सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आईपीएल के पूर्व आयुक्त ललित मोदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी के खिलाफ कुछ "अपमानजनक" टिप्पणियां की थीं. चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और जेबी परदीवाला की पीठ को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि मोदी ने बिना किसी आधार के रोहतगी के खिलाफ "अपमानजनक आरोप" लगाए हैं. बेंच ने कहा- हमें कागज़ की किताब दो. हम अंतरिम आवेदन को अगले शुक्रवार को उचित पीठ के समक्ष रखेंगे.
बता दें कि ललित मोदी ने बाद में एक अन्य पोस्ट में कथित तौर पर वरिष्ठ अधिवक्ता से अपने पिछले अपमानजनक पोस्ट के लिए माफी मांगी है.
मुकुल रोहतगी को दी थी धमकी
दरअसल उन्होंने हाल में सीनियर वकील मुकुल रोहतगी को सोशल मीडिया पर खुलेआम धमकी दे डाली थी. ललित मोदी ने अपने इंस्टाग्राम अकॉउंट पर रोहतगी की एक तस्वीर शेयर करते हुए लंबा पोस्ट लिखा था. ललित मोदी ने जाने माने वकील मुकुल रोहतगी को धमकाते हुए कहा था कि वो उन्हें भगोड़ा कहना बंद करें.
अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर मोदी ने मुकुल रोहतगी को संबोधित पोस्ट में लिखा है कि वो वकीलों की गोष्ठी में गॉसिप करने के शौकीन हैं ये उन्हें पता है. लेकिन उस गॉसिप में मुझे भगोड़ा कहने से बचें. मेरी चर्चा करनी है तो मिस्टर मोदी कहकर संबोधित करें. अगली बार आपसे इतनी शालीनता और नरमी से नहीं कहूंगा. ये पोस्ट काफी लंबा था और इसमें सीधे सीधे रोहतगी को धमकाया गया था.
बीना मोदी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं मुकुल रोहतगी
गौरतलब है कि इससे पहले शीर्ष अदालत ने पिछले साल 1 अगस्त को शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश आर वी रवींद्रन को ललित मोदी और उनकी मां बीना मोदी से जुड़े पारिवारिक संपत्ति विवाद को निपटाने के लिए मीडिएटर नियुक्त किया था. वरिष्ठ अधिवक्ता रोहतगी इस संपत्ति विवाद में बीना मोदी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों में से एक हैं.इससे पहले, ललित मोदी और उनकी मां ने पीठ को बताया था कि परिवार में लंबे समय से लंबित संपत्ति विवाद को सुलझाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनिवार्य मध्यस्थता विफल रही है.