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कुश्ती महासंघ के चुनाव पर जारी रहेगी रोक! पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इनकार

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट जाकर स्टे हटाने की गुहार लगाने के बजाय सीधा सुप्रीम कोर्ट आ गए. सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका यानी स्पेशल लीव पेटिशन लगाई. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस पंकज मित्तल की पीठ ने उन्हें हाईकोर्ट का रास्ता दिखा दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट इस मामले को समुचित महत्व देगा.

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सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने को कहा है
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने को कहा है

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनाव पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा लगाए स्टे ऑर्डर मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है. स्टे के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता आंध्र प्रदेश रेसलिंग फेडरेशन को सलाह दी कि वो स्टे लगाने वाले हाईकोर्ट में ही अपनी ये दलीलें रखते हुए याचिका लगाएं.

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दरअसल, याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट जाकर स्टे हटाने की गुहार लगाने के बजाय सीधा सुप्रीम कोर्ट आ गए. सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका यानी स्पेशल लीव पेटिशन लगाई. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस पंकज मित्तल की पीठ ने उन्हें हाईकोर्ट का रास्ता दिखा दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जाएं भरोसा है कि पक्षकार बनाए जाने की अर्जी देने के बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट इस मामले को समुचित महत्व देगा.

आंध्र प्रदेश रेसलिंग एसोसिएशन की दलील है कि एक संगठन की वजह से पूरे महासंघ के चुनाव पर रोक लगाना उचित नहीं. क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय पहलवानों के हिस्सा लेने में दिक्कत हो रही है. ये राष्ट्रीय ग्लानि की बात है कि चुनाव ना होने से यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने भारतीय कुश्ती महासंघ की मान्यता भी इसी वजह से रद्द कर दी है. हरियाणा एमेच्योर रेसलिंग एसोसिएशन ने खुद को भी निर्वाचन मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज में शामिल करने की गुहार लगाते हुए हाईकोर्ट में एक अर्जी लगाई थी. इस अर्जी पर हाईकोर्ट ने चुनाव पर स्टे लगा दिया था. 

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