सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मॉब लिंचिंग के मामलों को चुनिंदा तरीके से नहीं उठाया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि यह केस किसी धर्म विशेष या किसी एक मामले के बारे में नहीं है बल्कि इसका संबंध सभी राज्यों से सामने आने वाले इस तरह के मामलों से है.
सर्वोच्च अदालत ने विशेष रूप से राजस्थान के उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की हत्या के बारे में सवाल पूछा, जिनकी 2022 में पैगंबर मोहम्मद पर एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करने के बाद हत्या कर दी गई थी.
मॉब लिंचिंग से संबंधित PIL पर सुनवाई
जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मॉब लिंचिंग से संबंधित एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए विभिन्न राज्य सरकारों से छह हफ्ते में मॉब लिंचिंग और गौरक्षकों की घटनाओं पर की गई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संगठन के वकील निजाम पाशा ने मध्य प्रदेश और हरियाणा में मॉब लिंचिंग की घटनाओं का जिक्र किया.
कोर्ट ने कन्हैया लाल की हत्या को लेकर पूछा सवाल
जवाब में जस्टिस कुमार ने पाशा से कहा कि याचिकाओं में जिन घटनाओं का जिक्र है उन्हें विशेष राज्यों से चुनिंदा तरीके से नहीं चुना जाना चाहिए बल्कि इसमें सभी घटनाओं का उल्लेख किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने जब राजस्थान के दर्जी कन्हैया लाल की हत्या के बारे में पूछा तो वकील पाशा ने बेंच को बताया कि वर्तमान याचिका में उसका जिक्र नहीं है. इस पर कोर्ट ने कहा, 'आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि अगर इसमें सभी राज्य शामिल हैं तो यह बिल्कुल भी चुनिंदा न हो.'
'धर्म के आधार पर घटनाओं का न देखें'
एक स्टेट की तरफ से कोर्ट में पेश हुईं सीनियर एडवोकेट अर्चना पाठक ने बहस के दौरान कहा, 'याचिका एक खास तरह का दावा करती है कि मुस्लिम मॉब लिचिंग का शिकार हो रहे हैं जबकि इसमें दूसरे धर्म के लोगों की मॉब लिंचिंग का कोई जिक्र नहीं है.' इस पर कोर्ट ने कहा कि धर्म के आधार पर घटनाओं को न देखें. हमें बड़ी वजह की ओर ध्यान देना चाहिए. मामले की सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद होगी.