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JEE-NEET परीक्षा पर विवाद जारी, क्या है छात्र-पैरेंट्स और टीचर्स की राय

शिक्षकों को भी लगता है कि छात्र पिछले साल से परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और परीक्षा आयोजित की जानी है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात छात्रों की सुरक्षा है और इसमें कोई भी समझौता नहीं करने वाला है.

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सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो)
सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सितंबर में जेईई और नीट की परीक्षा
  • सुप्रीम कोर्ट से मिल चुकी है इजाजत
  • कोरोना को लेकर अब भी विरोध

कोरोना वायरस संकट के बीच छात्रों की कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं अभी होनी बाकी हैं. इनमें नीट और जेईई की परीक्षा भी शामिल है. इन दोनों परीक्षाओं की तारीख को इस साल कई बार टाला जा चुका है. अब दोनों परीक्षाएं सितंबर के महीने में होने के लिए प्रस्तावित हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी नीट और जेईई परीक्षा कराने के‌ खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर परीक्षा करावाए जाने के लिए हरी झंडी दे दी है. जिसके बाद इस मामले में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है.

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नीट और जेईई परीक्षा करवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जेईई परीक्षा की छात्रा रीना सिंह का कहना है, 'हम लगातार परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. इसलिए हमारे लिए परीक्षा में बैठना बेहतर है, नहीं तो हम प्रभावित होंगे. हम परीक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. मुझे यकीन है कि सरकार भी सभी सावधानी बरतने वाली है. यह वास्तव में बुरा होगा यदि सरकार एहतियाती उपायों की परवाह नहीं करेगी क्योंकि हम परीक्षा में बैठने के लिए तैयार हैं. यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. यदि छात्रों में से किसी को कोई समस्या है तो केवल सरकार ही जिम्मेदार होगी. हमारा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव उपाय करेंगे कि किसी को नुकसान न उठाना पड़े.'

जेईई परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट के अभिभावकों में एक बीना सिंह ने कहा, 'इस महामारी के कारण बच्चों की पढ़ाई में बाधा आ रही है. परीक्षा आवश्यक है. बच्चों को खुद के बारे में सावधान रहना चाहिए और परीक्षा के लिए वे जहां भी जाएं, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए. मैं सरकार के जरिए लिए गए फैसलों के समर्थन में हूं.'

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इसके अलावा शिक्षकों को भी लगता है कि छात्र पिछले साल से परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और परीक्षा आयोजित की जानी है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात छात्रों की सुरक्षा है और इसमें कोई भी समझौता नहीं करने वाला है.

छात्रों की बड़ी संख्या चुनौती

एक वरिष्ठ शिक्षक राजीव सिंह ने कहा, 'करीब 9 लाख छात्र जेईई परीक्षा के लिए बैठेंगे और 16 लाख छात्र नीट परीक्षा के लिए बैठेंगे. माता-पिता में से कुछ छात्रों के स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हैं. विशेष रूप से इस महामारी की स्थिति में स्टूडेंट्स की इतनी संख्या को समायोजित करना एक चुनौती है. मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करता हूं क्योंकि छात्र पिछले एक साल से परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. हमें सभी एहतियाती कदम उठाने होंगे और भारी गैदरिंग से बचने की भी कोशिश करनी होगी. हम कुछ लोगों के लिए पूरे सत्र में बाधा नहीं डाल सकते.'

राजीव सिंह का कहना है, 'सरकार को हर छात्र के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि अभी भी कुछ जगह लॉकडाउन में हैं. उन सभी छात्रों को शुभकामनाएं जो परीक्षा में बैठने जा रहे हैं. प्रत्येक छात्र को अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और परीक्षाओं को क्रैक करना चाहिए. एक शिक्षक के रूप में मैं माता-पिता और उनके बच्चों की स्थिति को पूरी तरह से समझता हूं. वे वर्तमान परिदृश्य के बारे में डरते हैं. छात्रों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और सुरक्षित रहने के लिए सभी एहतियाती उपाय करने चाहिए.'

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कोर्ट ने क्या कहा?

मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई को स्थगित करने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि क्या देश में सब कुछ रोक दिया जाए? एक कीमती साल को यूं ही बर्बाद हो जाने दिया जाए? वहीं याचिका में कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते सितंबर में प्रस्तावित जेईई मेन्स और नीट यूजी परीक्षाओं को टालने की मांग की गई थी.

 

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