संसद की सुरक्षा में सेंध मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया है. कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 9 सितंबर तक बढ़ाई, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि सभी आरोपियो को चार्जशीट की सॉफ्ट कॉपी दी जाए. पाटियाला हाउस कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी.
इस केस में 7 जून को पुलिस ने सभी 6 गिरफ्तार आरोपियों मनोरंजन डी, सागर शर्मा, अमोल शिंदे, नीलम आजाद, ललित झा और महेश कुमावत के खिलाफ करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी.
वहीं, दिल्ली पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 186, 353, 153, 452,201, 34, 120B, समेत UAPA की धारा 13,16,18 के तहत पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी.
बता दें कि संसद के नए भवन पर 2001 के आतंकी हमले की बरसी के दिन पिछले साल 13 दिसंबर को सुरक्षा में लापरवाही की घटना हुई थी. लोकसभा की कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा से दो आरोपी सदन के भीतर कूद गए थे और उन्होंने ‘केन’ के जरिए पीले रंग का धुआं फैला दिया था.
बाद में सांसदों ने इन्हें पकड़ लिया था. उसी समय दो अन्य आरोपियों अमोल शिंदे और नीलम आजाद ने भी संसद परिसर के बाहर ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगाते हुए केन से रंगीन धुआं छोड़ा था. इस मामले में शामिल सभी आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.
तीन लेयर में है संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था
लोकसभा और राज्यसभा में अपने डायरेक्टर सिक्योरिटी सिस्टम होते हैं. विजिटर पास के लिए लोकसभा सचिवालय के फॉर्म पर किसी सांसद का रिकमेंडेशन सिग्नेचर जरूरी होता है. इसके साथ ही विजिटर को पास के लिए आधार कार्ड ले लाना होता है. विजिटर जब रिसेप्शन पर पहुंचता है, तो वहां मौजूद सुरक्षा गार्ड महिला और पुरुष को अलग-अलग फ्रिस्किंग करके जांच करते हैं. इसके बाद रिसेप्शन पर फोटो आईडी कार्ड बनता है. मोबाइल फोन को रिसेप्शन पर ही जमा कर लिया जाता है. इसके बाद विजिटर फोटो आइडेंटिटी कार्ड के साथ सिक्योरिटी कमांडो के जरिए गैलरी तक पहुंचता है. विजिटर गैलरी में ठहरने के लिए एक समयावधि होती है, जिसके बाद उसे बाहर कर दिया जाता है.