महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को लेकर हाईकोर्ट और निचली अदालतों की टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन बनाएगा. हाईकोर्ट और निचली अदालतों के लिए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले में गाइडलाइन तय करेगा. पिछले दिनों मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ मामले में आरोपी को जमानत देते हुए शर्त लगाई थी कि वह पीड़िता से राखी बंधवाए. इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में 9 महिला वकीलों ने चुनौती देते हुए कहा था कि ये फैसला कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है. अटॉर्नी जनरल ने भी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को निंदनीय बताते हुए विस्तृत गाइडलाइन की मांग की थी.
वहीं दूसरी ओर मणिपुर में साल 2000 से लेकर 2012 के बीच हुए कथित 1528 एक्स्ट्रा जूडिशल किलिंग मामले में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामले में एमिकस क्यूरी कोर्ट को असिस्ट तो कर सकता है लेकिन वो यह नहीं कह सकता कि जांच को ट्रांसफर कर दिया जाए. यह अधिकार केवल जज के पास निहित है. मणिपुर एनकाउंटर मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनएचआरसी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महेश भारद्वाज को जांच के लिए बनी एसआईटी से मुक्त कर दिया. मणिपुर में कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच के लिए गठित एसआईटी का महेश भारद्वाज हिस्सा थे. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि महेश भारद्वाज को जल्द ही उनकी मूल पोस्टिंग पर भेजा जाए.
दरअसल सुप्रीम कोर्ट एनएचआरसी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें मणिपुर में कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच करने वाली एसआईटी में शामिल इसके वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महेश भारद्वाज को मुक्त करने का अनुरोध किया गया था. भारद्वाज को उनके मूल कैडर में डीआईजी के तौर पर पदोन्नत कर दिया गया है.
मणिपुर में कथित तौर पर 1528 हत्याओं की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही पीठ ने 14 जुलाई 2017 को एसआईटी का गठन किया था और इनमें से कई मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए थे. भारद्वाज सहित एनएचआरसी के दो अधिकारियों को जुलाई 2018 में एसआईटी में शामिल किया गया था.