प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए. इस दौरान कैबिनेट ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच कृष्णा नदी जल बंटवारे को लेकर कृष्णा जल विवाद ट्रिब्यूनल को अतरिक्त टर्म ऑफ रिफरेंस दिया है. ये ट्रिब्यूनल कृष्णा नदी पर बनने वाले सारे प्रोजेक्ट के हिसाब से जल बंटवारा करेगा.
कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी राशि 200 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रति एलपीजी सिलेंडर कर दी है. अब उज्ज्वला के लाभार्थियों को गैस सिलेंडर 600 रुपये में मिलेगा. इसके साथ ही कैबिनेट ने तेलंगाना में सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी को मंजूरी दे दी है. ये यूनिवर्सिटी 889 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी.
इसके साथ ही कैबिनेट ने अंडमान निकोबार, दादर नागर हवेली और लक्षद्वीप के लिए किराएदारों के नए नियमों को मंजूरी दे दी है. इससे मकान मालिक किराए पर मकान देने, मकान बनाने और खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे. इसके साथ ही खाली पड़े मकानों को किराएदारों को मिल सकेंगे. किराए पर मकान देने से पहले मकान मालिक और किराएदार के बीच रेंट एग्रीमेंट करना अनिवार्य होगा. एग्रीमेंट की लिखित सूचना रेंट अथॉरिटी को दी जाएगी.
मकान मालिक और किराएदार आपसी सहमति से किराया तय करेंगे. साथ ही विवाद के निवारण के लिए फास्ट ट्रैक की व्यवस्था होगी. बैठक में ये भी तय किया गया कि 2 महीने तक किराया न देने पर मकान का क़ब्ज़ा मकान मालिक को दे दिया जाएगा.
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि कैबिनेट ने नेशनल टरमरिक बोर्ड (National Turmeric Board) बनाने को मंजूरी दे दी है. पीएम ने इसका ऐलान तेलंगाना में ही कर दिया था. नेशनल टरमरिक बोर्ड को मंजूरी मिलने के बाद तेलंगाना बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना ऐसा राज्य है, जहां हल्दी की खेती के लिए सबसे अच्छी जमीन है. टरमरिक बोर्ड को मंजूरी मिलने से तेलंगाना के किसानों की मांग पूरी हुई है. भारत सरकार ने राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की स्थापना को मंजूरी दे दी है. तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, गुजरात, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि के किसानों को इससे फायदा होगा.
बता दें कि टरमरिक बोर्ड नए उत्पादों के अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देगा और मूल्यवर्धित हल्दी उत्पादों के लिए हमारे पारंपरिक ज्ञान को विकसित करेगा. भारत से हल्दी का निर्यात 2030 तक बढ़कर 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. नेशनल टरमरिक बोर्ड हल्दी क्षेत्र के विकास और वृद्धि में मसाला बोर्ड और अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय की सुविधा प्रदान करेगा.