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'सामना' के जरिए शिवसेना का BJP पर निशाना, कहा- लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर में ही ताला लगा दिया

सामना में लिखा गया कि 'चीन के सैनिक लद्दाख में घुस आए हैं, देश की अर्थव्यवस्था गिरती जा रही है, लेकिन विपक्ष को ऐसे सवाल पूछने का मौका ही नहीं मिल रहा. यह है महासत्ता का लोकतंत्र; हमने लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर में ही ताला लगा दिया!'

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'सामना' के जरिए बीजेपी पर निशाना (फ़ाइल फ़ोटो)
'सामना' के जरिए बीजेपी पर निशाना (फ़ाइल फ़ोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिवसेना का 'सामना' के जरिए बीजेपी पर निशाना
  • संसद का शीतकालीन सत्र नहीं होने पर कसा तंज
  • विपक्ष को सवाल पूछने का मौका ही नहीं मिल रहा

महाराष्ट्र में सत्ताधारी शिवसेना और बीजेपी के बीच जुबानी जंग जारी है. अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए शिवसेना ने संसद का शीतकालीन सत्र नहीं बुलाए जाने के मसले पर बीजेपी पर निशाना साधा. 'सामना' में कहा गया कि 'संसद का अधिवेशन ना हो, इस प्रस्ताव पर कितने रबर स्टैंप मारे गए? इसका खुलासा हुआ होता तो संसदीय लोकतंत्र के हत्यारों का नाम दुनिया को पता चल गया होता.' बता दें कि इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा का सत्र जल्द समाप्त किए जाने का आरोप बीजेपी ने उद्धव ठाकरे सरकार पर लगाया था, जिसके जवाब में गुरुवार को 'सामना' में एक लेख प्रकाशित किया गया. 

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क्या है मामला? 

दरअसल, इस मसले की शुरुआत हुई महाराष्ट्र विधानसभा के दो दिवसीय सत्र से. 'सामना' के मुताबिक, बीजेपी ने आरोप लगाया कि यह सत्र छोटा है. सिर्फ दो दिनों में क्या होगा? आखिर कौन से मुद्दे हल होंगे? सरकार को अधिवेशन की समयसीमा बढ़ानी चाहिए थी, लेकिन विपक्ष (बीजेपी) के डर से महाराष्ट्र सरकार ने अधिवेशन को जल्दी खत्म कर दिया. ऐसे में आज 'सामना' ने बीजेपी को जवाब देते हुए लिखा कि लोकतंत्र के संदर्भ में उनकी भूमिका, सुविधा व राज्य के अनुसार बदलती रहती है.

'सामना' के जरिए बीजेपी पर निशाना

'सामना' में लिखा गया कि केंद्र सरकार ने ऐलान किया है कि 'कोविड-19' के कारण दिल्ली में संसद का शीतकालीन सत्र नहीं होगा. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी का कहना है कि शीतकालीन सत्र को नहीं करने को लेकर सारे दलों से चर्चा हुई है. आखिर, यह चर्चा कब, कहां और किस जगह पर हुई? उस चर्चा में कौन-कौन शामिल हुआ? संसद का अधिवेशन ना हो, इस प्रस्ताव पर कितने रबर स्टैंप मारे गए? इसका खुलासा हुआ होता तो संसदीय लोकतंत्र के हत्यारों का नाम दुनिया को पता चल गया होता. 

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इसके अलावा सामना में लिखा गया कि 'चीन के सैनिक लद्दाख में घुस आए हैं, देश की अर्थव्यवस्था गिरती जा रही है, लेकिन विपक्ष को ऐसे सवाल पूछने का मौका ही नहीं मिल रहा. इसके लिए संसद के अधिवेशन पर रोक लगाई गई है. यह है महासत्ता का लोकतंत्र; हमने लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर में ही ताला लगा दिया!'

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पीएम मोदी पर भी कसा तंज 

'सामना' के जरिए पीएम मोदी पर भी तंज कसा गया. संपादकीय में लिखा गया कि 'प्रधानमंत्री मोदी और उनके साथी, लोगों को 'कोरोना' से लड़ने की प्रेरणा दे रहे हैं. लेकिन जब बात खुद पर आती है तो मैदान छोड़कर भाग जाते हैं. कोरोना के चलते संसद का शीतकालीन सत्र रद्द किया गया, यह झूठ है. बिहार का चुनाव हो सकता है, पीएम मोदी की रैली हो सकती है, बंगाल चुनाव से पहले बड़ी-बड़ी रैलियाँ हो रही हैं, यहां तक कि मंदिर खोलने के लिए बीजेपी वाले कई बार सड़कों पर उतरे. ऐसे में लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर क्यों ना खुले? 

नए संसद भवन के निर्माण पर कही ये बात  

'सामना' में लिखा गया कि कोविड के चलते अगर लोकसभा में ताला ही लगाना था तो नए संसद भवन का निर्माण क्यों कर रहे हो? नए संसद भवन के निर्माण में सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च होने वाले हैं, वह क्या बाहर से ताला लगाने के लिए? असल में सरकार को कई मुद्दों से पीछा छुड़ाना है. संसद में खुद की घेराबंदी से बचना है. किसान आंदोलन और तीन कृषि कानून के विरोध के कारण सरकार फंस गई है.

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