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'...सख्त कानून बने', सोशल मीडिया और OTT के अश्लील कंटेंट पर संसद में बोले सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव

संसद के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील कंटेंट का मुद्दा उठा. इस सवाल के जवाब में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सख्त कानून बने. सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री ने क्या जवाब दिया?

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सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है और शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही भी हंगामे की भेंट चढ़ गई. अडानी समूह से जुड़े मामले पर चर्चा के लिए विपक्षी सांसदों ने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया था. विपक्ष इसकी जेपीसी से जांच कराने की मांग कर रहा है. कार्यवाही शुरू होते ही दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया. हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे और राज्यसभा 11.30 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.

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दोनों सदनों की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा. इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई. राज्यसभा में कोई कामकाज नहीं हो सका. वहीं, लोकसभा में हंगामे के बीच प्रश्नकाल के दौरान मेरठ से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद अरुण गोविल ने सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील कंटेंट का मुद्दा उठाया.

अरुण गोविल के सवाल पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सदन में जवाब दिया. उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया और ओटीटी का जो युग है, उसमें एडिटोरियल चेक खत्म हो गया है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि नियमों को और कड़ा करने की जरूरत है. केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति और उन देशों की संस्कृति में बहुत अंतर है जहां से ये प्लेटफॉर्म आते हैं. इसलिए मैं चाहूंगा कि संसद की स्थायी समिति इसे देखे और सख्त कानून बने.

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इससे पहले अरुण गोविल ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो कुछ भी दिखाया जा रहा है, उसने हमारे नैतिक मूल्य और संस्कारों को बहुत ही गहरी चोट पहुंचाई है.ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर जो दिखाया जा रहा है, वह बहुत अश्लील है और परिवार के साथ बैठकर नहीं देख सकते. अश्लील सामग्री को रोकने के लिए मौजूदा तंत्र क्या है और क्या सरकार का इन कानूनों को और अधिक बनाने का प्रस्ताव है?

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लोकसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही इसके बाद स्थगित करनी पड़ी. स्पीकर ओम बिरला ने हंगामा कर रहे सदस्यों से सदन चलने देने की अपील की लेकिन इस अपील का कोई असर नहीं हुआ. स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही जब दोबारा शुरू हुई, आसन पर दिलीप सैकिया थे.

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विपक्षी सदस्यों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया. अडानी समूह से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही कुछ देर चली. हंगामे के बीच ही लिस्टेड बिजनेस सदन पटल पर रखे गए और नियम 377 के तहत स्वीकृत मामले लिखित में सदन पटल पर रखे गए. इसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई.

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