हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (HCU) कैंपस के पास 400 एकड़ में फैले विशाल हरित क्षेत्र कांचा गचीबावली जंगल में पेड़ों की कटाई कर दी गई. इस इलाके को हैदराबाद के "लंग्स" यानी फेफड़े के रूप में जाना जाता है. सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि पिछले हफ्ते आईटी पार्क के निर्माण के लिए इस क्षेत्र के पेड़ों को हटाया गया है.
भौगोलिक विश्लेषण के अनुसार, 30 मार्च से 2 अप्रैल के बीच लगभग 2 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के जंगल और वनस्पतियों को नष्ट कर दिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 50 से अधिक अर्थमूविंग मशीनों को रंगारेड्डी जिले के कांचा गचीबोवली में सफाई अभियान के लिए तैनात किया गया था.
विरोध के बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
इस परियोजना के खिलाफ हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्र, संकाय सदस्य और पर्यावरणविद् लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इसके बाद तेलंगाना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने 400 एकड़ भूमि पर चल रहे कटाई अभियान पर रोक लगा दी.
इस मुद्दे पर तेलंगाना में राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है. विपक्षी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने इस भूमि को वापस लेने और इसे ईको पार्क में बदलने की घोषणा की है. वहीं तेलंगाना सरकार के अनुसार, इस परियोजना से ₹50,000 करोड़ का निवेश आने की संभावना है और इसके पूरी तरह से विकसित होने पर 5 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है.
केटी रामाराव का सरकार पर हमला
BRS नेता केटी रामाराव (KTR) ने गुरुवार को कहा कि पिछले 10 दिनों से HCU के छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो हम हैदराबाद के लोगों के साथ मिलकर HCU तक मार्च करेंगे."
KTR ने दावा किया कि जब उनकी सरकार सत्ता में थी, तो उन्होंने 270 करोड़ पौधे लगाए और हैदराबाद की हरित भूमि में 7.7% की वृद्धि की. उन्होंने कहा, "हमने हैदराबाद को एक हरा-भरा शहर बनाया, जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले. तेलंगाना भारत का सबसे अधिक हरित क्षेत्र बढ़ाने वाला राज्य बना."