भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज पुण्यतिथि है. बुधवार को इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्री, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उन्हें नमन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन. उनके विचार और लोगों की सेवा के लिए इच्छाशक्ति हमें हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे, राष्ट्र की एकता के लिए उनके द्वारा किए गए योगदान को नहीं भुलाया जाएगा.
Remembering Dr. Syama Prasad Mookerjee on his Punya Tithi. His noble ideals, rich thoughts and commitment to serve people will continue to inspire us. His efforts towards national integration will never be forgotten.
— Narendra Modi (@narendramodi) June 23, 2021
पीएम मोदी के अलावा बीजेपी की ओर से भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नमन किया गया. बीजेपी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लिखा कि राष्ट्रीय एकता व अखंडता के पर्याय, महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि.
राष्ट्रीय एकता व अखंडता के पर्याय, महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि। pic.twitter.com/aE1QZUnWMM
— BJP (@BJP4India) June 23, 2021
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बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मौके पर कहा कि आज बीजेपी पूरे देश में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस मना रही है. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त हो, उसके लिए आंदोलन चलाया था. एक निशान, एक विधान, एक प्रधान का नारा दिया था. नड्डा बोले कि देश की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन लगाया, उनसे प्रेरणा लेकर भाजपा कार्यकर्ता देश को मजबूत बनाने के लिए अग्रसर हैं.
कौन थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी?
आपको बता दें कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे. भारतीय जनसंघ से ही बाद में भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अगुवाई में जनसंघ ने देश के बंटवारे का विरोध किया.
यूं तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तबकी कांग्रेस सरकार की नीतियों की आलोचना की, हालांकि वो पहली केंद्रीय कैबिनेट का हिस्सा भी रहे. लेकिन, जम्मू-कश्मीर के मसले पर उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दिया. 1953 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बिना परमिट के जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर निकले, जहां उन्हें गिरफ्तार किया गया था. 23 जून, 1953 में जेल में ही उनकी मौत हो गई थी.