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की जाए. यूक्रेन की इस मांग पर भारत की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन कांग्रेस नेता शशि थरूर ने जरूर जवाब दिया है.
विपक्ष क्या कह रहा है?
उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया है कि अभी तक भारत ने इस पूरे मामले में एक चुप्पी साध रखी है. उन्होंने कहा है कि जब भारत जैसा देश UN Security Council में अपने लिए सीट चाहता है, ऐसे में इस अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर उसका यूं चुप हो जाना ठीक संदेश नहीं देता है. वहीं राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर इस मुद्दे पर अपने विचार रखे हैं. उन्होंने जोर देकर कहा है कि इस तनावपूर्ण माहौल में यूक्रेन में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है. सरकार को जल्द ही उनका रेस्क्यू करवाना चाहिए.
वैसे भारत की तरफ से रेस्क्यू शुरू भी किया गया था लेकिन क्योंकि वहां पर युद्ध के हालात बन गए, ऐसे में एयरस्पेस को ही बंद कर दिया गया और भारत का एक विमान खाली ही लौट आया. अब सरकार फिर वहां फंसे भारतीयों को वापस लाने की कवायद में लग गई है.