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EXCLUSIVE: CFSL वैज्ञानिक ने कहा- सुशांत सिंह राजपूत की हत्या के कोई सबूत नहीं

विशेषज्ञों के मुताबिक गला घोंटने की स्थिति में निशान गर्दन के चारों ओर एक क्षैतिज आकार लेगा. कुमार ने कहा कि अब तक हत्या के कोई सबूत नहीं हैं. आप इसे जबरन उस ओर नहीं मोड़ सकते. यह हत्या जैसा नहीं लगता है.

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सुशांत सिंह राजपूत (फाइल फोटो)
सुशांत सिंह राजपूत (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जून में हुई थी सुशांत की मौत
  • सीबीआई कर रही है जांच
  • अब तक हुए हैं कई खुलासे

सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच में शामिल सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने खुलासा किया है कि उनकी टीम को अब तक ऐसा कोई अकाट्य सबूत नहीं मिला है जिससे अभिनेता की हत्या होने का संकेत मिलता हो.

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CFSL के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी अमितोष कुमार ने इंडिया टुडे स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम को बताया, "गला नहीं घोंटा गया. उसने (राजपूत ने) फांसी लगाई. लिगचर (बंधन) के निशान बताते हैं कि मौत उसके फांसी लगाने से हुई." कुमार उस सीबीआई टीम का भी हिस्सा थे, जिसने पिछले महीने राजपूत के बांद्रा स्थित घर के सीन को रीक्रिएट किया था. 

कुमार ने इंडिया टुडे के इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टर को बताया, "यह मैं था जो वहां (राजपूत के घर) गया था, एक बार नहीं बल्कि दो बार."  फॉरेंसिक वैज्ञानिक के मुताबिक साक्ष्यों से फांसी के साफ संकेत दिखते हैं. अभिनेता के गले की ऑटोप्सी तस्वीरों में V-आकार का निशान था जो फंदे से शरीर के ऊपर से लटके रहने पर बनता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, गला घोंटने की स्थिति में निशान गर्दन के चारों ओर एक क्षैतिज (होरिजेंटल) आकार लेगा. कुमार ने कहा, "अब तक हत्या के कोई संकेत (सबूत) नहीं हैं. आप इसे जबरन उस ओर नहीं मोड़ सकते. यह हत्या जैसा नहीं लगता है.”

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'किसी फाउल प्ले का शक नहीं' 

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें राजपूत की मौत में किसी फाउल प्ले का संदेह दिखता है, कुमार ने जोर देकर कहा कि इस तरह का संकेत देने वाला कोई ठोस सबूत नहीं है. कुमार ने कहा, "उस तरह का कुछ भी अब तक सामने नहीं आया है. आखिरकार आपको अदालत में साबित करना होगा कि यह एक हत्या है. यह मीडिया (का एक वर्ग) है, जो हत्या-हत्या की बात गा रहा है, केस कैसे शुरू हुआ और देखें अब कहां चला गया है."

इंडिया टुडे की ओर से अगस्त में कमीशन किए गए राजपूत फाइल्स के स्वतंत्र फॉरेंसिक विश्लेषण से सामने आया कि सस्पेंशन (निलंबन) के अपेक्षाकृत निचले प्वाइंट से भी फांसी हो सकती है. CFSL वैज्ञानिक कुमार ने यह भी संकेत दिया कि राजपूत के घर पर बिस्तर और पंखे के बीच की जगह में फांसी लगाने से मौत संभव थी. 

रिपोर्टर ने पूछा, "कुछ लोग कहते हैं कि इतनी जगह फांसी के लिए पर्याप्त नहीं थी." इस पर कुमार ने जवाब दिया, "वह (उस स्थान पर) आसानी से फांसी लगा सकता था."  सीबीआई के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आने वाली CFSL अपराध के उन साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करती है जो केंद्रीय जांच एजेंसी, दिल्ली पुलिस, न्यायपालिका और सरकारी विभागों-मंत्रालयों के सतर्कता प्रकोष्ठों (विजिलेंस विंग्स) की ओर से रेफर किए जाते हैं.  

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CBI के निष्कर्ष का इंतजार 

राजपूत की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की जांच के आधार पर सीबीआई अपना अंतिम निष्कर्ष देगी. इस बीच, जांच एजेंसी एम्स के डॉक्टरों की एक टीम की रिपोर्ट का भी विश्लेषण कर रही है जिसने राजपूत के सैंपल्स की जांच की थी. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक एम्स पैनल को सुशांत के विसरा में जहर के कोई सबूत नहीं मिले.

 

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