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किसानों के प्रदर्शन में शामिल होने सिंधु बॉर्डर पहुंचीं बिलकीस दादी, कहा- हम उनकी बेटियां

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को शाहीन बाग की ऐक्टिविस्ट बिलकीस दादी का समर्थन मिला है. बिलकीस दादी ने कहा कि हम अपनी आवाज उठाएंगे, सरकार को हमारी बात सुननी चाहिए.

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 शाहीन बाग की ऐक्टिविस्ट बिलकिस दादी
शाहीन बाग की ऐक्टिविस्ट बिलकिस दादी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसानों को मिला बिलकीस दादी का साथ
  • सिंधु बॉर्डर पहुंचीं बिलकीस दादी
  • सरकार को बात सुननी चाहिए: बिलकीस दादी

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को शाहीन बाग की ऐक्टिविस्ट बिलकीस दादी का समर्थन मिला है. बिलकीस दादी किसानों के प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए सिंधु बॉर्डर पहुंचीं हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को हमारी बात सुननी चाहिए. 

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आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में उतरीं बिलकीस दादी ने कहा कि हम किसानों की बेटियां हैं, हम आज किसानों के प्रोटेस्ट का समर्थन करने जाएंगे. हम अपनी आवाज उठाएंगे, सरकार को हमारी बात सुननी चाहिए. 

बिलकीस दादी उस वक्त सुर्खियों में आईं थीं, जब उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग आंदोलन में धरना पर बैठकर ध्यान आकर्षित किया था. पिछले साल मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन एक्ट पास किया था, जिसके बाद पूरे देशभर में प्रदर्शन हुआ था. 

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बिलकीस दादी को टाइम टाइम मैग्जीन ने 100 प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में भी शामिल किया था. उन्हें शाहीन बाग की दादी के नाम से भी जाना जाता है. बता दें कि केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है और वो सिंधु बॉर्डर पर डटे हुए हैं.

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आज किसान संगठनों और सरकार के बीच बातचीत हो रही है जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. किसानों का इस आंदोलन को करीब एक हफ्ते हो गए. पहले सरकार ने किसानों को बातचीत के लिए 3 दिसंबर की तारीख दी थी, लेकिन भारी दवाब के आगे सरकार को झुकना पड़ा और दो दिन पहले किसानों से बातचीत के लिए तैयार होना पड़ा. 

 

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