चुनाव आयोग (Election Commission) को अधिक स्वायत्ता देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय और कानून मंत्रालय को नोटिस जारी कर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की गई थी कि आयोग के तीनों आयुक्तों को समान अधिकार मिलने चाहिए. यानी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की तरह बाकी दोनों आयुक्तों को भी समान अधिकार मिलने चाहिए.
याचिका में यह भी कहा गया कि जरूरत पड़ने पर आयुक्तों को भी हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए. इसके अलावा आयोग का अपना स्वायत्त सचिवालय होने की भी मांग की गई. इस मामले पर अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी.
याचिका में कहा गया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्तों और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया होनी चाहिए. याचिका में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्रा प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग में निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए भी ऐसी ही प्रक्रिया होनी चाहिए. इसके साथ ही सचिवालय के कामकाज के लिए संसद की तर्ज पर केंद्रीकृत फंड होने की भी मांग की गई.
चुनाव आयुक्तों को हटाने की प्रक्रिया भी मुख्य चुनाव आयुक्त की तरह ही महाभियोग के जरिए हो ताकि सरकार उन पर दबाव नहीं बना पाए. मौजूदा समय में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ही महाभियोग के जरिए हटाने की प्रक्रिया है. बाकी दोनों आयुक्त सकारी आदेश पर हटाए जा सकते हैं.