कर्नाटक सरकार ने नशीले पदार्थों की तस्करी को नॉन कॉग्निजेबल अपराध बनाने का संकल्प लिया है, जिसके लिए अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुधवार को यह जानकारी दी. सिद्धारमैया ने एक मंत्रिस्तरीय टास्क फोर्स के गठन की भी घोषणा की. उन्होंने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के प्रति सरकार की 'शून्य सहनशीलता' नीति पर जोर दिया और कहा कि सरकार इस 'सामाजिक खतरे' से छुटकारा पाने के लिए सभी ईमानदार प्रयास करेगी.
नशीले पदार्थों के दुरुपयोग पर बैठक
मुख्यमंत्री ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग पर एक बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें गृह मंत्री जी परमेश्वर, स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव, चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरण प्रकाश पाटिल, आईटी और बीटी मंत्री प्रियंक खड़गे, शहरी विकास मंत्री बिरथी सुरेश और पुलिस विभाग सहित शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया.
इन जगहों पर सबसे ज्यादा मामले
सिद्धारमैया ने कहा, 'कर्नाटक में नशीली दवाओं की समस्या समाज के विभिन्न वर्गों और मीडिया से सरकार के संज्ञान में आई है, इसलिए मैंने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की है.' उन्होंने कहा कि कर्नाटक में दर्ज किए गए नशीली दवाओं के मामलों में से 50 फीसदी मामले बेंगलुरू में और 22 फीसदी मामले मंगलुरु में दर्ज किए गए हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशीली दवाओं की समस्या से निपटने के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर उपायुक्तों की अध्यक्षता में पहले से ही एक समिति है और विशेषज्ञों ने अधिक जागरूकता और प्रवर्तन को मजबूत करने पर जोर दिया है.
उन्होंने कहा, 'आज राज्य स्तर और जिला स्तर की समितियों से ऊपर गृह मंत्री की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया गया है. इसमें स्वास्थ्य मंत्री, प्राथमिक और उच्च शिक्षा मंत्री, समाज कल्याण मंत्री, चिकित्सा शिक्षा मंत्री सदस्य होंगे. वे समय-समय पर बैठकें करेंगे और उपायों के निर्देश देने के साथ-साथ समीक्षा करेंगे.'
उन्होंने टैबलेट के रूप में सिंथेटिक दवाओं की उपलब्धता पर भी चिंता व्यक्त की. सिद्धारमैया ने कहा कि पुलिस स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) की जानकारी में आए बिना ड्रग तस्करी नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि एसएचओ, पुलिस उपाधीक्षक, सहायक पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त और पुलिस अधीक्षकों की जिम्मेदारी तय की जाएगी. सीएम ने कहा कि इस बात पर भी विचार किया जाएगा कि कानूनों को मजबूत करने के लिए क्या किया जाना चाहिए.