जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता रहे सैयद अली शाह गिलानी (Syed Ali Shah Geelani) का बुधवार रात निधन हो गया. वो 92 साल के थे. गुरुवार को श्रीनगर के हैदरपोरा में दफनाया गया. 29 सितंबर 1929 को जन्मे गिलानी पाकिस्तान समर्थक रहे हैं.
उनके निधन पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने शोक जाहिर करते हुए ट्वीट किया, 'गिलानी साहब के निधन की खबर से दुखी हूं. हम ज्यादातर बातों पर सहमत नहीं हो सकते हैं, लेकिन मैं उनकी दृढ़ता और उनके विश्वासों के साथ खड़े होने के लिए उनका सम्मान करती हूं. अल्लाहताला उन्हें जन्नत और उनके परिवार तथा शुभचिंतकों के प्रति संवेदना प्रदान करें.'
Saddened by the news of Geelani sahab’s passing away. We may not have agreed on most things but I respect him for his steadfastness & standing by his beliefs. May Allah Ta’aala grant him jannat & condolences to his family & well wishers.
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) September 1, 2021
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने फेसबुक पर लिखा, 'इन्ना लिलाही वा इन्ना इलाही राजियूं...गिलानी साहब के परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं. अल्लाह उन्हें जन्नत में जगह दे.'
पाकिस्तान में भी शोक
उनके निधन पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने दुख जताया. इमरान खान ने कहा है कि गिलानी के सम्मान मेंं पाकिस्तान का झंडा झुका रहेगा.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी (Shah Mahmood Qureshi) ने गिलानी के निधन पर दुख जाहिर किया है.
वहीं, पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा (General Qamar Javed Bajwa) ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है.
तीन बार विधायक रहे हैं गिलानी
कश्मीरी नेता सैयद अली शाह गिलानी का जन्म 29 सितंबर 1929 को हुआ था. वह भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में एक पाकिस्तान समर्थक कश्मीरी अलगाववादी नेता रहे हैं. वो पहले जमात-ए-इस्लामी कश्मीर के सदस्य था, लेकिन बाद में तहरीक-ए-हुर्रियत की स्थापना की. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी समर्थक दलों के समूह, ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया. वो 1972, 1977 और 1987 में जम्मू-कश्मीर के सोपोर सीट से विधायक भी थे. हालांकि उन्होंने जून 2020 में हुर्रियत छोड़ दी.