प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) ने रविवार को सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे का कार्यकाल एक महीने के लिए बढ़ा दिया, जो 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले थे. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के इस कदम से अगले सेना प्रमुख की नियुक्ति पर भी प्रभाव पड़ेगा. नियम के मुताबिक, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) के रिटायर होने पर सबसे वरिष्ठ सेना कमांडर या उप सेना प्रमुख को नया आर्मी चीफ बनाया जाता है. लेकिन आर्मी चीफ की नियुक्ति करना सरकार का विवेकाधिकार है.
वर्तमान में, उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल उपेन्द्र द्विवेदी और दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह इंडियन आर्मी में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं. दोनों कोर्स मेट (1984 बैच) हैं, लेकिन उत्तरी सेना के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी दोनों में वरिष्ठ हैं. सेना प्रमुख नियुक्ति के 3 वर्ष पूरे होने पर या 62 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर, जो भी पहले हो, सेवानिवृत्त हो जाते हैं. एक लेफ्टिनेंट-जनरल रैंक का सैन्य अधिकारी 60 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो जाता है, जब तक कि उसे फोर-स्टार रैंक के लिए अप्रूव नहीं किया जाता.
जनरल पांडे को रिटायरमेंट के 6 दिन पहले मिला सेवा विस्तार
वर्तमान सेना प्रमुख, जनरल पांडे, 6 मई को 62 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके थे और 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले थे. वह दो साल से अधिक समय तक सेना प्रमुख रहे हैं. अब उनका कार्यकाल एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया है, जिसके बाद वह 30 जून को सेवानिवत्त होंगे. उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट-जनरल उपेन्द्र द्विवेदी (जम्मू और कश्मीर राइफल्स) और सेना के दक्षिणी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह (गोरखा राइफल्स) भी 30 जून को ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं. इस तरह जनरल मनोज पांडे को मिला सेवा विस्तार इन दोनों अधिकारियों के अगला आर्मी चीफ बनने की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है.
आखिरी बार 1974 में जनरल जीजी बेवूर को मिला था एक्सटेंशन
जनरल मनोज पांडे को मिले एक महीने के सेवा विस्तार से संकेत मिलता है कि अगले सेना प्रमुख के चयन का निर्णय आने वाली सरकार करेगी. भारत में यह करीब पांच दशक बाद हुआ है, जब किसी आर्मी चीफ को सवा विस्तार मिला हो. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने अप्रैल 1974 में तबके सेना प्रमुख जनरल जीजी बेवूर का कार्यकाल एक साल बढ़ाया था. जनरल बेवूर 31 मई, 1975 को सेवानिवृत्त हुए थे. इस निर्णय से लेफ्टिनेंट जनरल पीएस भगत नए सेना प्रमुख बनने से वंचित रह गए थे और जनरल टीएन रैना ने जनरल बेवूर का स्थान लिया था.
सैम मानेकशॉ को 1971 के युद्ध में जीत पर मिला था एक्सटेंशन
जनरल बेवूर से पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ को 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत को देखते हुए सेवा विस्तार दिया गया था. हालांकि, सरकार के पास अब भी लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी या लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह को इंडियन आर्मी के शीर्ष पद पर नियुक्त करने का विकल्प होगा. एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया (रिटायर्ड) को भी सितंबर 2019 में उसी दिन वायुसेना प्रमुख के रूप में नियुक्ति किया गया था, जिस दिन वह सेवानिवृत्त होने वाले थे. ऐसा माना जा रहा है कि लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह सेना प्रमुख पद के प्रबल दावेदार हैं.
एक सूत्र ने कहा, 'अगर नई सरकार लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी और लेफ्टिनेंट जनरल सिंह से आगे सोचती है तो सेंट्रल आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि अगले आर्मी चीफ बनने के मुख्य दावेदार हो सकते हैं.' लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी के पास चीन और पाकिस्तान के साथ लगी भारत की सीमाओं पर काम करने का व्यापक अनुभव है. उन्होंने इस साल फरवरी में लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचिंद्र कुमार के बाद उप सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला था. जनरल एमएम नरवणे के सेवानिवृत्त होने के बाद जनरल मनोज पांडे ने 30 अप्रैल, 2022 को 29वें थल सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला था.
थल सेना में शीर्ष पद का कार्यभार संभालने से पहले, जनरल पांडे उप सेना प्रमुख के रूप में कार्यरत थे. वह थल सेना का नेतृत्व करने वाले आर्मी इंजीनियरिंग कोर के पहले अधिकारी हैं. अपने विशिष्ट करियर में, जनरल मनोज पांडे ने अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ के रूप में भी कार्य किया, जो भारत की एकमात्र ट्राई-सर्विसेज कमांड (जल, थल, वायु) है. नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के पूर्व कैडेट रहे जनरल मनोज पांडे दिसंबर 1982 में कोर ऑफ इंजीनियर्स (द बॉम्बे सैपर्स) में कमीशंड हुए थे.