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जैश आतंकी ने की NSA अजीत डोभाल के ऑफिस की रेकी, वीडियो मिलने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. जैश से जुड़े हिदायत-उल्लाह मलिक के पास से डोभाल के ऑफिस का रेकी का एक वीडियो पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है. कश्मीर में शोपियां के रहने वाले मलिक को 6 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था.

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (फाइल फोटो)
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • डोभाल के ऑफिस की रेकी का वीडियो मिला
  • सुरक्षा एजेंसियां वीडियो को लेकर अलर्ट पर हैं
  • शोपियां के रहने वाले मलिक के पास मिला वीडियो

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. जैश से जुड़े हिदायत-उल्लाह मलिक के पास से डोभाल के ऑफिस का रेकी का एक वीडियो पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है. कश्मीर में शोपियां के रहने वाले मलिक को 6 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था.

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बताया जा रहा है कि यह रेकी पिछले साल की गई थी. मलिक ने डोभाल के ऑफिस और श्रीनगर में अन्य इलाकों का वीडियो रिकॉर्ड किया था. मलिक ने ये वीडियो अपने आकाओं को पाकिस्तान भेजे थे. इसकी जानकारी मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं.

इस संबंध में एक एफआईआर भी दर्ज की गई है. जम्मू के गंग्याल पुलिस स्टेशन में मलिक के खिलाफ यूएपी की धारा 18 और 20 के तहत केस दर्ज किया गया है. मलिक को जैश के फ्रंट ग्रुप लश्कर-ए-मुस्तफा का प्रमुख बताया जा रहा है. उसे अनंतनाग से गिरफ्तार किया गया था. मलिक के पास पास हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए थे.

आतंक फैलाने की साजिश

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जम्मू-कश्मीर में दोबारा आतंक फैलाने की साजिश में जुटे हुए हैं. खुफिया एजेंसियों ने गृह मंत्रालय को बताया है कि जम्मू-कश्मीर में जम्मात-ए-इस्लामी लश्कर, जैश, हिजबुल मुजाहिदीन को भारी फंड मुहैया कराने में जुटा हुआ है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के जरिये, दुबई तुर्की के रास्ते फंडिंग मुहैया कराई जा रही है. 

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गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जम्मू कश्मीर में अलगाववाद पार्ट-2 शुरू करने का साजिश की जा रही है. जकात, मौदा, बैत-उल-माल, विदेशों से आई चैरिटी, हेल्थ और एजुकेशन के नाम पर आईएसआई दुबई, तुर्की और दूसरे रास्तों से फंडिंग मुहैया करा रही है. 370 हटने के बाद आतंकवाद और पत्थरबाजी में कमी आई है, लेकिन जमात-ए-इस्लामी फंडिंग के जरिये कश्मीर में दोबारा इन सब चीजों को बढ़ाना देना चाहता है. जमात-ए-इस्लामी ने नए अलगाववादियों और आतंकियों की नई भर्ती के लिए सीक्रेट मीटिंग भी की है.

 

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