दौसा उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अपने गढ़ में ताकत दिखाने के बाद अब टोंक में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. यहां आयोजित एक जनसभा में उन्होंने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर जमकर निशाना साधा. पायलट ने भजनलाल सरकार के एक साल के कार्यकाल को हर मोर्चे पर विफल करार देते हुए कहा कि युवाओं और किसानों की जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है, और जनता का ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिक मुद्दों को तूल दिया जा रहा है.
युवा और किसान बने पायलट की प्राथमिकता
पायलट ने कहा, "देश के युवा रोजगार मांग रहे हैं, किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी की मांग कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार इन मुद्दों को हल करने की बजाय मंदिर-मस्जिद के विवादों में उलझाकर जनता का ध्यान भटका रही है." उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "आखिर ये ताकतें कौन सी हैं जो देश में नफरत की राजनीति कर धीमी आंच पर अपनी रोटियां सेंकने में लगी हुई हैं?"
पायलट ने यह भी कहा कि किसानों को एमएसपी पर कानून चाहिए और इसके लिए आंदोलन फिर से तेज हो रहा है, लेकिन सरकार इस पर कोई कदम नहीं उठा रही.
किरोड़ी लाल मीणा के आंदोलन का समर्थन
पायलट ने पेपर लीक मामले पर भाजपा नेता किरोड़ी लाल मीणा के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को अपने मंत्रियों और नेताओं की आवाज सुननी चाहिए. उन्होंने कहा कि भाजपा के मंत्री भी अब खुलकर सरकार की विफलताओं पर सवाल उठा रहे हैं.
राधामोहन अग्रवाल पर कटाक्ष
भाजपा प्रदेश प्रभारी राधामोहन अग्रवाल के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सचिन पायलट ने कहा, "मैंने अभी तक अग्रवालजी से मुलाकात भी नहीं की है. लेकिन जब मिलूंगा, तो जरूर पूछूंगा कि वह मुझसे इतना विशेष प्रेम क्यों रखते हैं. राजनीति में व्यक्तिगत कटाक्ष से बचना चाहिए और विरोधियों को कम आंकने की गलती नहीं करनी चाहिए."
ईआरसीपी पर साधा निशाना
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने राजस्थान में चल रही ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजस्थान दौरे की चर्चा है, जहां वह ईआरसीपी का उद्घाटन करेंगे. लेकिन आज तक जनता को यह नहीं पता चला कि इस परियोजना के तहत राजस्थान को कितना पानी मिलेगा. पायलट ने कहा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद इस परियोजना में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है.
मंदिर-मस्जिद विवाद पर बयान
सचिन पायलट ने भाजपा पर सांप्रदायिक राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि 1991 में संसद में एक कानून पारित हुआ था, जिसमें 15 अगस्त 1947 की धार्मिक स्थलों की यथास्थिति बनाए रखने का प्रावधान है. फिर भी मंदिर-मस्जिद के विवाद को हवा देकर समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि यह सब सुर्खियां बटोरने और मूलभूत समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है.
संभल हिंसा का जिक्र
पायलट ने उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों की जान चली गई, लेकिन सरकार गंभीर नहीं है. उन्होंने कहा, "हम सरकार को आइना दिखाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे."
चुनाव और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
सचिन पायलट ने निकाय और पंचायत चुनावों में देरी पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि चुनाव होने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आती है, लेकिन सरकार इन्हें टालने में लगी हुई है.
बिजली कटौती पर चुटकी
जनसभा के दौरान बिजली कटने की घटना का जिक्र करते हुए पायलट ने कहा कि भले ही उनके संबोधन के दौरान बिजली काट दी गई हो, लेकिन उन्होंने अपनी बात पूरी ताकत से रख दी. सभा के दौरान लगभग चार मिनट तक पायलट ने बिना माइक के ही संबोधन किया.