केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा में इस धारणा पर प्रतिक्रिया दी कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई का काम जाति आधारित है. इस मुद्दे पर लिखित जवाब में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि "सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई एक व्यवसाय आधारित गतिविधि है, न कि जाति आधारित."
'नेशनल एक्शन फॉर मकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम' (NAMASTE) योजना के तहत 54,574 मान्य सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई कर्मचारियों का प्रोफाइल तैयार किया गया. इन आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 67 प्रतिशत यानी 37,060 सफाईकर्मी अनुसूचित जाति से आते हैं. इनके अलावा, 15.73 प्रतिशत सफाईकर्मी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से हैं, 8.31 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति (ST) से, जबकि सिर्फ 8.05 प्रतिशत सामान्य वर्ग से आते हैं.
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33 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रोफाइल तैयार किया गया
कुल 57,758 सफाई कर्मचारियों का 33 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रोफाइल तैयार किया गया है, जिनमें से 54,574 की जानकारी मान्य है. ओडिशा और तमिलनाडु जैसे राज्यों का डेटा केंद्रीय NAMASTE डाटाबेस में जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है.
सफाई कर्मियों का बड़ा हिस्सा पिछड़े वर्गों से
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि सफाई कर्मियों का बड़ा हिस्सा अनुसूचित जातियों और अन्य सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों से आता है, जो यह दर्शाता है कि इस व्यवसाय की सामाजिक गतिशीलता के लिए प्रमुख चुनौतियां हैं.
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इसके बावजूद, सरकार के इस कोशिश ने विभिन्न जातियों और समुदायों के साथ इस काम को जोड़ने की कोशिश की है, जिसमें मकेनाइज्ड और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया है.