कोलकाता की महिला रेजिडेंट डॉक्टर के साथ हुए रेप-मर्डर केस में बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस मामले में कई मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर्स के 9 प्रतिनिधि पिछले 100 घंटे से धरने पर बैठे हुये हैं. इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों ने डॉक्टरों की हड़ताल खत्म कराने के लिए उनके साथ बुधवार देर रात बैठक की. हालांकि, ये बैठक बेनतीजा रही और कोई हल नहीं निकल सका.
देर रात दो घंटे तक चली बैठक के बाद प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि उन्हें राज्य सरकार से मौखिक आश्वासन के अलावा कुछ भी ठोस नहीं मिला. राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की 'संपूर्ण सफाई' सुनिश्चित करने और मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा बढ़ाने की मांगों पर लिखित निर्देश देने से इनकार कर दिया.
बैठक में शामिल हुए ये अधिकारी
यह बैठक कोलकाता के साल्ट लेक में स्थित राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय स्वास्थ्य भवन में आयोजित की गई. इस बैठक में के मेडिकल कॉलेजों के करीब 20 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. सरकार का प्रतिनिधित्व मुख्य सचिव मनोज पंत, गृह सचिव नंदी मुखर्जी और डीजीपी राजीव कुमार ने किया.
50 डॉक्टर्स ने दिया था इस्तीफा
हाल ही में अनशल पर बैठे जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में कई सीनियर कलीग्स भी आ गये थे. एकजुटता दिखाते हुए आरजी कर अस्पताल के 50 से ज्यादा डॉक्टरों ने जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में सामूहिक इस्तीफा दे दिया था. हालांकि, राज्य सरकार ने दावा किया था कि उसे ऐसा कोई इस्तीफा नहीं मिला है.
ये है डॉक्टर्स की मांग
1. डॉक्टर्स की मांग है कि अस्पतालों के लिए एक सेंट्रलाइज्ड रेफरल सिस्टम की स्थापना की जाये.
2. कार्यस्थलों पर उचित सुविधाएं सुनिश्चित हो और अस्पतालों में पुलिस सुरक्षा बढ़ाई जाये. बेड वैकेंसी मॉनीटरिंग सिस्टम लागू किया जाये.
3. स्थायी महिला पुलिस कर्मियों की भर्ती हो. डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के रिक्त पदों को तेजी से भरा जाये.