कांग्रेस ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की तरफ से अपने कर्मचारियों के लिए वीआरएस लाने की तैयारी पर निशाना साधा है. कांग्रेस ने इसे जबरन रिटायरमेंट देना करार दिया है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'इसे वीआरएस क्यों कहा जा रहा है; क्या यह जबरन रिटायरमेंट स्कीम है? 55 साल से ऊपर के 33,000 एसबीआई कर्मचारी नौकरी छोड़ेंगे. इससे पहले एमटीएनएल और बीएसएनएल के 93 हजार कर्मचारियों को जबरन वीआरएस दिया गया था. यह सब ऐसे समय हो रहा है जब 2.1 करोड़ कर्मचारियों की नौकरी चली गई है.
Why call it VRS; it's Forced Retirement Scheme?
— Abhishek Singhvi (@DrAMSinghvi) September 8, 2020
33,000 SBI employees above 55yrs will have to leave.
Earlier 93k odd MTNL/ BSNL employees forced VRS and the govt defaulted.
This at a time when there are reported about 21million salaried job losses. #JumlaNomics #Modinomics
असल में, बैंक कर्मचारियों के लिए एसबीआई एक बड़ी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना यानी वीआरएस लाने की तैयारी कर रही है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस योजना से 30190 कर्मचारी बैंक से स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले सकते हैं. वीआरएस के लिए एक मसौदा तैयार हो चुका है. बोर्ड की मंजूरी का इंतजार है.
एसबीआई के कुल कर्मचारियों की संख्या 31 मार्च 2020 तक 2.49 लाख थी, जबकि मार्च 2019 तक यह संख्या 2.57 लाख थी. प्रस्तावित ड्रॉफ्ट के मुताबिक, कुल 11565 अधिकारी और 18625 कर्मचारी वीआरएस स्कीम के लिए पात्र होंगे. यदि योजना के तहत रिटायरमेंट के योग्य कर्मचारियों में से 30 फीसदी भी वीआरएस का विकल्प चुनते हैं तो जुलाई 2020 के वेतन पर आधारित अनुमान के तहत एसबीआई को करीब 1,662.86 करोड़ रुपये की बचत होगी.