दुनिया भर के लाखों मुसलमान हज के लिए हर साल सऊदी अरब पहुंचते है. इस्लाम के कुल पांच स्तंभों में से हज पांचवां स्तंभ है. सभी स्वस्थ और आर्थिक रूप से सक्षम मुसलमानों पर हज करना फर्ज (जरूरी) है. इस बार हज यात्रा के लिए पहली उड़ान 21 मई को भारत से है. ऐसे में हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा एक सर्कुलर जारी करके शिया मुसलमानों से 24904 हजार रुपये अतरिक्त देने के लिए कहा है. हज कमेटी के इस फैसले से शिया मुस्लिम धर्मगुरु नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.
शिया मुस्लिमों से 25 हजार अतिरिक्त क्यों
ऑल इंडिया शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास ने aajtak.in को बताया कि हज कमेटी ऑफ इंडिया ने एक सर्कुलर जारी करके हज पर जाने वाले शिया मुस्लिमों से 24904 रुपये ज्यादा देने की बात कही है. उन्होंने हज कमेटी पर आरोप लगाया कि शिया हाजियों से अवैध रूप से रकम वसूली जा रही है. शिया हज यात्रियों को हज कमेटी परेशान कर रही है. इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए और शिया मुस्लिम हज यात्रियों के साथ किसी तरह का कोई भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है?
बता दें कि हज कमेटी ऑफ इंडिया ने छह मई को एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें भोपाल, दिल्ली, गया, गोवहाटी, इंदौर, कोलकाता, लखनऊ, रांची, श्रीनगर से वाराणसी से हज पर जाने वाले शिया मुस्लिमों को 24904 रुपये अतरिक्त जमा करना है. वहीं, अहमदाबाद, औरंगाबाद, कलीकट, कोच्चि, हैदराबाद, मुंबई और नागपुर से हज पर जाने वाले शिया मुस्लिमों को 26314 रुपये अधिक देने हैं. इस रकम को 15 मई तक जमा करने की तारीख तय की है. हज कमेटी ने यह अतिरिक्त रकम जोहफा प्वाइंट से हज प्रक्रिया शुरू करने वाले शिया यात्रियों से ले रही है.
मक्के के बजाय मदीने जाएगें यात्री
शिया मौलाना सैफ अब्बास का कहना है कि हज कमेटी बढ़ी रकम सिर्फ शिया मुस्लिमों से ले रही है जबकि लखनऊ से जाने वाले हज यात्री सीधे मक्के जाने के बजाय मदीना जा रहे हैं. हज यात्री मदीना जा रहे हैं तो जोहफा जाने का मतलब ही नहीं रह जाता है, क्योंकि मदीने में मस्जिद-ए-सजरा से हज प्रक्रिया शुरू करते हैं. हज यात्री अगर सीधे मक्के जाते तब जोफा जाया जाता है. हज कमेटी ऑफ इंडिया ने शिया मुस्लिम हज यात्रियों से ही ज्यादा पैसा लेने का सर्कुलर जारी किया है, जो किसी भी सूरत में सही नहीं है.
जोहफा की इस्लाम में अहमियत
सऊदी अरब के मक्का शहर में काबा को इस्लाम में सबसे पवित्र स्थल माना जाता है. इस्लाम का यह धार्मिक अनुष्ठान दुनिया के मुसलमानों के लिए काफी अहम है. इसीलिए हर साल ईद-उल-अजहा के महीने में हज किया जाता है. हज के रस्मों को पूरा करना हर मुसलमान की बड़ी ख्वाहिशों में से एक होता है. पैंगबर मोहम्मद साहब मक्का शहर से 200 किलोमीटर दूर जोहफा नामक स्थान पर पहुंचे थे. इसी जगह से हज यात्री अपना एहराम (हज करने का वस्त्र) पहनते थे.
कहा जाता है कि इसी जगह पर पैगंबर साहब को अल्लाह ने संदेश भेजा. दुनिया भर से हज करने गए सारे हाजी वापस इसी जगह तक आते थे और उसके बाद अपने-अपने देशों के लिए रास्ता चुनते थे.इसी जगह से मिस्र, ईराक, सीरीया, मदीना, ईरान और यमन के रास्ते अलग होते थे. पैगंबर मोहम्मद साहब ने सभी हाजियों को जोहफा से 3 किलोमीटर दूर गदीर नामक मैदान पर रुकने के आदेश दे दिए. मोहम्मद साहब ने उन लोगों को भी वापस बुलवाया जो लोग आगे जा चुके थे और उन लोगों का भी इंतज़ार किया जो लोग पीछे रह गए थे.
जोहफा से शिया शुरू करते हज प्रक्रिया
जोहफा की अहमियत को देखते हुए ज्यादातर शिया मुस्लिम हज यात्री जोहफा से एहराम बांधकर अपनी हज प्रक्रिया को शुरू करते हैं जबकि सुन्नी मुस्लिम सउदी अरब के एयरपोर्ट या अन्य दूसरे स्थान से भी एहराम पहनकर अपनी हज यात्रा शुरू कर देते हैं. जोहफा मक्के से करीब 200 किलोमीटर दूर है, जिसके चलते हज कमेटी इस प्वाइंट से हज यात्रा शुरू करने वाले लोगों से अतरिक्त रकम वसूल रहा है.
उत्तर प्रदेश हज कमेटी के अध्यक्ष मोहसिन रजा ने कहा कि शिया हज यात्रियों से जो अतरिक्त पैसे लिए जा रहे हैं, वो पैसे जोहफा से अपनी प्रक्रिया शुरू करने वालों से लिए जा रहे हैं. ये उन्हीं हज यात्रियों से रकम ली जा रही है, जिन्होंने अपने फॉर्म में जोहफा प्वाइंट को चुना है. उन्होंने कहा कि अगर किसी ने गलती से जोहफा का चयन किया है, तो वो लोग हज कमेटी की वेबसाइट पर जाकर उसे हटा दें. उनसे लिए गए अतरिक्त पैसे को हज कमेटी वापस कर देगी.
शिया धर्मगुरु जता रहे विरोध
हालांकि, शिया मौलाना सैफ अब्बास का कहना है कि उत्तर प्रदेश से 26 हजार हज यात्रियों का कोटा है, जिसमें हज पर जाने वाले करीब एक हजार शिया मुस्लिम है. यूपी से हज के लिए जो भी फ्लाइट जा रही है, वो सभी मदीने जाएंगी. ऐसे में शिया हज यात्रियों को जोहफा जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता है. इसके बावजूद हज कमेटी उनसे जोहफा के नाम पर बढ़ी रकम वसूल रही है, जो शिया मुस्लिमों के साथ गलत किया जा रहा है. ये बढ़ी रकम आखिरी वक्त में हज यात्री कैसे जुटाएं और हज कमेटी को दे दिया जाता है तो वह कब वापस करेगा. इसका कोई निर्धारित तारीख नहीं है. ऐसे में हज कमेटी को अपने फैसले पर विचार करना चाहिए और उसे वापस ले?