सेम सेक्स मैरेज यानी समलैंगिक विवाह को मान्यता दिया जाना चाहिए या नहीं? इस पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ की सुनवाई का कल पांचवा दिन था. चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, एस रवींद्र भट, पीएस नरसिम्हा और हिमा कोहली की कन्स्टीच्यूशनल बेंच के सामने कल लगभग साढ़े चार दिन की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ताओं की दलीलें पूरी हो गईं. कल ही केंद्र सरकार ने भी अपना पक्ष इस मसले पर रखना शुरू कर दिया. सरकार शुरुआत ही से कॉन्सेप्ट को खारिज़ करती आई है. साथ ही, उन्होंने इस मसले को संसद के हवाले छोड़ने की बारम्बार अपील की है.
उधर एक याचिककर्ता की वकील का कहना था कि समलैंगिक शादियों की पैरोकारी करने वाले भी इसी समुदाय और समाज का हिस्सा हैं. उन्हें भी दूसरे जोड़े की तरह ट्रीट किया जाना चाहिए. वहीं, एक याचिकाकर्ता ने कहा कि सेम सेक्स मैरिज को मान्यता न देकर LGBTQ कपल को पैरेंटहुड से वंचित किया जा रहा है. तकरीबन साढ़े चार दिन की सुनवाई में पीटीशनर्स की तरफ़ से जो दलीलें रखीं गयीं, वे कौन से बड़े सवाल की ओर इशारा करती हैं, निचोड़ क्या याचिकाकर्ताओं के आर्ग्युमेंट्स का? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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कर्नाटक में चुनाव है. मैदान में सिर्फ़ भाजपा और कांग्रेस नहीं. एक और दावेदार भी है, जिसके बारे में थोड़ी कम बात हो रही. कुछ कह रहे हैं कि वो अस्तित्व की, अपनी ज़मीन बचाने की लड़ाई लड़ रही है तो दूसरे जानकार इस क्षेत्रीय पार्टी को चुनाव परिणाम के बाद किंगमेकर की भूमिका में देख रहे हैं. हम बात कर रहे हैं जनता दल (सेक्युलर) की. पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा की पार्टी जिसके फ़िलहाल मुखिया उनके बेटे कुमारस्वामी हैं. कांग्रेस और बीजेपी दोनों जेडीएस को वोट देने का मतलब एक तरह से वोट की बर्बादी बता रहे हैं. लेकिन 2018 में हुए चुनाव में जिस तरह इस पार्टी को 18 प्रतिशत वोट मिला. ये एक तथ्य है कि जेडीएस, कर्नाटक की राजनीति में अब भी एक प्रमुख धुरी है.
जेडीएस की पकड़ वोक्कालिगा समुदाय में मजबूत मानी जाती है. क्योंकि इसकी टॉप लीडरशिप का ताल्लुक इसी जाति से है. हालांकि, यही इस पार्टी के आलोचना की वजह भी बताई जाती है कि ये एक जाति विशेष और परिवार विशेष की पार्टी बन कर रह गई है. और उधर जिस तरह से वोक्कालिगा समुदाय को बीजेपी और कांग्रेस ने प्रतिनिधित्व दिया है, हाल के वक़्त में. चाहें वोक्कालिगा नेता डी के शिवकुमार का कांग्रेस की ओर से प्रोजेक्शन. वहीं, दूसरी ओर बीजेपी का इस समुदाय को 2 प्रतिशत आरक्षण देने का दांव. सवाल है कि जेडीएस के पक्ष में वोटिंग क्या वोट की बर्बादी है, पुराने चुनावों की रौशनी में अगर देखें तो इस पार्टी की राजनीतिक पूंजी क्या है और जनता दल सेक्यूलर के वोटों में कितने प्रतिशत का शिफ्ट बीजेपी या कांग्रेस का काम बना भी सकता है और बिगाड़ भी? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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तीन ओर से तीन कूड़े के पहाड़ों से घिरी देश की राजधानी दिल्ली में मुद्दे शिक्षा से लेकर, स्वास्थ्य और गंदे पानी के भी होंगे लेकिन राजनीतिक हलकों में डिग्री विवाद के बाद अब बातचीत हो रही है इस विषय पर फिलहाल की किसने अपने बंगले पर कितना खर्च किया है. सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री केजरीवाल के सरकारी बंगले के रेनोवेशन पर 45 करोड़ रुपये, जी, 45 करोड़ रुपये खर्च होने के आरोप लगे हैं. इस पर राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पलटवार किया, कहा - प्रधानमंत्री का घर ठीक करने में 500 करोड़ रुपए लगे. उनके लिए 8400 करोड़ का जहाज खरीदा गया. इस पर तो भाजपा ने सवाल नहीं उठाया. किस तरह इस पूरी राजनीतिक रस्साकस्सी की शुरुआत हुई, किसका इस विवाद में क्या पक्ष है साथ ही इस पूरे घटनाक्रम ने उनको राजनीतिक तौर पर कितना नुकसान पहुंचाया है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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