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SC ने एस्टर अनुह्या रेप-हत्या मामले में बदला मुंबई की कोर्ट का फैसला, आरोपी चंद्रभान को किया बरी

सुप्रीम कोर्ट ने 23 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रेप और हत्या के मामले में मुंबई की अदालत के फैसले को बदल दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने चंद्रभान सानप को बरी कर दिया है. न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन ने फैसला सुनाते हुए इस सिद्धांत को रेखांकित किया कि अपराध को उचित संदेह से परे स्थापित किया जाना चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने चंद्रभान सानप को बरी कर दिया है, जिन्हें 2014 में मुंबई में 23 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रेप और हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी. अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को सानप को तुरंत रिहा करना का भी निर्देश दिया है. न्यायालय ने दोषसिद्धि को पलटने के प्रमुख कारणों के रूप में सबूतों में गंभीर खामियों और प्रक्रियात्मक कमियों का हवाला दिया.

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न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन ने फैसला सुनाते हुए इस सिद्धांत को रेखांकित किया कि अपराध को उचित संदेह से परे स्थापित किया जाना चाहिए. उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रस्तुत किए गए परिस्थितिजन्य सबूत सानप के अपराध की ओर ले जाने वाली एक अटूट सीरीज नहीं बनाते हैं और लंबे वक्त तक संदेह गुंजाइश बनी हुई है.

ये मामला एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की निर्मम हत्या से संबंधित था, जिसका आंशिक रूप से जला हुआ और सड़ा-गला शव 16 जनवरी 2014 को मुंबई के ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के पास मिला था. युवती की पहचान एक अंगूठी के माध्यम से की गई थी, जिसकी मौत का कारण सिर में चोट और दम घुटना बताया गया, साथ ही जननांगों में चोट के निशान भी पाए गए थे.

इस मामले में सानप को कथित रूप से पीड़िता से संबंधित कई वस्तुओं की बरामदगी के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिसमें एक ट्रॉली बैग और उसका पहचान पत्र शामिल है. अभियोजन पक्ष ने मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य सबूतों, लोकमान्य तिलक टर्मिनस रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज, जिसमें आरोपी को पीड़िता के साथ देखा गया था.

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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के मामले में गंभीर कमियों को नोट किया. मुख्यतः, सीसीटीवी फुटेज के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत उचित प्रमाणपत्र की कमी, जिससे यह साक्ष्य अमान्य हो गया. 

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि ऐसे मामलों में, विशेष रूप से जहां मृत्युदंड का प्रश्न हो, सबूत को कानूनी मानकों के अनुसार प्रस्तुत किया जाना चाहिए.सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों की गवाही में असंगतियों और सबूतों को सुरक्षित करने में देरी जैसी प्रक्रियात्मक खामियों पर भी ध्यान दिया. इसके अलावा फोरेंसिक सबूतों और रेप के आरोपों के बीच समन्वय की कमी पर भी सवाल उठाए गए.

बता दें कि आंध्र प्रदेश की रहने वाली 23 वर्षीय अनुह्या क्रिसमस और नए साल का जश्न मनाने के लिए अपने मूल स्थान पर गई थी. वह 5 जनवरी को मुंबई लौटते समय लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर उतरी थीं, जिसके बाद वह लापता हो गईं. इसके बाद 16 जनवरी को ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर उनका शव क्षत-विक्षत स्थिति में मिला था. रेलवे स्टेशन पर 36 सीसीटीवी फुटेज की जांच और लगभग 2,500 लोगों से पूछताछ के बाद जांचकर्ताओं ने सानप को गिरफ्तार किया था.

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