नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी CEO चित्रा रामकृष्ण की कोर्ट से मिली राहत बरकरार रहेगी. सुप्रीम कोर्ट ने चित्रा की वैधानिक जमानत बरकरार रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत देने के आदेश में दखल देने से इनकार किया है. कोर्ट में जस्टिस अजय रस्तोगी और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने सीबीआई की याचिका खारिज करते हुए कहा कि हमें हाईकोर्ट के हुक्म में हस्तक्षेप करने का कोई वाजिब कारण नहीं मिला.
लिहाजा हम अपने आदेश में स्पष्ट करते हैं कि कोर्ट की टिप्पणी केवल डिफ़ॉल्ट जमानत देने के लिए की गई है ना कि मैटर की मेरिट पर है. ये टिप्पणी ट्रायल की मेरिट को प्रभावित नहीं करेगी. मामले के ट्रायल के दौरान कानून के सभी प्रश्न खुले रहेंगे. दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले साल सितंबर में रामकृष्ण और एनएसई के पूर्व ग्रुप ऑपरेशन हेड आनंद सुब्रमण्यन को इस घोटाले में सीबीआई की ओर से दर्ज कराए गए एक मामले में वैधानिक जमानत दी थी. रामकृष्ण की जमानत पर रिहाई के आदेश को सीबीआई ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी.
क्या है आरोप
चित्रा रामकृष्ण को ईडी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में जमानत दी है. इससे पहले उन्हें एनएसई कर्मचारियों की फोन टैपिंग के मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दी थी. चित्रा रामकृष्ण अप्रैल 2013 से दिसंबर 2016 तक एनएसई की एमडी और सीईओ थी. उन पर अपने कार्यकाल के दौरान कथित हिमालयन योगी के इशारे पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का संचालन करने और संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है. इस संबंध में जांच करते हुए चित्रा और आनंद सुब्रमण्यम समेत अन्य लोगों की गिरफ्तारी की गई थी. आनंद सुब्रमण्यम पर गंभीर आरोप हैं कि वह एनएसई के कामकाज में दखल देते थे. इसके साथ ही उन पर कर्मचारियों के फोन टैपिंग का भी आरोप लगाया गया.