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सिंघु बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन में दिख रहे जीवन के तमाम तरह के रंगों को ‘आजतक’ लगातार आप तक पहुंचा रहा है. आज बारी है ‘गतका’ की. ‘गतका’ यानि एक सिख मार्शल आर्ट (युद्ध कला). सिंघु बॉर्डर पर युवाओं और किशोरों को तल्लीनता के साथ गतका का अभ्यास करते देखा जा सकता है. गतका के माहिर ट्रेनर भी बड़े मनोयोग से युवाओं को इस मार्शल आर्ट की बारीकियां सिखा रहे हैं.
क्या है गतका और क्या है इसका इतिहास?
सिख गुरुओं ने गतका को मानवता की भलाई के लिए समर्पित किया. गतका में गति और तालमेल के विशेष मायने हैं. सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी को गतका शब्द का जन्मदाता माना जाता है. जुल्म और अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए गतका शस्त्र कला को इस्तेमाल में लाया गया. सिख इसे बतौर मार्शल आर्ट और स्पोर्ट्स के तौर पर बड़े चाव से सीखते हैं.
निहंग सिख योद्धाओं को अक्सर इस युद्धकला का प्रदर्शन करते देखा जाता है. नगर कीर्तन जैसे सिखों के धार्मिक उत्सवों में इस कला का प्रदर्शन किया जाता है. इसे पारंपरिक कपड़ों में तलवार और ढाल के सहारे खेला जाता है.
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आत्मरक्षा के लिए बढ़िया मार्शल आर्ट
सिंघु बॉर्डर पर किशोरों और युवाओं को गतका की ट्रेनिंग दे रहे सुखचैन सिंह ने आजतक से खास बातचीत की. उन्होंने कहा, “आने वाली पीढ़ी को इसकी जरूरत है. यह हमारा पुरातन पारंपरिक खेल और मार्शल आर्ट है. इस शस्त्र विद्या के जरिए हम विजय प्राप्त करते हैं. अपनी सुरक्षा के लिए हर एक इंसान को ऐसी विद्या की जरूरत होती है.’’
सुखचैन सिंह ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में अकेले गतका की ट्रेनिंग देना शुरू किया लेकिन अब ट्रेनर्स की पूरी टीम उनके साथ मौजूद है. वो सिंघु बॉर्डर पर अलग अलग जगह हर दिन ट्रेनिंग दे रहे हैं.
बता दें कि हाल ही में ‘खेलो इंडिया’ यूथ गेम्स-2021 के नए शेड्यूल में चार नए भारतीय खेलों को शामिल किया है. इनमें गतका भी शामिल है.
सुखचैन सिंह कहते हैं, “गतका सीखने से आपका धैर्य, आत्म नियंत्रण और अनुशासन बढ़ता है. महिलाओं के लिए भी गतका सीखना बहुत उपयोगी है. इस मार्शल आर्ट को सीखने के बाद महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ती.
बहरहाल, गतका की गति और तालमेल का कमाल का होता है. इस युद्धकला को देखने वालों में भी जोश का अनुभव होता है.