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तवांग में तनाव बढ़ते ही तैनात होने वाले Sukhoi-30MKI की जान लीजिए War Power

अरुणाचल प्रदेश के तवांग में तनाव बढ़ा. भारतीय वायुसेना ने तत्काल Sukhoi-30MKI तैनात कर दिया. चीनी ड्रोन्स को भगाने के लिए सुखोई जब गुर्राते हुए आगे बढ़े तो चीनियों की घिघ्घी बंध गई. ड्रोन वापस बुलाए लेकिन 300 सैनिक भेज दिए. उनका जवाब हमारे जवानों ने दिया. जानिए सुखोई फाइटर जेट की ताकत...

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चीन सीमा के पास भारतीय वायुसेना के स्टेशन पर सुखोई जैसे कई घातक फाइटर जेट तैनात हैं. (फोटोः PTI)
चीन सीमा के पास भारतीय वायुसेना के स्टेशन पर सुखोई जैसे कई घातक फाइटर जेट तैनात हैं. (फोटोः PTI)

तवांग (Tawang) में कई दिनों से चीन (China) भारतीय जवानों को भड़काने का काम कर रहा था. सीमा पार से ड्रोन्स भेज रहा था. इसका जवाब देने के लिए तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन (Tejpur Air Force Station) से सुखोई-30 एमकेआई (Sukhoi-30MKI) फाइटर जेट्स की सॉर्टीज की गईं. जैसे ही भारतीय वायुसेना के ये लड़ाकू विमान गुर्राते हुए आसमान में पहुंचे. चीनियों ने डर कर अपने ड्रोन्स को वापस बुला लिया. अब यह जानना जरूरी है कि चीनी सुखोई-30एमकेआई से क्यों डरते हैं. यह कितना ताकतवर फाइटर जेट है.  

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सुखोई-30एमकेआई रूस के सुखोई-27 का एडवांस्ड वर्जन है. इंडियन एयरफोर्स के पास 272 सुखोई-30 एमकेआई हैं. तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन पर 2009 से ये तैनात हैं. वहां पर एयरफोर्स की सेकेंड स्क्वॉड्रन है. यह इकलौता ऐसा फाइटर जेट है, जिसे अलग-अलग देश अपने हिसाब से ढाल लेते हैं. या बदलाव करवाते हैं. ताकि अपने देश की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से उसकी तैनाती कर सकें. 

India China Face-Off
 
भारत में सुखोई-30एमकेआई को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) बनाती है. रूस के सुखोई कॉर्पोरेशन ने इस फाइटर जेट को 1995 में बनाना शुरु किया था. 1997 में HAL ने इसका लाइसेंस लिया. फिर फाइटर जेट को अपने हिसाब से बदलना शुरू कर दिया. एमकेआई (MKI) को रूसी भाषा में (Modernizirovannyi Kommercheskiy Indiski - Modernised Commercial Indian) कहते हैं. 

India China Face-Off

सुखोई की लंबाई 72 फीट है. विंगस्पैन 48.3 फीट है. ऊंचाई 20.10 फीट है. इसका वजन 18,400 KG है. इसमें लीयुल्का एल-31एफपी आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन लगे हैं, जो उसे 123 किलोन्यूटन की ताकत देता है. इस इंजन और अपनी एयरोडायनेमिक बनावट की बदौलत फाइटर जेट 2120 किमी प्रतिघंटा की स्पीड से उड़ता है. इसकी रेंज भी 3000 किलोमीटर है. बीच रास्ते में ईंधन मिल जाए तो यह 8000 किलोमीटर तक जा सकता है. यह करीब 57 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. 

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सुखोई-30एमकेआई में 30mm की एक ग्रिजेव-शिपुनोव ऑटोकैनन लगी है. जो एक मिनट में 150 राउंड फायर करती है. यानी दुश्मन का विमान, ड्रोन या हेलिकॉप्टर बच नहीं सकते. इसमें 12 हार्ड प्वाइंट्स लगे हैं. यानी वो जगह जहां पर हथियार लगाया जाता है. इसमें 4 तरह के रॉकेट्स लगा सकते हैं. चार तरह की मिसाइल और 10 तरह के बम लग सकते हैं. या फिर इन सबका मिश्रण लगाया जा सकता है. 

India China Face-Off

सुखोई-30एमकेआई के हार्डप्वाइंट्स में हथियारों को दागने की सुविधा ज्यादा है. अगर मल्टीपल रैक्स लगाए जाएं तो इसमें 14 हथियार लगा सकते हैं. यह कुल 8130 KG वजन का हथियार उठा सकता है. इस फाइटर जेट में ब्रह्मोस मिसाइलें भी तैनात हो सकती हैं. चीन भी जानता है कि ब्रह्मोस मिसाइल कितनी घातक और तेज है. अगर भारत ने ब्रह्मोस से हमला किया तो चीन को बचाव का मौका भी नहीं मिलेगा. 

सुखोई में लगने वाली ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज 500 किलोमीटर है. भविष्य में ब्रह्मोस मिसाइलों को मिकोयान मिग-29के, हल्के लड़ाकू विमान तेजस और राफेल में भी तैनात करने की योजना है. इसके अलावा पनडुब्बियों में लगाने के लिए ब्रह्मोस के नए वैरिएंट का निर्माण जारी है. अगले साल तक इन फाइटर जेट्स में ब्रह्मोस मिसाइलों को तैनात करने की तैयारी पूरी होने की संभावना है. 

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