यूपी के लखनऊ में कुख्यात माफिया और मुख्तार अंसारी के करीबी संजीव जीवा माहेश्वरी की कोर्ट में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई है. इस घटना के बाद कोर्ट की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. आरोपी बाकायदा वकील की ड्रेस पहनकर पहुंचा था. अतीत में देखा जाए तो कोर्ट परिसर में सुरक्षा में चूक कोई नई बात नहीं है. इससे पहले भी कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने देश को हिलाकर रख दिया है.
हाल के वर्षों में अदालतों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. हर बार ऐसी घटना होने पर कड़ी प्रतिक्रिया होती है. हालांकि सुरक्षा अभी भी ढीली है. कह सकते हैं कि सुरक्षा को लेकर कोई खास इंतजाम और प्लान नहीं किया गया है. यही वजह है कि अपराधी आसानी से भेष बदलकर कोर्ट रूम तक दाखिल होकर वारदात को अंजाम देने लगे हैं. जबकि कुछ मामलों में अदालतों का हस्तक्षेप भी देखने को मिला है. इन घटनाओं से अदालतों की सुरक्षा चिंता का विषय बन गई है. इसके साथ ही न्याय के प्रशासन को खतरे में डाल सकती है और बाधित कर सकती है.
दिल्ली की सात अदालतों में 997 सुरक्षाकर्मी तैनात
पिछले साल दिल्ली पुलिस ने स्थानीय हाई कोर्ट को सूचित किया था कि राष्ट्रीय राजधानी में सभी सात जिला अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 997 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. इसके अलावा, दिल्ली पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, जिला अदालतों में 2,700 से ज्यादा सीसीटीवी, 85 बैगेज स्कैनर, 242 हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर और 146 डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं.
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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में अधिक सुरक्षा और जजों के लिए अधिक सुरक्षा की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बड़ी टिप्पणी की थी. SC ने खुद कहा था कि अदालतें सार्वजनिक स्थान हैं और लोगों को उन तक पहुंचने से नहीं रोका जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा था, एक आकार सभी फिट बैठता है दृष्टिकोण काम नहीं कर सकता है और सुरक्षा और पहुंच के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है. शीर्ष अदालत ने कहा था कि सुरक्षा और एक्सेस के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत है. एक तरह का दृष्टिकोण सभी के लिए काम नहीं कर सकता है.
अदालत परिसर में सुरक्षा चूक के कुछ मामलों पर एक नजर...
संजीव जीवा का मामला: यूपी के लखनऊ में 7 जून को कोर्ट हाउस के अंदर घटना हुई. हमलावर वकील के भेष में आया और गोली चला दी, जिससे गैंगस्टर संजीव जीवा की मौत हो गई और एक बच्ची भी घायल हो गई. एक सिपाही भी जख्मी हुआ है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शूटर प्लान बी की तैयार करके आए थे. उन्होंने पहले से ही कोर्ट परिसर के अंदर पिस्टल छिपा दी थी.
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घटना के बाद लखनऊ में धारा 144 लागू कर दी गई और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सार्वजनिक और निजी संपत्तियों की सुरक्षा और कानपुर में फर्जी खबरों के प्रसार की जांच के निर्देश जारी किए गए हैं.
बिजनौर कोर्ट शूटआउट: 2019 की इस घटना का इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था. दरअसल, बिजनौर में एक अदालत के अंदर हत्या के आरोपी की गोली मार दी गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी. कोर्ट परिसर में अपर्याप्त सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार की जमकर खिंचाई की थी.
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अदालत ने कहा था कि ऐसा लगता है कि राज्य में अदालत परिसर के अंदर कानून व्यवस्था पूरी तरह विफल है. अदालत ने पूछा था कि क्या शीर्ष अधिकारियों को इन घटनाओं के बारे में पता भी था जो उत्तर प्रदेश की विभिन्न अदालतों में हुई हैं. अदालत ने यह भी कहा कि अगर राज्य सरकार अदालत परिसर में पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकती है तो वह केंद्र सरकार से केंद्रीय बलों को तैनात करने के लिए कहेगी.
रोहिणी कोर्ट में गोगी की हत्या: सितंबर 2021 में कथित तौर पर वकीलों के भेष में आए हमलवारां ने एक कोर्ट रूम में प्रवेश किया और गैंगस्टर जितेंद्र मान उर्फ गोगी पर गोली चला दी. गोगी को 8 से ज्यादा गोलियां मारी गई थीं. घटना में उसकी मौत हो गई थी. अदालत में मौजूद पुलिस ने मोर्चा संभाला और दोनों बदमाशों को मार गिराया था.
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दिल्ली हाई कोर्ट ने अदालत की सुरक्षा पर स्वतः संज्ञान लिया और पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की प्रभावी तैनाती की आवश्यकता पर बल दिया था. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की खंडपीठ ने विभिन्न अदालतों और हाई कोर्ट के बार संघों से भी इस संबंध में सुझाव मांगे थे.
एचसी ने यह सुझाव भी दिया था कि अदालत की सुरक्षा व्यवस्था का विश्लेषण करने और अदालतों में तैनात पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण देने के लिए नियमित बैठकें आयोजित की जानी चाहिए. एचसी ने यह भी कहा था कि दिल्ली में सभी कोर्ट परिसरों में पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती की आवश्यकता है.
ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की भी आवश्यकता है, जो चौबीसों घंटे काम करते हों. इसके अलावा, हाई कोर्ट समेत दिल्ली के सभी अदालत परिसरों में भी फुल प्रूफ एंट्री सिस्टम की आवश्यकता है.
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साकेत कोर्ट फायरिंग 2023: इस साल अप्रैल में दिल्ली की साकेत कोर्ट में फायरिंग हुई थी. इसमें एक महिला घायल हो गई थी. आरोपी वकील के भेष में आया था और आपसी विवाद में महिला पर गोलियां चला दी थीं. इस घटना ने राष्ट्रीय राजधानी में जिला अदालतों में दिल्ली पुलिस द्वारा की गई सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए थे. न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कहा कि उन्होंने सुरक्षा कड़ी कर दी है. कुछ वकीलों ने अपील भी की थी. प्रवेश द्वारों पर कड़ी निगरानी रखने और अदालत परिसर में प्रवेश करने वालों की तलाशी लेने और उनके वाहनों की अच्छी तरह से जांच करने की मांग उठाई थी.
लुधियाना की घटना: जनवरी 2023 में लुधियाना के जिला अदालत परिसर में भी दो ग्रुप के बीच झड़प हो गई थी. घटना में दो लोगों को गोली मार दी गई थी.
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