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55 दिन की फरारी, 43 केस और केंद्र-बंगाल टकराव के बाद कोर्ट का दखल... ऐसे CBI के शिकंजे में आया शाहजहां शेख

बंगाल की राजधानी कोलकाता से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित संदेशखाली उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट उपखंड में आता है. यह बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ इलाका है. यहां अल्पसंख्यक और आदिवासी समाज के लोग सबसे अधिक रहते हैं. जनवरी में जब तृणमूल कांग्रेस के नेता शाहजहां शेख के घर पर ईडी की टीम ने रेड की थी तो उन्होंने ईडी की टीम पर ही हमला कर दिया जिसके बाद यह इलाका खूब सुर्खियों में रहा था.

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 CBI को मिली शेख शाहजहां की कस्टडी
CBI को मिली शेख शाहजहां की कस्टडी

पश्चिम बंगाल में बीते 2 महीने से संदेशखाली को लेकर जारी सियासी उठापटक बुधवार 6 मार्च को किसी नतीजे पर पहुंची. संदेशखाली के मु्ख्य आरोपी टीएमसी नेता शाहजहां शेख को बचाने के आरोपों से घिरी राज्य सरकार की एक भी दलील न हाईकोर्ट में सुनी गई और न सुप्रीम कोर्ट में ही काम आई. हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि शाहजहां को CBI को हैंडओवर कर दिया जाए, जबकि राज्य सरकार इस बात पर अड़ी थी कि इस पूरे मामले को CID ठीक तरीके से देख रही है और हैंडल करने में सक्षम है. बुधवार को हाईकोर्ट में चले ट्रायल के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि,  ईडी अधिकारियों पर हमले की जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए और आरोपी शेख शाहजहां की हिरासत आज ही पूरी की जानी चाहिए.

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CBI ऑफिस लाया गया शाहजहां शेख
इसके बाद शेख शाहजहां को CBI को सौंपा गया. CBI को कस्टडी मिलने के बाद, संदेशखाली के आरोपी को दक्षिण 24 परगना स्थित सीबीआई कार्यालय लाया गया है. अब मामले में CBI पूछताछ करेगी. CBI को ये कस्टडी ईडी अधिकारियों पर हमले की जांच के लिए मिली है. ऐसे में एक बार फिर इस पूरे प्रकरण को देख लेने की जरूरत है, क्योंकि ईडी अफसरों पर हमला, फिर संदेशखाली की महिलाओं का यौन शोषण का आरोप,  TMC, बीजेपी-कांग्रेस के आरोप-प्रत्यारोप, फिर 55 दिन बाद गिरफ्तारी और कोर्ट-कचहरी का चक्कर... इन दो महीने और सात दिन में घटनाओं की एक पूरी कड़ी बन गई है, जानिए कब क्या हुआ?

कहां है संदेशखाली
बंगाल की राजधानी कोलकाता से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित संदेशखाली उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट उपखंड में आता है. यह बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ इलाका है. यहां अल्पसंख्यक और आदिवासी समाज के लोग सबसे अधिक रहते हैं. जनवरी में जब तृणमूल कांग्रेस के नेता शाहजहां शेखे के घर पर ईडी की टीम ने रेड की थी तो उन्होंने ईडी की टीम पर ही हमला कर दिया जिसके बाद यह इलाका खूब सुर्खियों में रहा था. 

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Shahjahan Sheikh

क्या हुआ था 5 जनवरी को
पश्चिम बंगाल के राशन वितरण घोटाले में करीब 10 हजार करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में जब 5 जनवरी को ईडी की टीम शाहजहां शेख के आवास पर छापा मारने पहुंची तो वहां उसके गुर्गों ने ईडी के अधिकारियों पर हमला कर दिया था. 200 से अधिक स्थानीय लोगों ने अधिकारियों और उनके साथ चल रहे अर्धसैनिक बलों के वाहनों को घेर लिया था. भीड़ ने अधिकारियों की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की थी. इस हमले में ईडी के तीन अधिकारी राजकुमार राम, सोमनाथ दत्त और अंकुर गुप्ता घायल हो गए थे. इस मामले में एक-एक करके चार गिरफ्तारियां हुई थीं, शाहजहां शेख कई दिनों तक फरार रहा. शाहजहां को पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक का करीबी माना जाता है.

लुकआउट नोटिस हुआ था जारी 
इससे पहले ईडी ने शाहजहां के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था. उसके बाद शाहजहां की एक ऑडियो क्लिप सामने आई थी. इसमें शाहजहां कहता है कि मृत्यु अपरिहार्य है, लेकिन हमें अपराध और गलत काम के खिलाफ लड़ना होगा. मैं कभी किसी अपराध में शामिल नहीं रहा हूं. अगर कोई यह साबित कर दे कि मैंने कुछ भी गलत किया है तो जान देने के लिए तैयार हूं. अपना चेहरा भी नहीं दिखाऊंगा. '

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24 जनवरी को ईडी और आयकर विभाग ने फिर मारा था छापा
ED पर हमले का आरोपी शाहजहां शेख फरार था, इसी दौरान एक बार फिर ED और IT ने उसके खिलाफ एक्शन लिया था. 24 जनवरी को ईडी ने एक बार फिर लाव-लश्कर के साथ राशन घोटाले के आरोपी शाहजहां शेख के आवास पर दस्तक दी. मौके पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के 120 से ज्यादा जवान और स्थानीय पुलिस की टीमें पहुंचीं थीं. बाद में आयकर विभाग की एक टीम भी तलाशी अभियान में शामिल हुई. दोनों टीमों ने संयुक्त कार्रवाई की थी. ईडी की टीम ने शाहजहां शेख के घरों में लगे ताले तोड़ दिए थे और कई दस्तावेज हाथ लगे थे. 

महिलाओं ने लगाए गंभीर आरोप, संदेशखाली हिंसा ने पकड़ा जोर
राशन घोटाला, ईडी अटैक और जमीन कब्जे जैसै मामलों पर जांच चल ही रही थी कि एक और संगीन मामले में शाहजहां शेख के खिलाफ केस को और भयावह मोड़ दे दिया और यहीं से संदेशखाली की एंट्री हुई. दरअसल, संदेशखाली की कुछ महिलाओं ने ईडी प्रकरण के बाद मुखर रूप से शाहजहां शेख के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. सामने आया कि महिलाएं पहले से यौन शोषण के आरोप लगाते हुए शिकायत करती रही थीं, लेकिन सालों से उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी. ईडी प्रकरण के सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता शाहजहां शेख और उसके सहयोगियों के अत्याचार के खिलाफ महिलाएं खुलकर सामने आ गईं. संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं ने खुद अपनी आपबीती सुनाई . महिलाओं ने शाहजहां शेख और उनके समर्थकों पर अत्याचार करने, यौन उत्पीड़न करने और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे.

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'सुंदर लड़की खोजते हैं शेख के आदमी'
आरोप लगाने वाली एक महिला ने बताया था कि टीएमसी के लोग गांव में घर-घर जाकर चेक करते हैं और इस दौरान अगर घर में कोई सुंदर महिला या लड़की दिखती है तो टीएमसी नेता शाहजहां शेख के लोग उसे अगवा कर ले जाते थे और फिर उसे पूरी रात अपने साथ पार्टी दफ्तर यहां अन्य जगह पर रखा जाता और अगले दिन यौन उत्पीड़न करने के बाद उसे उसके घर या घर के सामने छोड़ जाते थे. इसके बाद जैसे ही मामला सामने आया तो राज्यपाल ने तुरंत मामले पर संज्ञान लिया और खुद संदेशखाली पहुंच गए और बात में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संदेशखाली में जो हुआ वो होश उड़ा देने वाला था.

Shahjahan Sheikh

29 फरवरी के लिए जारी किया गया था चौथा समन
एक तरफ संदेशखाली सुलग रहा था तो दूसरी ओर ईडी भी इस मामले में कार्रवाई कर रही थी. ED ने एक बार फिर शिकंजा कसा है. ईडी ने बंगाल राशन वितरण घोटाला मामले में पूछताछ में पेश होने के लिए शाहजहां शेख को 23 फरवरी को चौथा समन जारी किया. शाहजहां शेख अभी भी फरार था. समन में कहा गया है कि शाहजहां शेख को 29 फरवरी सुबह 11.30 बजे कोलकाता के CGO कॉम्प्लेक्स में पेश होना होगा. बंगाल राशन वितरण घोटाला मामले में टीएमसी नेता के खिलाफ ईडी ने ये चौथा समन जारी किया था. ईडी ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल के राशन वितरण घोटाले में करीब 10 हजार करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है.

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आखिरकार गिरफ्तार हुआ शाहजहां शेख
आखिरकार वह दिन 29 फरवरी को आया, जब 55 दिन बाद संदेशखाली हिंसा के मुख्य आरोपी और टीएमसी नेता शाहजहां शेख को गिरफ्तार कर लिया गया. बंगाल पुलिस ने कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश उसे गिरफ्तार किया था. पुलिस ने शाहजहां को सरबेरिया इलाके से उठाया था, उसके बाद सुबह करीब पांच बजे बशीरहाट में पुलिस लॉकअप में लाया गया. शाहजहां की सुबह 11 बजे बशीरहाट कोर्ट में पेशी हुई. मिनाखन के एसडीपीओ अमीनुल इस्लाम खान ने शाहजहां की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा था कि बंगाल पुलिस ने टीएमसी नेता शेख शाहजहां को नॉर्थ 24 परगना के मिनाखन इलाके से गिरफ्तार किया है. कोर्ट में पेशी के लिए लाए गए शाहजहां शेख का पहला वीडियो सामने आया था, जहां वो पुलिस के आगे-आगे अकड़ में चल रहा था. इसके बाद शाहजहां शेख को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

हमें इससे कोई सहानुभूति नहींः कोलकाता हाईकोर्ट
अब जब एक बार शाहजहां शेख सामने आ गया तो उस पर कानूनी शिकंजा कसता गया. कोलकाता हाईकोर्ट ने शाहजहां को लेकर तल्ख और सख्त टिप्पणी करते हुए यह जाहिर कर दिया कि शाहजहां को कोई राहत नहीं मिलने वाली है. कोर्ट का कहना था कि शाहजहां पर 42 मुकदमे हैं. इसलिए सुनवाई के बाद ही जमानत पर फैसला होगा. हाईकोर्ट ने शाहजहां के वकील से कहा था कि हम आपके पेश होने का इंतजार कर रहे थे. इस पर वकील ने कहा कि शाहजहां को कल रात गिरफ्तार किया गया था. मेरी अग्रिम जमानत की याचिकाएं अभी पेंडिंग हैं. इस पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की. HC के चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम ने फटकार लगाते हुए कहा कि हमें इस व्यक्ति पर कोई सहानुभूति नहीं है. शेख शाहजहां के वकील का कहना था कि हम निचली अदालत में लंबित चार जमानत याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई चाहते हैं. यह सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने कहा, हमें इस शख्स से कोई सहानुभूति नहीं है. हम सोमवार को मामले की सुनवाई करेंगे. शाहजहां शेख मामले में अगली सुनवाई के लिए 4 मार्च की तारीख मुकर्रर की गई थी. 

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6 साल के टीएमसी से निकाला गया शाहजहां शेख
गिरफ्तारी और कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच शाहजहां शेख को एक और झटका लगा. उससे ममता बनर्जी ने 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया. टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने शाहजहां की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसे पार्टी से निलंबित करने के फैसले की घोषणा की थी. ब्रायन ने कहा था, 'हमने शेख शाहजहां को 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित करने का फैसला किया है. हमेशा की तरह, हम जो कहते हैं वह करते हैं. हमने अतीत में उदाहरण स्थापित किए हैं और हम आज भी ऐसा कर रहे हैं'. ओ'ब्रायन ने अपनी पीसी में बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, 'हम भाजपा को उन नेताओं को निलंबित करने की चुनौती देते हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार समेत कई आपराधिक मामले हैं'. बता दें कि शेख संदेशखाली विधानसभा क्षेत्र का टीएमसी संयोजक था और पार्टी के कब्जे वाले उत्तर 24 परगना जिला परिषद का सदस्य भी था.

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में गया कस्टडी का मामला
शाहजहां शेख की गिरफ्तारी के बाद असली खेल शुरू हुआ कस्टडी को लेकर. असल में शेख की गिरफ्तारी के बाद टीएमसी ने पूरा मामला CID के हाथों में सौंप दिया. ED और सीबीआई ने इसका विरोध किया. ईडी की तरफ से हाईकोर्ट में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील देते हुए राज्य पुलिस पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया था. उन्होंने कोर्ट को बताया था कि 5 जनवरी को संदेशखाली में लगभग 1,000 लोगों की भीड़ द्वारा अपने अधिकारियों पर किए गए हमले पर ईडी की एफआईआर के बाद जानबूझकर शेख को गिरफ्तार किया, जबकि उनके खिलाफ 40 से अधिक दर्ज अन्य मामले वर्षों से लंबित हैं और अभी तक इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की गई. शेख की गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच बशीरहाट पुलिस से लेकर सीआईडी को सौंप दी थी. राजू ने दावा किया था कि ऐसा शेख की सीबीआई हिरासत से इनकार करने के लिए किया गया था, भले ही जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी गई हो, क्योंकि किसी आरोपी की अधिकतम पुलिस हिरासत अवधि 14 दिन है.

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इसके बाद, आई तारीख 5 मार्च. संदेशखाली मामले पर बंगाल की ममता सरकार को हाईकोर्ट से इस दिन बड़ा झटका लगा. कलकत्ता हाईकोर्ट ने ईडी टीम पर हमले की जांच सीबीआई को सौंपने के साफ आदेश दिए साथ ही कोर्ट ने ममता सरकार को आदेश दिया कि वह मामले में आरोपी शाहजहां शेख को उसी दिन यानी मंगलवार शाम तक सीबीआई की हिरासत में सौंप दें. वहीं हाईकोर्ट के इस आदेश को ममता सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में लग गई. 

सुप्रीम कोर्ट से भी लगा झटका
CBI जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका ही मिला. ममता सरकार ने तुरंत सुनवाई के लिए अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया. राज्य सरकार ने अपनी अर्जी में सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राज्य उच्च न्यायालय के आदेश पर अंतरिम रोक चाहता है, लेकिन कोर्ट इस पर तैयार नहीं हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश के आदेश की प्रतीक्षा करें. याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार ने दलील दी थी कि, हाईकोर्ट द्वारा 4.30 बजे तक का समय दिया गया वो हमारे अधिकारो का हनन करता है. बेबुनियाद आरोप लगाकर सीबीआई को केस ट्रांसफर किया गया जबकि हमारी एसआईटी जांच कर रही थी. राज्य सराकर ने कहा कि, सीबीआई को केस ट्रांसफर करना गलत है.. ये सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशो का उल्लंघन है. राज्य की पुलिस ने इस मामले मे तेजी दिखाई है और इसकी अभी भी जांच चल रही है. ASG का HC मे कहना था कि शाहजहां शेख पर पहले से ही लगभग 40 FIR दर्ज है लेकिन उसकी गिरफ्तारी ED पर हमला मामले मे दर्ज की गई दो FIR मे किया गया है. य़ह राज्य की भावना को दर्शाता है. सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद अब फिर से कोलकाता हाईकोर्ट का सहारा रह गया था. 

आखिरकार सीबीआई को मिली कस्टडी
बुधवार को सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हम पांच मार्च को दिए गए अपने आदेश को लेकर गंभीर हैं. सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी गई है लेकिन अब तक हमारे आदेश पर कोई स्टे नहीं आया है इसलिए बुधवार शाम 4.15 बजे तक शाहजहां को सीबीआई को सौंप दिया जाए. कोर्ट ने कहा कि हमने अवमानना को लेकर नोटिस जारी किया है और दो हफ्ते में बंगाल सीआईडी विभाग को हलफनामे जवाब दाखिल करने को कहा है. कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी ने दलील दी कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के बावजूद राज्य पुलिस ने इस आदेश का पालन नहीं किया है, आरोपी को यह कहते हुए नहीं सौंपा गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर किया गया था.

इस तरह लगभग दो महीने तक चले चोर-पुलिस के खेल, कोर्ट-कचहरी के चक्कर के बाद आखिरकार शाहजहां शेख CBI की कस्टडी में है. अब सीबीआई इस मामले में गहन जांच में जुट गई है.

Shahjahan Sheikh

शाहजहां शेख पर क्या-क्या मामले दर्ज हैं?
शाहजहां शेख अब CBI की कस्टडी में आ गया. शाहजहां पर 43 केस दर्ज हैं. पुलिस ने शाहजहां पर जिन धाराओं में एफआईआर दर्ज की है, वे बेहद गंभीर हैं और उनमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है. जुर्माना से भी दंडित किया जाएगा. संदेशखाली के आरोपी शाहजहां शेख पर संदेशखाली में जमीन पर कब्जा करने और यौन उत्पीड़न के भी आरोप लगे हैं. शाहजहां शेख पर तीन बीजेपी समर्थकों की हत्या और बिजली विभाग के कर्मचारियों की मारपीट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. शाहजहां पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 341, 186, 353, 323, 427, 379, 504, 307, 333, 325, 326, 395, 397, 34 के तहत आरोप लगाए गए हैं. 

धारा 307: हत्या की कोशिश करने पर सजा का प्रावधान है. यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की हत्या करने की कोशिश करता है तो उसे 10 वर्ष तक की कारावास दी जा सकती है. साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा. यदि इस तरह के कृत्य से किसी व्यक्ति को चोट पहुंचती है तो अपराधी को आजीवन कारावास तक दी जा सकती है. अगर अपराधी जिसे इस धारा के तहत आजीवन कारावास की सजा दी गई है, वो चोट पहुंचाता है तो उसे मृत्यु दंड दिया जा सकता है. यह अपराध गैर जमानतीय है और सत्र न्यायालय में विचारणीय है.

धारा 326:  उस कृत्य को अपराध माना गया है, जिसमें खतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाई जाती है. जैसे गोली चलाने या छुरा घोंपने, काटने या ऐसा कुछ भी करने के लिए किसी उपकरण या हथियार का उपयोग करने से मौत संभावित हो. इसके अलावा आग या किसी गर्म पदार्ध, जहर या किसी विस्फोटक से गंभीर चोट आने के कारण सांस लेने में दिक्कत या फिर जानवर के जरिए क्षति पहुंचाई जाती है तो सजा से दंडित किया जाएगा. इसमें दोषी को आजीवन कारावास या इसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. साथ ही आर्थिक दंड से दंडित किया जाएगा. यह एक गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध है. प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है. मध्‍य प्रदेश में सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है.

धारा 395: जो कोई डकैती करेगा उसे आजीवन कारावास हो सकता है. ऐसा कठिन कारावास जिसकी अवधि दस साल तक होगी. साथ ही आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा. यह एक गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध है. सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है.

धारा 147: भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, में दंगा करने वालों के लिए सजा का प्रावधान किया गया है. ऐसे मामलों में दंगा-बलवा करने के दोषी को दो साल तक की जेल या आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जा सकता है. दंगा करने का अपराध तब माना जाता है, जब पांच या उससे ज्यायादा लोग किसी गैरकानूनी सभा में इकट्ठा होकर हिंसा करते हैं. यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है. 

धारा 148:  जो भी कोई घातक हथियार या किसी ऐसी चीज, जिससे हमला किए जाने पर मौत तक हो सकती है, उसे लेकर उपद्रव करेगा तो तीन वर्ष तक का कारावास बढ़ाया जा सकता है या आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जाएगा. यह एक जमानती और संज्ञेय अपराध है. प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है.
 
धारा 149:  सार्वजनिक शांति के खिलाफ सभी अपराधों के बारे में बताया गया है. इस धारा के तहत खासतौर पर विधि-विरुद्ध जमाव (गैर कानूनी सभा) करने पर एक्शन लिया जाता है. किसी भी गैनकानूनी जमावड़े में शामिल होने वाला हर शख्स अपराध की भागीदार माना जाएगा. साधारण भाषा में कहें तो अगर गैरकानूनी जमावड़े में शामिल किसी सदस्य द्वारा अपराध किया जाता है, तो ऐसे जमावड़े का हर अन्य सदस्य उस अपराध का दोषी होगा. अपराध के अनुसार सजा मिलती है. अपराध ही तय करता है कि मामला संज्ञेय है या असंज्ञेय. इसकी जमानत, संज्ञान और अदालती कार्रवाई अपराध अनुसार होगी.

धारा 333: इस धारा के तहत अपराध बहुत ही गंभीर और बड़ा माना जाता है. किसी लोक सेवक को अपने कर्तव्यों से विमुख करने के लिए या उस व्यक्ति या किसी अन्य लोक सेवक को अपने कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए, स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाता है, तो उसे दंडित किया जाएगा. दोषी को 10 वर्ष तक कारावास दिया जा सकता है.  साथ ही आर्थिक दण्ड भी लगाया जाएगा. यह एक गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध है. सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है.

धारा 325: जो कोई भी किसी दूसरे व्यक्ति को स्वेच्छापूर्वक गंभीर चोट पहुंचाता है तो उसे सात वर्ष तक का कारावास दिया जा सकता है. साथ ही वो आर्थिक दंड के लिए भी उत्तरदायी होगा. यह एक जमानती और संज्ञेय अपराध है. किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है. यह अपराध न्यायालय की अनुमति से पीड़ित व्यक्ति के द्वारा समझौता करने योग्य है.

धारा 397: अगर लूट या डकैती के दौरान अपराधी किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाता है या किसी व्यक्ति की मौत का कारण बनने की कोशिश करता है तो उसे कम से कम सात साल तक की कठोर सजा हो सकती है. साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है. यह एक गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध है. सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है.

धारा 341: किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकने पर धारा 341 लगाई जाती है. दोषी को एक महीने तक की साधारण कारावास की सजा हो सकती है या 500 रुपये का आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जाएगा. यह जमानती और संज्ञेय अपराध है. किसी भी मॅजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है.

धारा 186:  लोक सेवक (सरकारी कामकाज) के कामों में बाधा डालने के बारे में परिभाषित किया गया है. इसमें तीन महीने कारावास या 500 रुपए आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जाएगा. यह एक जमानती और गैर-संज्ञेय अपराध है. जबकि आंध्रप्रदेश में यह अपराध संज्ञेय है. किसी भी मॅजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है.

धारा 353:  किसी लोकसेवक के रूप में कर्तव्य निभाने वाले व्यक्ति के साथ मारपीट, हमला या आपराधिक बल प्रयोग करने पर सजा देने का प्रावधान किया गया है. दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है. यह गैर जमानती और संज्ञेय अपराध है. किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है.

धारा 323: जो भी व्यक्ति जानबूझकर किसी को स्वेच्छा से चोट पहुंचाता है, उसे एक वर्ष तक का कारावास दिया जा सकता है या एक हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है. यह एक जमानती और गैर-संज्ञेय अपराध है. किसी भी जज द्वारा विचारणीय है.

धारा 427: यदि कोई कार में डेंट और खरोंच लगाकर उसे नुकसान पहुंचाता है और मरम्मत की लागत पचास रुपये या उससे ज्यादा होने का अनुमान है तो दोषी को दो वर्ष तक की कारावास या आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जाएगा. यह एक जमानती और गैर-संज्ञेय अपराध है. किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है.  यह अपराध पीड़ित व्यक्ति द्वारा समझौता करने योग्य है, अगर नुकसान या क्षति किसी निजी व्यक्ति की हो.

धारा 379: चोरी के लिए दंड का प्रावधान है. जो भी व्यक्ति चोरी करने का अपराध करता है तो उसे 3 वर्ष तक कारावास दिया जा सकता है या आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जाएगा. यह एक गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध है. किसी भी जज द्वारा विचारणीय है. पीड़ित व्यक्ति / संपत्ति के मालिक द्वारा समझौता करने योग्य है.

धारा 504: किसी व्यक्ति को उकसाने के इरादे से जानबूझकर उसका अपमान करने और इरादतन या यह जानते हुए कि इस तरह की उकसाहट उस व्यक्ति को लोकशांति भंग करने या अन्य अपराध का कारण हो सकती है तो दोषी को दो वर्ष तक की कारावास दी जा सकती है या आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जाएगा. यह एक जमानती और गैर-संज्ञेय अपराध है.

धारा 34: जब कई लोगसमान इरादे से कोई आपराधिक कृत्य करते हैं तो उनमें से प्रत्येक इस कृत्य के लिए उसी तरह जवाबदेह होगा, जैसे उसने अकेले इस काम को अंजाम दिया हो. इस धारा में किसी अपराध की सजा के बारे में नहीं बताया गया है. इस धारा में एक ऐसे अपराध के बारे में बताया गया है, जो किसी अन्य अपराध के साथ किया गया हो. 

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