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'चुनाव कराने की जल्दबाजी क्यों, आप ऐसे हस्तक्षेप करेंगे तो लोकतंत्र...', दिल्ली LG को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

दिल्ली नगर निगम की मेयर शैली ओबेरॉय की याचिका पर न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने नोटिस जारी किया है. याचिका में 27 सितंबर को हुए MCD स्थायी समिति के छठे सदस्य के चुनाव को चुनौती दी गई है.

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Supreme Court of India (File Photo)
Supreme Court of India (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को नोटिस जारी किया है. अदालत ने एलजी के उस आदेश पर आपत्ति जताई है, जिसमें एलजी ने MCD के 6वें सदस्य का चुनाव कराने के लिए निर्देश जारी किया था. कोर्ट ने इस तरीके पर आपत्ति जताई है. कोर्ट ने पूछा कि चुनाव कराने में आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों?

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दिल्ली नगर निगम की मेयर शैली ओबेरॉय की याचिका पर न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने नोटिस जारी किया है. याचिका में 27 सितंबर को हुए MCD स्थायी समिति के छठे सदस्य के चुनाव को चुनौती दी गई है. याचिका में यह भी कहा गया है कि इन मामलों को एक साथ जोड़ना भी उचित नहीं था.

जस्टिस नरसिम्हा ने एलजी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन से कहा,'चुनाव कराने की इतनी जल्दी क्यों? नामांकन का मुद्दा भी है. मेयर को बैठक की अध्यक्षता करनी है. आपको शक्ति कहां से मिलती है? 487 के तहत? यह एक कार्यकारी शक्ति है. अगर आप इस तरह से हस्तक्षेप करेंगे तो लोकतंत्र का क्या होगा?.'

शीर्ष अदालत ने दो सप्ताह बाद सुनवाई तय करते हुए मौखिक रूप से कहा कि स्थायी समिति के अध्यक्ष के लिए चुनाव नहीं होने चाहिए. संक्षिप्त सुनवाई के दौरान जैन ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि चुनौती केवल चुनाव याचिका में ही दी जा सकती है और उसे दायर किया जाना चाहिए.

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इस पर पीठ ने कहा,'ये चुनाव याचिका के अधीन नहीं हैं. मुझे लगता है कि यह ऐसा मामला है, जहां हमें नोटिस जारी करना होगा. खास तौर पर जिस तरह से आप 487 के तहत शक्ति का प्रयोग करते हैं, वह बहुत गंभीर है.'

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