राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सचिन पायलट 11 अप्रैल को जयपुर में एक दिन के धरने पर बैठे थे. धरना खत्म होने के बाद पहली बार पायलट ने कहा कि उनका यह अनशन पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं थी.
सचिन पायलट ने इंडिया टुडे/आज तक के साथ बातचीत में कहा कि उनका यह अनशन किसी तरह की पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं थी. मैंने वसुंधरा राजे सरकार के दौरान भी भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर अनशन रखा था.
उन्होंने कहा कि हालांकि, मैं एकमात्र ऐसा शख्स नहीं था, जिसने वसुंधरा राजे के कार्यकाल के दौरान इन मुद्दों को उठाया था. मैंने मांग की थी कि इन मामलों की जांच की जानी चाहिए. अगर बीजेपी सोचती है कि वे झूठे आरोप लगाकर मुझे डरा सकती हैं तो मैं डरने वाला नहीं हूं और ना ही पीछे हटूंगा.
पायलट ने कहा कि मैंने केसी वेणुगोपाल और कमलनाथ के सामने अपना पक्ष रखा है. अगर पूर्व में या अभी कोई बीजेपी का डटकर सामना कर रहा है तो वह मैं हूं.
सचिन पायलट ने अशोक गहलोत पर साधा निशाना
पायलट ने कहा कि जब लोग सरकारें बनाते हैं तो उन्हें उन वादों को पूरा करना चाहिए, जो उन्होंने किए थे. सत्ता में आने से पहले किए गए वादों को सत्ता में आने के बाद पूरे करने चाहिए.
उन्होंने अशोक गहलोत का सीधे तौर पर नाम लिए बगैर कहा कि मैंने अनशन के जरिए भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए हैं क्योंकि हम भ्रष्टाचार के मामले पर किसी तरह का समझौता नहीं कर सकते. मैंने किसी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी नहीं की. मैंने शालीनता से अनशन के जरिए अपनी बात रखी है.
पायलट ने कहा कि मेरा अनशन खत्म हुए सात दिन हो गए हैं. लेकिन अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया. यह लोकतंत्र है, यहां जनता ही जनार्दन है. जो जनता फैसला लेती है, वही होता है. हम डरने वाले नहीं है. हम सिद्धातों की राजनीति करते रहेंगे.
पायलट ने किया था अनशन
पायलट ने 11 अप्रैल को जयपुर के शहीद स्मारक में एक दिन का अनशन किया था. सचिन पायलट तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे के शासन में हुए घोटालों की जांच की मांग को लेकर वर्तमान सीएम गहलोत सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठे थे. पायलट वसुंधरा राजे के कार्यकाल में हुए घोटालों की जांच का मुद्दा उठा रहे हैं.
नेहरू-गांधी परिवार नदारद
अनशन के मंच पर लगे पोस्टर में न तो गांधी परिवार के किसी नेता की तस्वीर लगी दिखी और न ही पंडित जवाहर लाल नेहरू की दिखाई दी थी. सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तक को पोस्टर में जगह नहीं दी गई थी.
गहलोत और पायलट में पुरानी है तकरार
राज्य के सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच विवाद की खबरें लगातार आती रहती हैं.. कहा जाता है कि पायलट मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं और गहलोत उन्हें मौका नहीं दे रहे. राज्य में एक ही पार्टी में दो नेताओं के गुट चलते हैं. एक गहलोत खेमा है तो दूसरा पायलट खेमा है. बीते साल जब कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए थे तो इस पद के लिए अशोक गहलोत का नाम सबसे आगे था. ऐसे में कहा जाने लगा था कि अगर गहलोत पार्टी अध्यक्ष बनते हैं तो राजस्थान की कमान सचिन पायलट को दी जा सकती है, लेकिन इस दौरान गहलोत ने अध्यक्ष का चुनाव लड़ने से मना कर दिया था और राज्य के सीएम बने रहे.