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SC ने ठुकराई महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की मांग, कहा- एक्टर की मौत का मतलब कानून व्यवस्था फेल होना नहीं

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उथलपुथल के बीच सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की गई. सर्वोच्च अदालत ने इस याचिका को ठुकरा दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए SC में याचिका
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राष्ट्रपति के पास जाएं

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक जंग से इतर शुक्रवार को एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में डाली गई. याचिकाकर्ता ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की, इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया. चीफ जस्टिस ने इस मामले में कहा कि अगर ऐसी मांग करनी है तो राष्ट्रपति के पास जाइए.

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत, कंगना रनौत का दफ्तर तोड़े जाने का मामला, पूर्व नेवी अधिकारी पर शिवसैनिकों द्वारा किए गए हमले का उदाहरण दिया गया. याचिकाकर्ता ने कहा कि महाराष्ट्र में राज्य मशीनरी फेल हो गई है. साथ ही आरोप लगाया गया कि सत्ताधारी दल आरोपियों को बचाने में लगे हैं. 

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे ने टिप्पणी की है कि एक एक्टर की मौत होने का मतलब ये नहीं है कि राज्य में कानून-व्यवस्था फेल हो गई है, आपने जो भी उदाहरण दिए हैं वो मुंबई के हैं. 

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महाराष्ट्र में कई मसलों पर जारी है राजनीतिक जंग

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में लगातार इन मसलों को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा जा रहा है. राज्य की उद्धव ठाकरे सरकार को कानून व्यवस्था के मसले पर निशाने पर लिया गया है. पहले भी राजनीतिक दलों और कंगना रनौत ने उद्धव सरकार पर सुशांत मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था.
 
हालांकि, बाद में सुशांत के परिवार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुशांत केस की जांच सीबीआई के हवाले कर दी थी. इसके अलावा कंगना रनौत के दफ्तर पर तोड़े जाने के मामले पर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. 

इसके अलावा भी महाराष्ट्र में लगातार राजनीतिक जंग हो रही है. बीते दिनों राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री को एक चिट्ठी लिखी गई, जिसमें राज्य में धार्मिक स्थलों को खोलने की बात की गई. हालांकि, राज्य सरकार ने अनलॉक 5 की जो ताजा गाइडलाइन्स जारी की हैं उनमें मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों को बंद रखने का ही फैसला किया है. 

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