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दुबई में नौकरी कर रही युवती को बहाना बनाकर बुलाया घर...फिर छीना पासपोर्ट, घरवालों से परेशान होकर कोर्ट पहुंची महिला

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि एक बालिग लड़की को उसकी इच्छा के बिना कुछ भी करने पर मजबूर नहीं किया जा सकता है. अदालत ने ये फैसला 25 वर्षीय युवती के प्रेमी की याचिका पर सुनाया है. साथ उच्चतम न्यायालय ने याचिका की सुनवाई में देरी को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट को फटकार भी लगाई है.

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सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि एक बालिग लड़की को उसकी इच्छा के बिना कुछ भी करने पर मजबूर नहीं किया जा सकता है. अदालत ने ये फैसला अपने माता-पिता द्वारा नजरबंद की 25 वर्षीय युवती के प्रेमी की याचिका पर सुनाया है. साथ उच्चतम न्यायालय ने याचिका की सुनवाई में देरी को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट को फटकार भी लगाई है.

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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीआर गवई और संदीप मेहता की बेंच में टिप्पणी करते हुए कहा कि जब एक हैबियस कॉर्पस डेटेन्यू मारी चिदंबरम ने अपनी याचिका में कर्नाटक हाईकोर्ट को साफ शब्दों में बताया था कि वह अपना करियर बनाने के लिए दुबई वापस जाना चाहती है तो उच्च न्यायालय को उसे तत्काल प्रभाव से मुक्त कराने का आदेश देना चाहिए था. लेकिन उन्होंने चौदह मौकों पर इस मामले को स्थगित किया और अब इसे अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया. कोर्ट द्वारा मामले को साल 2025 में पोस्ट करना ऐसे मामले में हाईकोर्ट की ओर से संवेदनशीलता की कमी दिखाता है. सच में, सही आदेश जारी न कर कोर्ट ने लड़की की हिरासत में सहयोग दिया है.

कोर्ट ने पुलिस को दिया निर्देश 

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल शामिल हो तो फैसले में एक दिन की देरी भी मायने रखती है. कोर्ट ने अब पुलिस अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि वह पीड़ित को पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज 22 जनवरी तक उसके माता-पिता से लेकर सौंप दिए जाएं. उसे फिलहाल अपने प्रेमी के माता-पिता (जो भारत में रहते हैं) के साथ जाने की अनुमति भी दे दी गई है.

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'माता-पिता ने बनाया शादी का दबाव'

बता दें कि महिला दुबई में रहकर काम कर रही थी और उस व्यक्ति के साथ रिश्ते में थी. माता-पिता ने उसे उसके दादा के खराब स्वास्थ्य का बहाना बनाकर भारत वापस आने के लिए कहा और फिर उसे और उसके पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों को अपने पास रख लिया. महिला ने अदालत को यह भी बताया कि माता-पिता उस पर अपने ही समुदाय के एक व्यक्ति के साथ तय विवाह के लिए सहमत होने के लिए दबाव डालने की कोशिश कर रहे थे.

SC कर्नाटक HC को लगाई फटकार

इसी को लेकर युवती के ब्वॉयफ्रेंड ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन सुनवाई को कई बार स्थगित कर दिया गया था और अंत में मामले की सुनवाई को 2025 के लिए सूचीबद्ध कर दिया था. इससे नाराज सुप्रीम कोर्ट में HC और पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई है.

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