सहारा ग्रुप के चीफ सुब्रत रॉय सहारा का मंगलवार को कार्डियोरेस्पिरेटरी अरेस्ट से निधन हो गया. रॉय 75 साल के थे, उन्होंने मुंबई के निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली. वे लंबे वक्त से बीमार थे. 10 जून 1948 को अररिया बिहार में जन्मे सुब्रत रॉय ने 1978 में सहारा इंडिया परिवार समूह की स्थापना की थी. रॉय ने खुदरा, रियल एस्टेट और वित्तीय सेवा क्षेत्रों में एक बड़ा व्यापारिक साम्राज्य बनाया था.
सुब्रत रॉय बिजनेस का जाना-माना नाम थे. एक समय रॉय के सहारा इंडिया परिवार को 'टाइम मैगजीन' ने रेलवे के बाद भारत में दूसरा सबसे बड़ा एंप्लॉयर बताया था. इसमें करीब 12 लाख कर्मचारी काम करते थे. समूह ने दावा किया कि उसके पास 9 करोड़ से अधिक निवेशक हैं, जो भारतीय परिवारों के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं. सुब्रत रॉय ने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की, जो फाइनेंस, रियल स्टेट, मीडिया और हॉस्पिटेलिटी समेत अन्य क्षेत्रों तक फैला हुआ है.
गोरखपुर से शुरू किया सफर
सुब्रत रॉय ने गोरखपुर के गवर्नमेंट टेक्निकल इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की शिक्षा की थी. 1976 में चिटफंड कंपनी सहारा फाइनेंस का अधिग्रहण करने से पहले उन्होंने गोरखपुर में व्यवसाय में कदम रखा. इस फाइनेंस कंपनी के जरिए सुब्रत रॉय छोटे-छोटे दुकानदारों से सेविंग्स कराते थे. कुछ समय में पूंजी थोड़ी बढ़ी तो कपड़े और पंखे की छोटी फैक्ट्री भी शुरू कर दी. फिर देखते ही देखते महज 2000 रुपये से शुरू किये गए फाइनेंस कंपनी के कारोबार को 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया.
रॉय के नेतृत्व में, सहारा ने कई व्यवसायों में विस्तार किया. समूह ने 1992 में हिंदी भाषा का समाचार पत्र राष्ट्रीय सहारा लॉन्च किया, 1990 के दशक के अंत में पुणे के पास महत्वाकांक्षी एम्बी वैली सिटी परियोजना शुरू की, जो महाराष्ट्र में लोनावाला के पास है. सहारा टीवी के साथ टेलीविजन क्षेत्र में प्रवेश किया, जिसे बाद में सहारा वन नाम दिया गया. 2000 के दशक में, सहारा ने लंदन के ग्रोसवेनर हाउस होटल और न्यूयॉर्क शहर के प्लाजा होटल जैसी प्रतिष्ठित संपत्तियों के अधिग्रहण के साथ अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं. देखते ही देखते सुब्रत रॉय सहाराश्री बन गए.
इसके अलावा रॉय ने साल 1993 में एयर सहारा शुरू की थी, जिसे बाद में उन्होंने जेट एयरवेज को बेच दिया. साल 2001 से 2013 तक सहारा ग्रुप टीम इंडिया का स्पॉन्सर भी रहा. वहीं, सहारा की टीम 'पुणे वॉरियर्स' ने 2011 में आईपीएल में एंट्री ली थी.
विवादों से रहा पुराना नाता
खुदरा, रियल एस्टेट और वित्तीय सेवा क्षेत्रों में एक बड़ा व्यापारिक साम्राज्य बनाने वाले रॉय का विवादों से भी नाता रहा. उनकी कंपनी पर पोंजी योजनाओं के साथ नियमों को दरकिनार करने का आरोप लगा. रॉय को कानूनी चुनौतितों का भी सामना करना पड़ा. साल 2014 में, सुप्रीम कोर्ट ने SEBI के साथ एक विवाद के संबंध में अदालत में उपस्थित होने में विफल रहने के कारण उन्हें हिरासत में लेने का आदेश दिया था.
इसके कारण एक लंबी कानूनी लड़ाई हुई, जिसमें रॉय को तिहाड़ जेल में समय बिताना पड़ा और बाद में उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया गया. दरअसल ये पूरा मामले सेबी की सहारा से निवेशकों के अरबों रुपये वापस करने की मांग को लेकर था. सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए सहारा-सेबी रिफंड खाता भी स्थापित किया है.