केरल में मोबाइल चलाने से मना करने पर बेटे ने मां पर बेरहमी से हमला कर दिया. इसके बाद अस्पताल में महिला की मौत हो गई. यह खबर हम सबके लिए एक चेतावनी और सबक है, जो अपने बच्चों को मोबाइल देकर अपनी दुनिया में बिजी हो जाते हैं. मोबाइल बच्चों के लिए किसी खतरनाक नशे की तरह उनके दिमाग पर हावी हो रहा है. कई तरह के दुष्प्रभाव डाल रहा है. मां की हत्या करने वाले आरोपी बेटे को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है, लेकिन क्या यह आखिरी घटना है?
जानकारी के अनुसार, कन्नूर जिले के कनिचिरा की रहने वाली 63 साल की महिला रुग्मिनी अस्पताल में भर्ती थी. पिछले एक सप्ताह से अस्पताल में रुग्मिनी का इलाज चल रहा था. शनिवार को उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. दरअसल, महिला के बेटे सुजीत को मोबाइल की लत है.
इसी मोबाइल एडिक्शन (mobile addiction) को लेकर महिला ने उससे सवाल किया था और फोन को ज्यादा इस्तेमाल न करने को कहा था. इसी बात से महिला का बेटा गुस्से में आ गया. उसने अपनी मां पर बेरहमी से हमला कर दिया, सिर पकड़कर दीवार पर पटक दिया, जिससे महिला गंभीर रूप से घायल हो गई.
पुलिस के सामने आरोपी ने कबूल किया अपराध
इसके बाद परिजनों ने देखा तो तुरंत रुग्मिनी को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां महिला का इलाज शुरू किया गया. इस मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जायजा लिया. पुलिस ने महिला के बेटे को पकड़कर उससे पूछताछ की. पूछताछ के दौरान महिला बेटे ने अपराध कबूल कर लिया.
एक बार मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती हो चुका था आरोपी
पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने अपनी मां पर इसलिए हमला किया था, क्योंकि उसने मुझे लगातार मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से रोका था. फिलहाल इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. बताया जा रहा है कि आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ था. उसे एक बार कोझिकोड के कुथिरावट्टम के सरकारी मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
क्यों खतरनाक है मोबाइल की लत?
बहुत हद तक स्मार्टफोन चलाने की लत निजी जिंदगी में दखल देने लगती है. कई बार लोग दफ्तर, कॉलेज या अन्य किसी आयोजन में शामिल होने के दौरान भी फोन में लगे रहते हैं, जिसका असर काम पर पड़ने लगता है.
इसके अलावा, मोबाइल फोन की लत 'रियल लाइफ' से भी दूर करती है. किसी के साथ बैठकर भी कुछ लोग बात करने की बजाय फोन में ही लगे रहते हैं. इस कारण से सामने बैठे व्यक्ति पर प्रभाव ठीक नहीं पड़ता.
यह भी पढ़ेंः मोबाइल एडिक्शन के चलते खतरनाक कदम उठा रहे हैं बच्चे, ऐसे छुड़ाएं आदत
इस मामले को लेकर मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी का कहना है कि वर्तमान समय में मोबाइल बेहद एडवांस हो चुका है. इसके माध्यम से हर आम व्यक्ति तक तकनीक की पहुंच हो गई है.
मोबाइल में नजर आने वाली दुनिया इतनी आकर्षक लगती है कि बच्चे तो छोड़िए, बड़े भी इसके एडिक्ट हो जाते हैं. मोबाइल के इसी तिलिस्म में उलझकर ये अंदाजा नहीं लगता कि उन्हें कितनी देर तक फोन का इस्तेमाल करना चाहिए. मोबाइल का जरूरतभर का इस्तेमाल की सही विकल्प हो सकता है.
हफ्ते में एक बार बिना फोन के रहें
विशेषज्ञों का मानना है कि हमें हफ्ते में किसी एक दिन मोबाइल से दूरी बनाकर रखना चाहिए. जब भी ऐसा करने का प्लान हो, तब बिना फोन के बाहर निकलें. दोस्तों से मिलकर उनसे बातें करें, बाहर घूमें. इस तरह के आइडिया से धीरे-धीरे मोबाइल की आदत कम हो सकती है. (PTI)