कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी पूछताछ का दौर जारी है. दफ्तर में ईडी के सवाल होते हैं तो जमीन पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन चलता है. कांग्रेस ने इसे सत्याग्रह का नाम दिया है. कहा गया है कि सच के लिए ये आंदोलन किया जा रहा है. सच को ताकतवर बनाने के लिए ये आंदोलन किया जा रहा है. लेकिन ये आंदोलन महात्मा गांधी के सत्याग्रह से बहुत अलग है, बल्कि कह सकते हैं कि इसकी कोई तुलना नहीं की जा सकती.
जब-जब गांधी परिवार को पूछताछ के लिए बुलाया जाता है तब पूरी कांग्रेस...विरोध- प्रदर्शन शुरू करती देती है. पार्टी के सैकड़ों हज़ारों कार्यकर्ता सड़क जाम करके धरने पर बैठ जाते हैं..... इसके लिए पूरे देश से कांग्रेस के कार्यकर्ता बुलवाए जाते हैं... पार्टी के सीनियर नेता विरोध के नाम पर गिरफ़्तारी देने पहुंच जाते हैं. कई बार नौबत पुलिस के साथ हाथपाई तक भी आ जाती है लेकिन कांग्रेस इस पूरे सुनियोजित सियासी कार्यक्रम को....एक नाम देती है और वो है.... सत्याग्रह
क्या होता है सत्याग्रह?
सत्याग्रह एक बहुत शक्तिशाली शब्द है.. इस शब्द से हमारे देश का परिचय.. पहली बार महात्मा गांधी ने करवाया था...ये वो दौर था जब ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ़ महात्मा गांधी अंहिसक तरीके से आज़ादी का संघर्ष कर रहे थे.. लेकिन आज कांग्रेस... सत्याग्रह शब्द का इस्तेमाल पार्टी और हाईकमान की रक्षा के लिए कर रही है. महात्मा गांधी के सत्याग्रह और गांधी परिवार के सत्याग्रह में.... दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है..वो सत्याग्रह देश की आज़ादी के लिए किया गया था और आज का ये कांग्रेस वाला सत्याग्रह... ED की पूछताछ से बचने के लिए किया जा रहा है.. पूछताछ की प्रक्रिया के खिलाफ किया जा रहा है.
कैसा था महात्मा गांधी का सत्याग्रह?
एक तरफ महात्मा गांधी का सत्याग्रह था जिसमें जनसैलाब तो होता था लेकिन वो बड़ी शांति और अनुशासन के साथ महात्मा गांधी को Follow करता था...उनकी बातों को बड़े धैर्य के साथ सुनता था...तब कही भी उग्र प्रदर्शन नहीं दिखाई देता जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस का सियासी सत्याग्रह है जहां कार्यकर्ताओं की भीड़ है जो अपने नेता के लिए सुरक्षाकर्मियो से हाथापाई करने के लिए आमादा है. कानून व्यवस्था को चुनौती देने के लिए तैयार है .
ये भी समझने की ज़रूरत है कि गांधी परिवार की सुरक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी किस तरीके...सत्याग्रह शब्द का इस्तेमाल कर रही है. इस जानने के लिए सत्याग्रह के इतिहास को जानना चाहिए . सत्याग्रह का शाब्दिक अर्थ है शुद्ध साधनों के साथ सत्य के लिए आग्रह...जिसमें शांति...धैर्य और मर्यादा का समावेश होता है . सत्याग्रह शब्द से परिचय कराने का श्रेय महात्मा गांधी को दिया जाता है . गांधी जी ने अपने अंहिसक स्वतंत्रता आंदोलन को ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया था उनके लिये सत्याग्रह का अर्थ था....सभी प्रकार के अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ.. शुद्ध आत्मबल का प्रयोग करना.
आज़ादी के आंदोलन के दौरान उन्होंने कभी भी अपनी गिरफ़्तारी के खिलाफ़...कार्यकर्ताओं की भी बैठक नहीं बुलाई...किसी को गिरफ़्तारी देने के लिए नहीं कहा था...महात्मा गांधी के समर्थन में जो भी देशवासी आया वो अपनी अंतरात्मा की आवाज़ और देशभक्ति की भावना के साथ जुड़ा था लेकिन अब समय बदल गया है... कांग्रेस के सत्याग्रह में विरोध प्रदर्शन और गिरफ़्तारी की पूरी स्क्रिप्ट पहले से ही लिख दी जाती है और इसके केंद्र बिंदू में आज राहुल गांधी रहे.
सोनिया गांधी से ED की पूछताछ के विरोध में राहुल गांधी....सड़क पर ही धरने पर बैठ गए..वो करीब आधे घंटे तक सड़क पर बैठे रहे इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया लेकिन कांग्रेस ने इसे द्श्य को अपने राजनीतिक ऐजेंडे के रूप में इस्तेमाल कर लिया.
गांधी सरनेम की कहानी
आज कांग्रेस ने एक ट्वीट किया जिसमें राहुल गांधी की आज के धरने की तस्वीर की तुलना इंदिरा गांधी की तस्वीर के साथ कर दी . इसमें कवि रामधारी सिंह दिनकर जी कविता का इस्तेमाल किया गया जिसमें ये लिखा गया है कि जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे.
ये भी समझने की ज़रूरत है कि जिस तरह गांधी परिवार का महात्मा गांधी के सत्याग्रह से कोई रिश्ता नहीं है, उसी तरह गांधी परिवार के सरनेम का... महात्मा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है . गांधी परिवार में सबसे पहले गांधी शब्द का इस्तेमाल फिरोज गांधी से शुरू हुआ था जबकि उनका असली नाम Feroze Jehangir Ghandy था और इंदिरा गांधी को तब इंदिरा नेहरू के नाम से जाना जाता था. लेकिन इन दोनों के विवाह के बाद Surname से Ghandy शब्द को हटाकर Gandhi कर दिया गय़ा.
आजतक ब्यूरो