सुरक्षा बलों के बीच खतरे का पर्याय बने हुये मांडवी हिडमा का अब जल्द ही सफाया होगा. सुरक्षा बलों के सूत्रों ने आजतक को एक्सक्लूसिव जानकारी दी है कि मांडवी हिडमा के गांव के नजदीक सुरक्षा बलों ने अपना बड़ा कैंप बना लिया है. यह कैंप गृह मंत्रालय के आदेश पर फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) योजना के तहत बनाया गया है.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सुकमा जिले के माड़ इलाके में मोस्टवांटेड नक्सली हिडमा का गांव है. यहां पर सुरक्षाबलों का जाना एक तरीके से अबूझ पहेली जैसा है. लेकिन एरिया डोमिनेशन की रणनीति पर काम करते हुए सुरक्षाबलों ने हिडमा के गांव पुरवर्ती में जाकर कैम्प बना दिया है. अब ये कैम्प यानी फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस बनने से इस पूरे इलाके में जल्द ही पक्की सड़कों का जाल बिछेगा. यहां पर आना जाना सुगम हो जाएगा.
सुरक्षा महकमे के सूत्रों ने आजतक को बताया है कि PLGA-1 के कमांडरों ने हिडमा को भी ढेर करने का प्लान तैयार कर लिया है. बता दें कि छत्तीसगढ़ के कुछ जिले हैं, जहां पर मुट्ठीभर नक्सली बचे हैं. गृह मंत्रालय का प्लान ये है कि अगले 3 साल के भीतर पूरे बस्तर को नक्सल मुक्त कर दिया जाए.
क्या है MHA का प्लान? क्यों बन रहे हैं FOB
घने जंगल जो कि छत्तीसगढ़ का दंडकारण्य का इलाका कहलाता है. इस इलाके तक पहुंचना काफी मुश्किल है. ऐसे में यहां सुरक्षा बलों की धमक कामय रखना जरूरी है. इस बात को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय के आदेश पर लगातार फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस इन इलाकों में बनाए जा रहे है. इसका मकसद साफ है कि यहां पर सुरक्षा बलों की मौजूदगी रहे और नक्सली यहां से भाग खड़े हों.
नक्सलियों का सफाया कर रही FOB
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में आए दिन फॉरवर्ड ऑपरेशन बेस 'एफओबी' स्थापित किए जा रहे हैं. नतीजा ये हो रहा है कि नक्सली अपने पुराने ठिकाने छोड़कर घने जंगल की तरफ भागने लगे हैं. छत्तीसगढ़ में कुल 25 से ज्यादा FOB यानी फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस बनाये गयें है. एफओबी आसपास के क्षेत्रों में अभियान चला कर नक्सलियों का सफाया कर रही है FOB नक्सलियों के खिलाफ उनके ठिकानों के करीब आक्रामक अभियानों को अंजाम देने के लिए ‘लॉन्च पैड’ के रूप में काम कर रही है. इसी रणनीति के तहत बस्तर में लगातर बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया जा रहा है.
हिडमा को क्यों ढेर करना जरूरी?
पिछले कुछ सालों में दंडकारण्य के इलाके में जो भी बड़े नक्सली हमले हुए हैं, उसमें ज्यादातर जगहों पर NIA और दूसरी एजेंसियों का 25 लाख के वांछित हिडमा का ही नाम सामने आता रहा है. साउथ सुकमा के पुरवर्ती गांव में जन्में हिडमा को हिडमालू और संतोष के नाम से भी जाना जाता है. साल 2001 में वो नक्सलियों से जुड़ा था. हिडमा को ऐसा नक्सल कमांडर मानते हैं, जिसने पूरे क्षेत्र में अपना सूचना तंत्र फैला रखा है.
51 साल है इस समय हिडमा की उम्र
हिडमा, बस्तर क्षेत्र के मुरिया जनजाति से आता है. उसके गांव में आज तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है. लेकिन अब सुरक्षा बलों ने हिडमा के गांव मे अपना कैम्प खोल लिया है. हिडमा के बारे में जानकर ये भी कहते है कि हिडमा को गोरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग विदेश में मिली है और वो AK-47 का सबसे पुराना जानकर है. जो इसके कुछ ही मिनटों में फायरिंग कर सकता है. हिडमा ने पहले ही खुद को एक ऐसे कमांडर के तौर पर कायम कर लिया है, जिसके पास रणनीति की कमी नहीं है. NIA के दस्तावेजों के मुताबिक हिडमा की उम्र इस समय 51 साल की है. NIA जिसकी गहन तलाश कर रही है.
अप्रैल से जून तक नक्सलियों के हमले का अलर्ट
सुरक्षा एजेंसियों ने आजतक को एक्सचलूसिव जानकारी दी है कि नक्सली टीसीओसी यानी टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैम्पेन(TCOC) इन महीनों (अप्रैल से जून) में चला रहे हैं. जिसमें उनका मकसद होता है कि ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा बलों पर हमला कर इस दौरान नुकसान पहुंचाए. सूत्रों ने ये बताया है कि नक्सली केवल छत्तीसगढ़ गढ़ के साउथ बस्तर में ही टीसीओसी चलाने का प्लान नही बनाया है, बल्कि उन्होंने काफी सालों बाद नए ट्राई जंक्शन के नज़दीक सुरक्षा बलों पर हमला करने का प्लान तैयार किया है.
...तो मारा जाएगा हिडमा
सुरक्षा बलों की रिपोर्ट को मानें तो नक्सली PLGA BN-1 का कमांडर मांडवी उर्फ 'हिडमा' सुरक्षा बलों के छीने हथियार और UBGL/रॉकेट लॉन्चर से हमले की फिराक में है. उधर सूत्रों की माने तो हिडमा को पकड़ने और मारने का पूरा प्लान तैयार है. सुरक्षा बलों के इसी डर की वजह से नक्सली कमांडर हिडमा डीप फॉरेस्ट एरिया में छिपता फिर रहा है. पर अब नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने पिन पॉइंटेड ऑपरेशन के बड़ा प्लान तैयार किया है, जिसमें आने वाले दिनों में हिडमा मारा जाएगा.
टेक्निकल मैपिंग से होगी तलाश
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सिक्योरिटी फोर्स छत्तीसगढ़ उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के बॉर्डर पर स्थित करीब 125 गांव का थर्मल इमेजिंग करवा रही है. यह इलाके नक्सलियों से प्रभावित हैं, जहां हिडमा के छिपे होने की आशंका है. इसके साथ ही इन इलाकों में नक्सलियों के बेस बने हुए हैं, सिक्योरिटी फोर्स इस इस काम में एनटीआरओ की मदद ले सकती हैं, जिससे इन इलाकों की मैपिंग की जा सके इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जब भी सिक्योरिटी फोर्सेज इन इलाकों में ऑपरेशन के लिए निकलेंगे तो उन्हें सारे रास्तों की जानकारी भी होगी साथ में ही नक्सलियों के खिलाफ बेहतर ऑपरेशन कोऑर्डिनेट करने में मदद मिलेगी.