कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने की कोशिश में प्रशासन जुटा हुआ है तो उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों को दी जा रही बुनियादी सुविधाओं में कटौती करने के फैसले और उन्हें हटाने की कोशिशों की संयुक्त किसान मोर्चा ने आलोचना की है. साथ ही गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को तुरंत और बिना शर्त रिहा किए जाने की मांग की है.
संयुक्त किसान मोर्चा के डॉक्टर दर्शन पाल ने आज गुरुवार शाम उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गाजीपुर में प्रदर्शनकारी किसानों के लिए बुनियादी सुविधाओं में कटौती करने और किसानों को जबरन हटाने के प्रयासों की निंदा की. राकेश टिकैत, तजिंदर विर्क और केके रागेश जैसे नेताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से पुलिस व्यवहार का विरोध किया है.
आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगाः मोर्चा
मोर्चा ने कहा कि आरएसएस-बीजेपी प्रायोजित लोग गाजीपुर बॉर्डर पर आए. नेताओं ने किसानों के आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकार के प्रयासों के बारे में जनता को समझाया. संयुक्त किसान मोर्चा ने पलवल में प्रदर्शनकारियों को हटाए जाने की भी निंदा की, जहां पुलिस ने स्थानीय लोगों को उकसाया और लोगों की भावनाओं को भड़काया.
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मोर्चा ने कहा कि किसान आंदोलन को बदनाम करने की सरकार की कोशिशें जारी हैं. सरकार की घबराहट इस बात से स्पष्ट है कि वह सभी बॉर्डर्स पर भारी संख्या में सुरक्षा बलों को स्थापित कर रही है. सरकार इस आंदोलन को बार-बार 'हिंसक' के रूप में दिखाना चाहती है, लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा का एक सर्वसम्मत दृष्टिकोण है कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा.
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किसान मोर्चा ने कहा कि हम दिल्ली पुलिस द्वारा भेजे गए नोटिसों से भयभीत नहीं होंगे और उसका जवाब देंगे. बीजेपी सरकार अपनी राज्य सरकारों के साथ मिलकर 26 जनवरी की घटनाओं के लिए संयुक्त किसान मोर्चा को दोषी ठहराते हुए इस आंदोलन को खत्म कराने की पूरी कोशिश कर रही है जो किसी तरह से स्वीकार्य नहीं है. पुलिस कई जगहों के धरना को खाली कराने की कोशिशों में जुटी है.
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मोर्चा की ओर से कहा गया कि असली अपराधियों पर एक्शन लेने के बजाय, पुलिस शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे किसानों को गिरफ्तार कर रही है. पुलिस ने उनकी गाड़ियों को भी जब्त कर लिया है. संयुक्त किसान मोर्चा की मांग है कि सभी शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों को तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए. मोर्चा की मांग है कि दीप सिद्धू जैसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.